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छठ की शाम अस्ताचलगामी सूर्य हो जाते है पूज्य

मानव सभ्यता के इतिहास में छठ ही ऐसा पर्व है जिसमें अस्ताचलगामी सूर्य की पूजा होती है। अन्य दिनों में डूबते सूर्य...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 04:52 AM IST
Sisvan - on the evening of chhath the unstable sun becomes sun worshiped
मानव सभ्यता के इतिहास में छठ ही ऐसा पर्व है जिसमें अस्ताचलगामी सूर्य की पूजा होती है। अन्य दिनों में डूबते सूर्य को दरिद्रता की निशानी मानी जाती है, वहीं छठ में डूबते सूर्य को अर्घ्य देने से घर में सुख समृद्धि आती है। हमारी संस्कृति में बहुत से पर्व होते हैं जिनको बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है। हर पर्व व त्योहार का अपना अलग ही महत्व होता है। महापर्व छठ की अद्भुत आस्था है। महेन्द्रनाथ मंदिर के पुजारी तारकेश्वर उपाध्याय के अनुसार वैसे तो हमारे धर्म में हर त्यौहार का अपना-अपना अलग ही महत्व होता है। हर पर्व की अपनी पूजा-पाठ करने का तरीका भी अलग होता है। छठ में खास पूजा भगवान सूर्य की अराधना का है। उगते सूर्य को अर्घ देकर घर परिवार की सुख- समृद्धि की कामना की जाती है। मान्यता के अनुसार माता छठ की कई कथाएं प्रचलित है। जिनका अनुशरण व्रत करने वाली महिला या पुरुष को जरूर करना चाहिए। व्रत की कथाएं अपने में एक अलग ही हमारी धार्मिक प्रथा को उजागर करती है। कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को छठ पूजा पूरे विधि-विधान से मनाई जाती है। यह महापर्व चार दिन का होता है।

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Sisvan - on the evening of chhath the unstable sun becomes sun worshiped
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