फैसला / अब सैटेलाइट से होगी बाढ़ नियंत्रण योजनाओं की मॉनिटरिंग

प्रतिकात्मक तस्वीर। प्रतिकात्मक तस्वीर।
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प्रतिकात्मक तस्वीर।प्रतिकात्मक तस्वीर।

  • जल संसाधन विभाग ने उच्च तकनीक का इस्तेमाल करने की कार्ययोजना बनायी
  • परियोजनाओं का प्रबंधन वेब पोर्टल से, संचालित योजनाओं पर मुख्यालय रखेगा नजर

दैनिक भास्कर

Jan 11, 2020, 06:58 PM IST

पटना. बाढ़ नियंत्रण योजनाओं के कार्यान्वयन को लेकर राज्य सरकार गंभीर है। उसने सैटेलाइट के माध्यम से इसकी मॉनिटरिंग का फैसला किया है। जल संसाधन विभाग ने इस संबंध में व्यापक कार्ययोजना भी बनायी है। बाढ़ संर्घषात्मक कार्यों में उच्च और अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।

परियोजनाओं का प्रबंधन वेब पोर्टल से किया जा रहा है। बाढ़ नियंत्रण योजनाओं में पूर्ण गुणवत्ता को ध्यान में रखकर ही इसकी उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग की योजना है। इसमें सारे कार्यों पर ऑनलाइन नजर रहेगी। बाढ़ नियंत्रण योजनाओं में हर साल औसतन एक हजार करोड़ रुपए की योजनाओं पर काम होता है। इसमें तटबंधों को दुरुस्त करने से लेकर तटबंध बचाव की सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। पिछले दो वर्षों में इस पर ढाई हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

तटबंधों की पेट्रोलिंग और संवेदनशील स्थानों पर बोल्डर, बालू की बोरियों, वीए क्रेट वायर, नायलान क्रेट, जियो बैग की पर्याप्त उपलब्धता इस योजना का ही हिस्सा है। तटबंधों, नदियों के प्रवाह पर तो सैटेलाइट से नजर रखी ही जा रही है। जल संसाधन विभाग इस साल भी मई के पहले सारे बाढ़ नियंत्रण कार्यों को पूरा करने का निर्देश संबंधित इंजीनियिरों को दिया है।

विभाग के अधिकारी मानते हैं कि सैटेलाइट से नजर रखे जाने से मुख्यालय स्तर पर त्वरित मानिटरिंग हो सकेगी। यही नहीं काम की गुणवत्ता कैसी है, इसकी भी तत्काल जांच संभव हो सकेगी। काम में गड़बड़ी या उसकी धीमी प्रगति पर भी मुख्यालय से अपेक्षित कार्रवाई हो सकेगी। खासकर कोसी, महानंदा, बागमती, कमला बलान, गंगा, गंडक, बूढ़ी गंडक, अधवारा जैसी नदियों को लेकर होने वाले कार्यों में नयी कार्ययोजना विशेष रुप से प्रभावी होंगी। इन नदियों पर हर साल दर्जनों योजनाओं का कार्यान्वयन होता है।

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