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आरपीएसएफ की एक बटालियन को कमांडो फाॅर रेलवे सिक्योरिटी में बदला गया, बिहार-झारखंड से कश्मीर तक की ट्रेनों की सुरक्षा करेगा

एक वर्ष पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।
  • 7 हजार ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं
  • वाई-फाई के जरिए इसकी मॉनीटरिंग भी की जाएगी

पटना. बिहार-झारखंड से कश्मीर घाटी तक ट्रेनों को आतंकी या नक्सली खतरों से बचाने के पहली बार स्पेशलाइज्ड फोर्स ‘कोरस’ (कमांडों फॉर रेलवे सिक्यूरिटी) को लगाया गया है। यह प्रोफेशनल कमांडो यूनिट है। देश में 3 स्थानों धनबाद, जम्मू-कश्मीर व पूर्वोत्तर में इनकी तैनाती की गई है। ट्रेनों में तैनाती से लेकर अन्य सुरक्षात्मक कार्यों में इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। धनबाद में तैनात यूनिट बिहार-झारखंड की सीमा से लेकर अन्य संवेदनशील इलाकों पर नजर रख रही है। आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार के मुताबिक आरपीएसएफ की एक बटालियन को कोरस में बदला गया है। इसमें करीब 1200 जवान व अफसर हैं। कोरस को आतंकी या नक्सली खतरों से निपटने के लिए विशेष कमांडों ट्रेनिंग दी गई है। यह विशेष यूनिफॉर्म के साथ बुलेट प्रूफ जैकेट, हेलमेट, ऑटोमेटिक हथियार व अन्य अत्याधुनिक संसाधनों से लैस है।


7 हजार ट्रेनों में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
सुरक्षा को और चाक-चौबंद बनाने के लिए 7 हजार ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। वाई-फाई के जरिए इसकी मॉनीटरिंग भी की जाएगी। किसी तरह की कोई अप्रिय गतिविधि या अपराध होने पर तत्काल कार्रवाई करने में आसानी होगी। इसके अलावा जल्द ही ‘रेलवे सुरक्षा एप’ को लांच किया जाएगा। आरपीएफ के डीजी ने बताया कि एप को लेकर अगले माह रेल पुलिस के साथ बैठक होनी है। इस एप के जरिए चलती ट्रेनों में होने वाली घटना का एफआईआर दर्ज करने में पीड़ित यात्रियों को परेशानी नहीं होगी।

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