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भास्कर खास / माता-पिता ने कहा विदेशी हो गए तो नॉटिंघम की नौकरी छोड़ क्रिकेट अकादमी खोला, तैयार कर रहे भविष्य के क्रिकेटर

अपनी पत्नी वंदना के साथ उज्जवल सिंह। अपनी पत्नी वंदना के साथ उज्जवल सिंह।
इंडोर नेट पर प्रैक्टिस करते युवा क्रिकेटर। इंडोर नेट पर प्रैक्टिस करते युवा क्रिकेटर।
क्रिकेट गुड्स का शो-रूम। क्रिकेट गुड्स का शो-रूम।
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अपनी पत्नी वंदना के साथ उज्जवल सिंह।अपनी पत्नी वंदना के साथ उज्जवल सिंह।
इंडोर नेट पर प्रैक्टिस करते युवा क्रिकेटर।इंडोर नेट पर प्रैक्टिस करते युवा क्रिकेटर।
क्रिकेट गुड्स का शो-रूम।क्रिकेट गुड्स का शो-रूम।

दैनिक भास्कर

Jan 15, 2020, 12:55 PM IST

पटना(कन्हैया सिंह). माता पिता के यह कहने पर की विदेशी हो गए हो, इंग्लैंड के नॉटिंघम की अच्छी खासी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर उज्जवल सिंह और उनकी पत्नी वंदना सिंह लौटकर पहले दिल्ली और फिर बाद में बिहार लौट आए। मूल रूप से मुजफ्फरपुर के अधिवक्ता रमारंजन प्रसाद सिंह के बेटे उज्जवल सिंह सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वह नॉटिंघम में कम्पूटर निर्माता कंपनी डेल में कार्यरत थे। उनकी पत्नी वंदना स्कॉटलैंड बैंक में काम कर रही थीं। दोनों का अच्छा खासा इनकम था। एक बार पर्व में दोनों घर नहीं आ पाए तो गांव वाले विदेशी कह तना मारने लगे पर जब माता-पिता के मन में भी उनके विदेशी हो जाने की सोच बैठ गई तो उज्जवल ने तुरंत इंग्लैंड छोड़ने का निर्णय लिया। पत्नी वंदना से भी इसमें साथ दिया। दोनों इंग्लैंड छोड़ दिल्ली आए। 

यहां भी उज्जवल डेल में ही नौकरी करने लगे। माता पिता को दिल्ली ले जाने का प्रयास किया लेकिन दोनों ने कहा कि बिहार ही अच्छा लगता है। इसे बीच मां रेनू सिंह बीमार हुईं तो दिल्ली को भी छोड़ दोनों पटना आ गए।  यहां आकर दोनों बच्चों को भविष्य का क्रिकेटर बनाने में जुटे हैं। राजधनी से सटे खगौल के दानापुर रेल मंडल स्थति जगजीवन स्टेडियम में उज्जवल ने क्रिकेट अकादमी ऑफ पठान्स की फ्रेंचाइजी  शुरू किया। जिसका उद्घाटन एक साल पहले क्रिकेटर युसूफ पठान ने किया था। इस अकादमी में दाखिल बच्चों को विशेष रूप से प्रशिक्षित कोच क्रिकट की ट्रेनिंग देते हैं।  बच्चों को क्रिकेट की हर बारीकी सिखाई जाती है। उज्जवल और वंदना खुद हर वक्त ग्राउंड पर मौजूद रहे प्रैक्टिस सेशन पर नजर रखते हैं।

बेटे को बेहतर प्रशिक्षण मिले इसलिए खोल ली क्रिकेट अकादमी
बिहार लौटने के बाद माता पिता ने कहा कि अब यहां कोई बिजनेस कर लो। उज्ज्वल सिंह ने अपने पूर्वजों के गांव में अस्पताल खोलने का प्लान बनाया। सारा प्रोजक्ट तैयार कर इसे अंतिम रूप देने में जुटे थे। इस बीच पटना में रहने के दौरान बेटे का शौक देख  क्रिकेट एकेडमी में दाखिल करने का प्लान बनाया।   काफी तलाशने के बाद भी उन्हें ढंग की क्रिकेट अकादमी नहीं मिली। इसके बाद उज्ज्वल ने अस्पताल की योजना छोड़ खुद ही क्रिकेट एकेडमी खोलने की ठान ली। जब माता पिता को बताया तो उन्होंने कहा कि क्या पागलपन है, पर उज्ज्वल अपने फैसले पर अडिग रहे। फ्रेंचाइजी के लिए वीरेंद्र सहवाग से संपर्क किया पर वहां से कहा गया कि बिहार में क्रिकेट का स्कोप नहीं है। इसके बाद उज्जवल के हौसले को देख इरफान और युसूफ पठान मान गए। उज्ज्वल ने  प्रोजक्ट का खाका बना दानापुर रेल मंडल को दिखाया। रेल अधिकारियों से अनुमति के बाद क्रिकेट एकेडमी ऑफ पठान्स शुरू किया गया।

शुरू किया बिहार का पहला क्रिकेट इंडोर नेट
उज्जवल ने खगौल में भी राज्य का पहला क्रिकट इंडोर नेट तैयार किया है। जहां टर्फ पर बच्चों को बॉलिंग मशीन से प्रैक्टिस कराया जाता है। प्रैक्टिस करने वाले बच्चे इसे एक अनोखा अनुभव बताते हैं।  इसके साथ ही क्रिकेट स्पोर्ट्स गुड्स का बहुत ही खास शोरुम भी खोला है। जहां रिआयती दरों पर एसएस, एसजी, कुकाबुरा, जीएम, बास, डीएससी, मूनबॉकर, एएसआईसीएस, ओमटेक्स आदि हर ब्रांड का क्रिकट का सामान उपलब्ध है।

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