पटना का अहान प्रकाश राष्ट्रीय फुटबॉल में नया सितारा बन उभरा

3 वर्ष पहले
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दक्षिण अफ्रीका में 25 मार्च से शुरू हो रहे अंडर-16 फुटबॉल टूर्नामेंट में भारतीय अंडर 16 टीम के साथ पटना के अहान प्रकाश 23 मार्च को दक्षिण अफ्रीका दौरे पर रवाना होंगे। अहान अभी ओड़िशा (भुवनेश्वर ) में प्रशिक्षक शुभेंदु पांडा की देखरेख भारतीय खेल प्राधिकरण के कैंप में टीम के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं। अहान ने कहा, प्रतिदिन दो से तीन अभ्यास मैच खेलना पड़ता है। प्रशिक्षण के दौरान हमारे प्रशिक्षक छोटी-छोटी गलती को प्रैक्टिकल कर समझाते हैं। इससे सभी खिलाड़ियों का खेल दिन-प्रतिदिन निखर रहा है। पटना के बोरिंग रोड निवासी चैतन्य प्रकाश और तुहीना आनंद के 14 वर्षीय पुत्र अहान प्रकाश ने वर्तमान समय की पहली पसंद क्रिकेट को छोड़ फुटबॉल को चुना है। डीपीएस ईस्ट (बेंगलुरू) में नौवीं के छात्र अहान प्रकाश ने अपनी छह फुट ऊंचाई को देखते हुए गोलकीपर के पोजीशन से खेलना शुरू किया। इन्होने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इसके बाद उनका चयन संयुक्त अरब अमीरात जाने वाली भारतीय अंडर- 16 टीम के लिए किया गया था।

यूएई में चमकी किस्मत

अहान इस दौरे पर भारतीय टीम में दूसरे गोलकीपर की हैसियत से गए थे। वहां पर अहान की किस्मत ने मौका दिया। भारतीय टीम के पहले गोलकीपर को मैच के दौरान रेड कार्ड दिखाया गया। नतीजा यह हुआ कि अहान गोलकीपर के रूप में मैदान पर उतरे। अपने बेहतर प्रदर्शन की बदौलत अहान भारतीय टीम के नियमित गोलकीपर बन गए। पिछले दिनों वे अपने नाना किरण कुमार वर्मा (फिल्म निर्देशक) एवं दादा बीके प्रसाद से मिलने पटना अपने माता-पिता के साथ आए थे। पटना फुटबॉल संघ ने सम्मानित किया था।

क्रिकेटर बनता चाहता था

अहान ने दैनिक भास्कर के लिए कहा कि मैं भी क्रिकेटर बनना चाहता था। लेकिन बेंगलुरू में जहां माता- पिता के साथ जिस अपार्टमेंट में रहा हूं। वहां पर सभी फुटबॉल खेलते थे। मैं भी खेलने लगा। मैंने गोलकीपर बनने का फैसला किया। इसके बाद में बेंगलुरू फुटबॉल अंडर-13 लीग और यूथ लीग में खेलने लगा। मुझे बेंगलुरू फुटबॉल लीग में सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर का पुरस्कार मिला। खेलों से संबंध पर कहा कि मेरे परिवार में किसी का भी खेल से रिश्ता नहीं है। मैं अपने परिवार का पहला खिलाड़ी हूं।

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