लोकसभा सीट पाटलिपुत्र / बदले समीकरण में एक बार फिर रामकृपाल और मीसा आमने-सामने

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 07:34 PM IST



रामकृपाल यादव और मीसा भारती। रामकृपाल यादव और मीसा भारती।
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रामकृपाल यादव और मीसा भारती।रामकृपाल यादव और मीसा भारती।

  • प्रत्याशी खुद के काम से ज्यादा अपने नेता के नाम पर मांग रहे वोट 
  • एक को मोदी लहर तो दूसरे को सहानुभूति वोटों से है उम्मीद

पटना. बिहार की सर्वाधिक चर्चित सीटों में एक है पाटलिपुत्र। यहां भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सभाएं कर चुके हैं। वहीं राजद प्रत्याशी के पक्ष में राबड़ी देवी, तेजस्वी, तेजप्रताप एक मंच से प्रचार कर रहे हैं। 

 

पिछले चुनाव की तरह ही इस बार भी भाजपा से रामकृपाल यादव और राजद से मीसा भारती आमने-सामने हैं। पिछली बार रामकृपाल विजयी रहे थे और मीसा पराजित हुई थीं, लेकिन रंजन यादव भी जदयू की ओर से प्रत्याशी थे। इस बार समीकरण बदला हुआ है। जदयू अब एनडीए का घटक है, जबकि रालोसपा महागठबंधन का अहम हिस्सा बना है। रामकृपाल यादव साफ-सुथरी छवि और अपनी सहज उपलब्धता के कारण क्षेत्र में सभी वर्गों के बीच जाने जाते हैं। 

 

2014 में पूरे देश में मोदी लहर और राजद से बगावत कर भाजपा में आने का लाभ रामकृपाल को मिला था। अपनी व्यक्तिगत छवि के कारण माय समीकरण में वे दरार लगाने में सफल रहे थे। जातीय गोलबंदी के बावजूद सजातीय वोट पाने में सफल रहे थे। लेकिन इस बार मुकाबला कांटे भरा है। एनडीए के वोट बैंक को संभालना, सजातीय वोट बैंक में सेंध चुनौती भरा है। माले के समर्थन देने के कारण उसका कैडर वोट महागठबंधन के लिए मजबूती प्रदान कर रहा है। साथ ही उपेंद्र कुशवाहा के कारण कुशवाहा वोट किधर जाता है, यह अभी तय नहीं है। वैसे दोनों पक्ष इसे रिझाने की कोशिश में हैं।

 

रामकृपाल यादव, भाजपा प्रत्याशी
केंद्र सरकार में राज्यमंत्री हैं। 2014 से पहले तीन बार लोकसभा चुनाव जीते हैं। राज्यसभा के सदस्य रहे। बिहार विधान परिषद के सदस्य भी रहे। भाजपा में शामिल होने से पहले लालू प्रसाद के करीबी थे।

 

मीसा भारती, राजद उम्मीदवार
लालू-राबड़ी की बड़ी बेटी हैं। 2014 में यहां राजद से चुनाव लड़ीं। 2016 में राज्यसभा के लिए चुनी गईं। डॉक्टरी की पढ़ाई की हैं, लेकिन अब राजनीति में पूरी तरह व्यस्त।

 

समीकरण 1

 

कुशवाहा फैक्टर से परेशानी
एनडीए के पक्ष में मोदी लहर और नीतीश कुमार की अतिपिछड़ों, महिलाओं में लोकप्रियता। शराबबंदी का सकारात्मक प्रभाव। अगर रामकृपाल व्यक्तिगत लोकप्रियता के कारण सजातीय वोटों में सेंधमारी करे, तो पलड़ा भारी। रालोसपा के कारण कुशवाहा फैक्टर को जितना कम कर सकें, लाभ मिलेगा।
 
समीकरण 2

 

गुटबाजी से हो सकती है हानि 
लालू प्रसाद के जेल में रहने के कारण माय समीकरण पहले से ज्यादा मजबूत है। आपसी गुटबाजी के कारण हानि हो सकती है। मनेर फैक्टर को मिनिमाइज करना होगा। माले के वोट को महागठबंधन में शिफ्ट करना होगा। क्षेत्रीय समीकरण के कारण इसमें खतरा है।

 

इस सीट पर कब्जा करने का लालू परिवार कर रहा तीसरा प्रयास
मीसा भारती का यह दूसरा चुनाव है। महागठबंधन का माय समीकरण उनके साथ है। इस बार लालू प्रसाद के जेल में होने के कारण जातीय सहानुभूति भी है। माय समीकरण पहले से ज्यादा मजबूत है। अन्य पिछड़ी जातियों का भी सहयोग मिले, इसके लिए जोड़-तोड़ चल रही है। दानापुर और फुलवारी को छोड़कर सभी विधानसभा क्षेत्रों में महागठबंधन के एमएलए हैं। माले के समर्थन के कारण पालीगंज और मसौढ़ी में समीकरण महागठबंधन के पक्ष में है। लेकिन यह अंतिम समय तक बना रहे, यह चुनौतीपूर्ण है। विपक्षियों द्वारा लालू को साजिश कर जेल भेजे जाने की चर्चा से सहानुभूति लहर पैदा करने की कोशिश चल रही है। इस सीट पर कब्जा करने की लालू परिवार की यह तीसरी कोशिश है। पहली बार 2009 में खुद लालू प्रसाद रंजन यादव से हार गए थे। 2014 में मीसा रामकृपाल से हारीं।

 

विधानसभा पर किसका कब्जा

  • दानापुर-आशा देवी, भाजपा
  • बिक्रम-सिद्धार्थ, कांग्रेस
  • मनेर-भाई वीरेंद्र, राजद
  • पालीगंज-जयवर्धन यादव, राजद
  • मसौढ़ी-रेखा देवी, राजद
  • फुलवारीशरीफ-श्याम रजक, जदयू

 

जातीय समीकरण

  • यादव-24.37%
  • मुस्लिम-8.22%
  • भूमिहार-10.22%
  • कुर्मी-6.99%
  • अन्य-23.82%

 

  • कुल वोटर-1917353
  • पुरुष वोटर-934086
  • महिला वोटर-801988
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