कवायद / पटना को फिर नसीब होगी गंगा की गोद, राज्य सरकार का भगीरथ प्रयास शुरू



कलेक्ट्रेट घाट से ली गई इस तस्वीर में गंगा करीब 4 किमी दूर चली गई है। फोटो : जितेंद्र कुमार कलेक्ट्रेट घाट से ली गई इस तस्वीर में गंगा करीब 4 किमी दूर चली गई है। फोटो : जितेंद्र कुमार
दो दशक पहले पटना में ऐसे बहती थी गंगा। दो दशक पहले पटना में ऐसे बहती थी गंगा।
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कलेक्ट्रेट घाट से ली गई इस तस्वीर में गंगा करीब 4 किमी दूर चली गई है। फोटो : जितेंद्र कुमारकलेक्ट्रेट घाट से ली गई इस तस्वीर में गंगा करीब 4 किमी दूर चली गई है। फोटो : जितेंद्र कुमार
दो दशक पहले पटना में ऐसे बहती थी गंगा।दो दशक पहले पटना में ऐसे बहती थी गंगा।

  • गंगा के अंदर मौजूद सिल्ट को निकाला जाएगा और पायलट चैनल से इसकी धारा को पटना के निकट लाया जाएगा
  • कई जगह शहर से चार किलोमीटर तक दूर चली गई है नदी, कई जगह बन गए हैं आईलैंड

Dainik Bhaskar

Aug 03, 2019, 03:36 AM IST

पटना (आलोक चंद्र). गंगा फिर से पटना के किनारे बहेगी। शहर से तीन-चार किलोमीटर तक दूर चली गई गंगा को पटना के किनारे लाने के लिए राज्य सरकार का भगीरथ प्रयास शुरू हो गया है। इसके लिए व्यापक कार्ययोजना बनायी गई है। इसमें गंगा के अंदर मौजूद सिल्ट को निकाला जाएगा और पायलट चैनल से इसकी धारा को पटना के निकट लाया जाएगा। इसके लिए 234 करोड़ की योजना मंजूर की गई है।

 

याेजना काे 15 जून 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पहले चरण में कुर्जी घाट से कालीघाट तक गंगा को किनारे लाना है। इसके बाद गांधी सेतु के निकट बन रहे आईलैंड का सिल्ट हटाना है। इस समय गंगा कई स्थानों पर तो चार किलोमीटर तक दूर चली गई है। जहां नदी पटना से दूर हो गई है, वहां बड़े-बड़े मैदान बन गए हैं और हजारों एकड़ जमीन पर खेती तक होने लगी है।

 

डिसिल्टिंग की विभाग की योजना

जल संसाधन विभाग ने पिछले दिनों बाढ़ नियंत्रण पर्षद की बैठक में 234 करोड़ की योजना मंजूर की गई थी। तीन बड़ी योजनाओं में गंगा की डिसिल्टिंग भी शामिल है। दरअसल पटना के किनारे गंगा में तेजी से सिल्टेशन हो रहा है और इसकी मात्रा बढ़ती जा रही है। इससे गंगा की दूरी भी बढ़ती जा रही है।

 

17.5 किमी लंबी सुरक्षा दीवार बनी थी

पटना को बाढ़ से बचाने के लिए गंगा किनारे 17.5 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार बनी थी। जबकि पीएमसीएच के पास डेढ़ किलोमीटर में यह दीवार नहीं है। यहां प्रोटेक्शन पीच है।

 

दो दशक पहले पटना में ऐसे बहती थी गंगा

गंगा नदी दो दशक पहले से ही पटना को छोड़ने लगी थी। बाद में इसकी रफ्तार और बढ़ती गई। आज नदी राजधानी से तकरीबन चार किलोमीटर तक दूर हो गई है।

 

234.54 करोड़ की है योजना,15 जून 2020 तक पूरी होगी

पहला चरण : दीघा और कुर्जीघाट के बीच कालीघाट तक वाया एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट तक पायलट चैनल के रूप में नदी को किनारे लाना है। यह दूरी लगभग छह किलोमीटर की है। इसे कुर्जीघाट से एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट और फिर एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट से कालीघाट तक चैनल बनाकर नदी को पटना के किनारे पहुंचाना है।

दूसरा चरण : गांधी सेतु के निकट महावीर घाट से कंगनघाट के बीच सिल्ट हटाना है। यहां बड़ा आईलैंड बन गया है। इसके कारण यहां डेल्टा जैसा नजारा बन गया है। आईलैंड का विस्तार पटना की ओर अधिक हो गया है। और विस्तार हुआ तो नदी यहां भी शहर से दूर चली जाएगी। ऐसे में यहां सिल्ट निकाला जाना है।

 

यह मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है। उन्होंने छठ के समय ही गंगा को पटना के करीब लाने के लिए कार्ययोजना बनाने और उसपर काम करने को कहा था। हमने इस प्रोजेक्ट पर गंभीरता से काम किया है। पूरी योजना तैयार है। इसपर शीघ्र ही काम शुरू होगा और हम अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल रहेंगे।’ -संजय कुमार झा, जल संसाधन मंत्री

 

पायलट चैनल से गंगा की धारा को पटना के करीब लाया जा सकता है। यह संभव है। लेकिन इसे कई वर्षों तक करना होगा। एक साल चैनल बना देने के बाद अगले साल फिर देखना होगा। वहां सिल्टेशन संभव है। हर साल नजर नहीं रखी गई तो योजना फेल हो सकती है। -दिनेश मिश्रा, नदी विशेषज्ञ

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