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पटना यूनिवर्सिटी की रिसर्च में अब दिखेगी ओरिजनलिटी

2 वर्ष पहले
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जेईई मेन क्लियर करने के बाद भी मालूम था कि एक अच्छा इंजीनियर नहीं बन सकता, लेकिन दिल बोल रहा था कि एक अच्छा सिंगर, लिरिक्स राइटर या फिर कंपोजर तो जरूर बन सकता हूं। इसी कशमकश और भरोसे को लेकर पटना के सगुना मोड़ के पास रहने वाले अभिषेक कुमार गुप्ता अब बॉलीवुड मेंं बिहार के ख्यात रैपर के रूप में पहचान बना रहे हैं।

उन्हें बॉलीवुड इंडस्ट्री में अभिषेक टैलेंटेड के नाम से जाना जाता है। यू-ट्यूब पर उनके खुद के कम्पोज और रैप सॉन्ग ‘या हबीबी’ धमाल मचा रहा है। म्यूजिवे चैनल पर रिलीज हुए इस गाने को अब तक लगभग पांच मिलियन लोग देख चुके हैं।

बॉलीवुड में ये उनका पहला गाना है, जो दो-तीन हफ्ते पहले ही रिलीज हुआ है। इसमें बॉलीवुड के फेमस सिंगर ऐश किंग और ज्योतिका तांगड़ी ने भी अपनी आवाज दी है। वहीं, म्यूजिक अभिषेक और अमोल ने दिया है। आने वाले कई बॉलीवुड मूवीज और वेब सीरिज के लिए भी उन्होंने गाया है। अगले महीने ही उनका दूसरा बॉलीवुड सांग ‘ताके नैना’ रिलीज होने वाला है।

खादी उत्पाद को मॉल में बिक्री के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा

पॉलिटिकल रिपोर्टर. पटना

उद्योग मंत्री श्याम रजक के कहा कि नए-नए डिजाइन के खादी उत्पादों को मॉल में बिक्री के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए खादी बोर्ड से संबद्ध खादी संस्थानों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। मंत्री शुक्रवार को उद्योग विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जैसे ही नए डिजाइन की खादी वस्तुओं की आपूर्ति मॉल में हो तो इसकी प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। नकली खादी की दुकान के विरूद्ध कार्रवाई करने के लिए विज्ञापन प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया। मंत्री ने हर हॉल में हैंडलूम हॉट की सारी तैयारी 22 मार्च से पहले करने का आदेश दिया गया। उद्योग मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति-जनजाति योजना के तहत अभी तक 1274 लाभुकों के बीच 61 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।

अपने दोस्त को लड़की पर अभद्र टिप्पणी करने से रोक लेंगे, उस दिन होगा रेप मुक्त देश..इस संदेश को लेकर निकले तीन युवा पटना पहुंचे

सिटी रिपोर्टर. पटना

जिस दिन आप अपने दोस्त को किसी लड़की पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी करने से रोक लेंगे, उसी दिन से भारत देश रेप मुक्त भारत की ओर कदम बढ़ा लेगा..
इस संदेश को लेकर दिल्ली से साइकिल पर निकले तीन युवा शुक्रवार को पटना में बेली रोड पर मिले। हरियाणा हिसार के पीयूष मोंगा, राजस्थान के योगेश रावल और रेंचो देसाई ने बताया, उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने
कैम्पेन यूथ अगेंस्ट रेप की शुरुआत की। युवाओं ने अपनी साइकिल में लिख रखा है कि वे 28 राज्यों, 9 केंद्र शासित प्रदेशों में 400 से ज्यादा जिलों के 700 नगरों और 2000 गांवों से गुजरेंगे। इस दौरान वे करीब 30 हजार किमी की यात्रा साइकिल से पूरी करने का साहस जुटाया है। मिशन रेप मुक्त भारत के मकसद को लेकर चले युवाओं ने अपनी यात्रा 17 अक्टूबर को जंतर-मंतर से शुरू की और पूरे भारत के 450 जिलों, सरकारी स्कूलों, कॉलेजों में 28 राज्यों और 9 केंद्र शासित प्रदेशों में जागरूकता अभियान चलाकर 30,000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इस अभियान को निर्भया की माँ ने हरी झंडी दिखाई।

ये है मिशन

मिशन का लक्ष्य युवाओं को बलात्कारियों के लिए मौत की सजा दिलाना है। समाज से बलात्कार और झूठे आरोपों को समाप्त करने के लिए एकजुट करना है और झूठे बलात्कार के आरोप लगाने वाली महिलाओं के लिए न्यूनतम 14 साल की कैद की मांग भी है। हर राज्य में फोरेंसिक लैब बनाई जानी चाहिए और महिलाओं को आत्मरक्षा शिक्षा प्रदान करनी चाहिए। इसके लिए विभिन्न राज्यों में सोशल हैंडल के माध्यम से देश की युवा पीढ़ी को एकजुट करके अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है।

नुक्कड़ नाटक में कोरोना से बचाव के बताए उपाय

सिटी रिपोर्टर. पटना

कॉलेज ऑफ कॉमर्स आर्ट्स एंड साइंस में दो दिवसीय स्ट्राइड कार्यक्रम की शुरूआत एक नुक्कड़ नाटक के साथ हुई। शुक्रवार को नुक्कड़ नाटक में छात्राओं ने कोरोना वायरस पर जागरूकता फैलाने के साथ-साथ उससे बचने के उपाय बताए। कार्यक्रम का उद्घाटन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने किया। उन्होंने कहा कि वार्षिक कार्यक्रम स्ट्राइड का मुख्य उद्देश्य स्टूडेंट्स द्वारा मॉडल, पोस्टर और नाटक के माध्यम से आम लोगों के बीच सशक्त संदेश पहुंचाना है। स्ट्राइड के माध्यम से छात्रों द्वारा अभिनव और सृजनात्मक विचारों का प्रदर्शन उनकी योग्यता को प्रमाणित करता है।

ये हैं नए नियम

जीरो लेवल : 10% तक समानता से परेशानी नहीं।

लो लेवल : 10-20% तक की समानता वाले रिसर्च वर्क या थीसिस को रिसर्चर को बदलाव करने के लिए वापस करना होगा। जरूरी बदलाव कर रिसर्चर छह माह में रिपोर्ट दाेबारा दे सकेगा।

मिड लेवल : 20-40% तक की समानता वाले रिसर्च वर्क व थीसिस को रिजेक्ट कर देने का प्रावधान किया। सुपरवाइजर को फ्रेश रजिस्ट्रेशन के लिए दो साल के लिए बैन कर दिया जाएगा।

हाई लेवल : 40-60% तक की समानता वाले रिसर्च में उसी थीम पर थीसिस जमा करने से रिसर्चर और सुपरवाइजर को भी दो साल के लिए प्रतिबंधित किया जाएगा।

वेरी हाई लेवल : 60% से अधिक समानता वाले रिसर्च वर्क में रिसर्चर व सुपरवाइजर को पांच साल के लिए प्रतिबंधित करने का प्रावधान है।

सत्र पीएचडी

डिग्री

2011-12 216

2012-13 212

2013-14 187

2014-15 174

2015-16 52

2016-17 78

2017-18 89

2018-19 48

प्लेजरिज्म के पुराने नियम

जीरो लेवल : 20% तक समानता से परेशानी नहीं।

लो लेवल : 20-40% तक की समानता वाले रिसर्च वर्क को रिसर्चर को बदलाव करने के लिए वापस करना था। जरूरी बदलाव कर रिसर्चर 6 माह में रिपोर्ट दाेबारा सबमिट कर सकता था।

मिड लेवल : 40-60% तक की समानता वाले रिसर्च वर्क व थीसिस को रिजेक्ट कर देने का प्रावधान था। सुपरवाइजर को फ्रेश रजिस्ट्रेशन के लिए दो साल प्रतिबंधित कर दिया जाता था।

हाई लेवल : 60-80% तक की समानता वाले रिसर्च में उसी थीम पर थीसिस जमा करने से रिसर्चर और सुपरवाइजर को दो साल के लिए प्रतिबंधित किया जाता था।

वेरी हाई लेवल : 80% से अधिक समानता वाले रिसर्च वर्क में रिसर्चर और सुपरवाइजर को पांच साल के लिए प्रतिबंधित करने का प्रावधान था।

हमारी कथाओं में दिखती है प्रयोगधर्मिता

प्रणव के ‘मैथिली साहित्य पर आंदोलन का प्रभाव’ के सवाल पर प्रदीप ने कहा कि हमारे कथाओं में प्रयोगधर्मिता और आंदोलन का प्रभाव दिखता है। लेकिन, उन्होंने कभी भी अपने मूल विषय पर उसे हावी नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि दिमाग में अचानक ही भाव आते है। लेखक बस उसे विषय चुन विधा तय करके लिखना आरंभ करते हैं।

कथा और उपन्यास में हमारे परिवेश के ही रहते हैं लोग

रायपुर के एक कॉलेज में सिंगर ज्योतिका तांगड़ी, ऐश किंग और अमोल के साथ परफॉर्मेंस देते अिभषेक।

राजस्थान में अपना मिशन पूरा कर पटना पहुंची टीम

insider

स्ट्राइड में लगाए मॉडल और लगाया हेल्थ कैंप

दो दिवसीय स्ट्राइड में 16 कोर्सेज के छात्रों ने अपने मॉडल प्रस्तुत किए। मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी विभाग के छात्रों ने रक्त जांच शिविर में लोगों के स्वास्थ्य की जांच की। बायोटेक्नॉलॉजी विभाग के छात्रों ने मॉडल से पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को दर्शाया। अर्थशास्त्र विभाग के छात्रों ने पर्यावरण को दर्शाता मॉडल प्रस्तुत किया। भौतिकी विभाग के छात्रों ने दैनिक जीवन में भौतिकी के उपयोग को मॉडल के जरिए बताया।

News Brief

परिवार में किसी सदस्य ने इंजीनियर बनने के लिए नहीं बनाया दबाव

अभिषेक बताते हैं, संत कैरेंस सेकेंडरी स्कूल से मैट्रिक करने के बाद इंटरमीडिएट के लिए डीएवी में एडमिशन लिया। उनके पिता विजय कुमार साह और मां बेबी साह का पूरा सहयोग मिला। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा होने के बाद भी उन पर किसी ने इंजीनियरिंग करने के लिए दबाव नहीं बनाया। पुलिसमैन पिता को भी म्यूजिक में काफी इंटरेस्ट है।

एफएम चैनल से मिली पहचान : वे बताते हैं, इंटरमीडिएट के बाद उन पर म्यूजिक का ऐसी खुमारी चढ़ी कि वे शोज में परफॉर्म करने के लिए खुद से लोगों से अप्रोच करना शुरू कर दिए। इसके बाद छोटे-छोटे शोज में परफॉर्म करने के दौरान ही उन्हें एक एफएम चैनल ने बुलाया और जन्माष्टमी पर उन्हें रैप सांग गाने को कहा गया। उन्होंने ‘कृष्णा’ टाइटल से रैप किया, जो काफी चर्चित रहा। उनकी मानें तो उनके जीवन में इसी के बाद बड़ा बदलाव आया।

By एन. रघुरामन

‘या हबीबी’ से छाए बिहारी रैपर अभिषेक अब दिखेंगे ताके नैना में

पटना, शनिवार 14 मार्च , 2020

एजुकेशन रिपोर्टर. पटना

पटना विवि में रिसर्च की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को और खरा बनाने की कोशिश की गई है। रिसर्च वर्क में गड़बड़ी रोकने के लिए नियमों को सख्त कर दिया गया है। विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल ने प्लेजरिज्म (साहित्यिक चोरी) के नए मानदंड तय किए हैं। इसके लिए अब 10 फीसदी से अधिक समानता वाली रिसर्च को भी प्लेजरिज्म के दायरे में लाया गया है। इसके पहले यह मानक 20 फीसदी का रहा। नई प्लेजरिज्म पॉलिसी एक मार्च से प्रभावी कर दी गई है। नई पॉलिसी के तहत अब थीसिस में 60% से अधिक समानता मिली तो रिसर्चर और सुपरवाइजर दोनों को पांच साल के लिए रिसर्च वर्क से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। पहले यह प्रावधान 80 प्रतिशत से अधिक समानता वाले रिसर्च वर्क में किया गया था। विवि प्रशासन का कहना है, गुणवत्तापूर्ण शोध हमारी प्राथमिकता है। शोध की गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं। शोध की मौलिकता को ध्यान में रखते हुए प्लेजरिज्म सॉफ्टवेयर का भी प्रयोग किया जा रहा है। दूसरी ओर शोध की मौलिकता को लेकर नियमों में सख्ती बरतने की शुरुआत के बाद से हर साल पीएचडी करने वालों की संख्या में कमी आई है।

समीक्षा में उद्योग मंत्री श्याम रजक बोले-

केंद्रीय विद्यालयों में इस बार 49 दिन की होंगी गर्मी की छुट्टियां

सिटी रिपोर्टर | केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) स्कूलों में समर वेकेशन को लेकर शेड्यूल जारी कर दिया गया है। अब स्कूलों में छुट्टियां 2 मई से 19 जून तक के लिए होंगी। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने छुट्टियों को लेकर इस संबंध में नोटिफिकेशन स्कूलों को भेजा है। इसके हिसाब से स्कूलों में वेकेशन 49 दिन का रहेगा। इसमें स्टूडेंट्स को अलग-अलग कक्षाओं के हिसाब से प्रोजेक्ट वर्क भी दिए जाएंगे। इसमें प्राइमरी सेक्शन के लिए बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट एक्टिविटी स्टूडेंट्स को करनी होगी। इसमें बेकार और पुराने सामान से नई कलात्मक वस्तुएं बनाकर छात्रों को लानी होंगी। वहीं सीनियर क्लासेस में स्टूडेंट्स को साइंटिफिक प्रोजेक्ट का टास्क दिया जाएगा।

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन 15 मार्च को

सिटी रिपोर्टर | मां शारदे मंच, रांची द्वारा 15 मार्च को बिहार साहित्य सम्मेलन सभागार, कदमकुआं, पटना में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। मंच की अध्य्क्ष नीतू सिन्हा तरंग ने बताया कि इस कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवि सह पूर्व सांसद डॉ ओमपाल सिंह निडर, सौरभ सैनी अलवर, डॉ आरती कुमारी मुजफ्फरपुर, सरोज झा झारखंडी रामगढ़, कुंवर प्रांजल प्रताप आगरा शामिल होंगे। कवि सम्मेलन का मंच संचालन शंकर कैमुरी करेंगे। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डॉ अनिल सुलभ व विशिष्ट अतिथि हृदय नारायण झा होंगे। कार्यक्रम को सफल बनाने में मानव कल्याण, मोकामा भी अपना सहयोग कर रहे हैं।

नई प्लेजरिज्म पॉलिसी 1 मार्च से प्रभावी

60 फीसदी से अधिक समानता मिली तो रिसर्चर व सुपरवाइजर होंगे पांच साल के लिए बैन

ईमानदार शिक्षिका के खिलाफ षड्यंत्र ने खोली सबकी पोल -02

वाईसीसी पटना-डीवाईएम सीसी मुजफ्फरपुरकी टीम सेफा. में -03

सिटी रिपोर्टर. पटना

खेतान फाउंडेशन, मसि इंक और श्री सीमेंट की ओर से बीआईए हॉल में शुक्रवार को ‘आखर’ का आयोजन किया गया। इसमें मैथिली साहित्य पर चर्चा करने के लिए मैथिली के प्रख्यात कथाकार और उपन्यासकार प्रदीप बिहारी उपस्थित थे। वहीं, उनसे बातचीत कथाकार-आलोचक प्रणव ने की। बातचीत के क्रम में प्रदीप ने बताया कि उन्होंने अपना लेखन गीत और कविता से आरंभ किया। इसकी शुरुआत खजौली उच्च विद्यालय में वर्ष 1975 में हुई। उन्होंने बताया कि उनके विद्यालय में जीवकांत के ही सानिध्य में साहित्य का माहौल बना। पहली बार 1976 में मिथिला मिहिर की नेना भूटका अंक में उनका एकांकी प्रकाशित हुआ। प्रणव के ‘कथा लेखन’ के सवाल पर प्रदीप ने कहा कि दादी मां को किस्सा सुनाते वक्त उनमें लिखने की निरंतरता आई। उन्होंने कहा कि उपन्यास में प्रदीप और कथा में अशोक को पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा समकालीन मतलब एक समय का और समकालीनता मतलब एक दृष्टि। उन्होंने बताया कि उनके कथा और उपन्यास का पात्र हमारे परिवेश के ही 90 फीसदी लोग होते हैं।

‘आखर’ में मैथिली साहित्य पर चर्चा

टीम ने देश में बलात्कार मुक्त होने की यात्रा पर हैं। उन्होंने राजथान में अपना अभियान पूरा कर लिया है और अब वे गुजरात में हैं। राजस्थान में उन्हें वहां रहने वाले लोगों से भोजन और आवास में भारी समर्थन मिला। अब जैसे वे गुजरात में हैं, हम चाहते हैं कि गुजरात के लोग हरसंभव तरीके से उनका समर्थन करें और हमारे देश को समाज की बुराइयों से बचाने के लिए हमारे साथ जुड़ें और हमारी टीम को उनके साथ जुड़कर और अपने क्षेत्रों में उनका समर्थन कर अपनी यात्रा को पूरा करने में मदद करें।

नुक्कड़ नाटक पेश करते कॉलेज के छात्र और छात्राएं।

पटना के रहने वाले रैपर ने जेईई मेन क्लियर करने के बावजूद म्यूजिक को बनाया अपना कॅरियर, पिता ने भी दिया पूरा साथ

नई जबान

मैं 1993 में ट्रेन से बॉम्बे (अब मुंबई) से पुणे जा रहा था। मैं वहां एक डर्बी के समर्थन के लिए गया था, जिसकी इकट्‌ठी की गई राशि नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्लाइंड को दान की जानी था। उस दौरान दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार साहब ने मुझसे कहा, ‘रघु, आज जब लोग बात करते हैं, तो मुझे लगता है कि उनके मुंह से झाड़ू बरसती हैं, फूल नहीं।’

वे कितने सही थे। यदि हम मानते हैं कि शब्द हमारे विचारों को आवाज देते हैं और विचार हमारे रवैये को नियंत्रित करते हैं, तो यह माना जा सकता है कि हमारी बात की गुणवत्ता हमारे चुने हुए शब्दों से ही बनती है। इसलिए उन शब्दों को दिमाग से निकाल दें जो अपराधबोध पैदा करते हैं और आपको सीमित करते हैं, जबकि ऐसे शब्द सीखें जो आपकी सराहना करते हैं और आपको बेहतर बनाते हैं।

‘समस्या’ शब्द को ‘चुनौती’ से बदलें; ‘ठीक हूं’ की बजाय ‘अच्छा हूं’ कहें। नई जबान के साथ जीना शुरू करें। हमारे शब्द ऐसे होने चाहिए जिनसे हमारे दिल और सुनने वाले के दिल में भी फूल बरसें।

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