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फर्जीवाड़ा / शिक्षक की नौकरी के लिए महिला पुरुष बन गई तो कई ने अपनी जाति और धर्म ही बदल लिया



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  • देश का कोई ऐसा हिस्सा नहीं बचा जहां से फर्जी सर्टिफिकेट बटोरने की कोशिश नहीं हुई

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2018, 05:22 AM IST

पटना. फर्जीवाड़े के मास्टर गुरु बन बैठे। पड़ताल और पहचान में गजब की चालबाजी सामने आ रही। देश का कोई ऐसा हिस्सा नहीं बचा जहां से फर्जी सर्टिफिकेट बटोरने की कोशिश नहीं हुई। यह खेल हुआ बिहार में शिक्षक बनने के लिए। फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियोजित शिक्षकों की तलाश में विजिलेंस 20 मई 2015 से जुटी है।

 

आदेश पटना हाईकोर्ट का था। लेकिन राह आसान नहीं है। 3 साल 3 महीने में भी जांच अधूरी है। 3,52,555 नियोजित शिक्षकों में से 94,954 के फोल्डर ही नहीं मिले अभी तक। फोल्डर नियोजन इकाइयों के पास होते हैं और इनमें शिक्षकों के प्रमाण-पत्र होते हैं। फोल्डरों का न मिलना ही गड़बड़ी का स्तर बताता है। फोल्डर न देने वाली नियोजन इकाइयों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू है।

 

विजिलेंस के सूत्रों की मानें तो मामले में इतने पेंच हैं कि तह तक पहुंचने में वक्त लगना लाजिमी है। जांच में जम्मू-कश्मीर से लेकर नागालैंड तक और कर्नाटक से लेकर दिल्ली तक के प्रमाण पत्र मिल रहे हैं। दस्तावेजों की पुष्टि के लिए विजिलेंस की टीम अलग-अलग राज्यों की खाक छान रही है।

 

  1. बीटेट-2011 शिक्षक बहाली फर्जीवाड़ा में निगरानी की टीम ने कई पर केस किया था। इनमें पटना जिला में बहाल हुए शिक्षक नहीं थे। ज्यादातर बेगूसराय, औरंगाबाद, छपरा व अन्य जिलों के थे। कई ऐसे भी थे जिन्होंने परीक्षा भवन का मुंह नहीं देखा पर रकम देकर नौकरी पा गए। वेतन भी मिलने लगा। जांच में पता चला कि बोर्ड ऑफिस के कर्मियों की मिलीभगत से गोलमाल हुआ है। बोर्ड ऑफिस ने कोतवाली थाना में केस दर्ज किया, मामला बेगूसराय में हुए फर्जीवाड़े का था। पुलिस ने 5 बोर्ड कर्मियों, एक दलाल, 4 शिक्षिका और एक शिक्षिका के पति को गिरफ्तार कर लिया।
  2. बोर्ड कर्मी (जिसके पास कंप्यूटर का पासवर्ड था) ने फेल कैंडीडेट को पास और उनका नाम भी पास रिजल्ट शीट में भर दिया जो परीक्षा में बैठे ही नहीं।
  3. रिकॉर्ड रूम में सीलबंद टेबुलेशन रजिस्टर का पेज फाड़ नया पेज जोड़ दिया। इस पेज में नए नाम जोड़े गए। नया पेज शातिर उस प्रिंटिंग प्रेस से मंगवाते थे जहां टेबुलेशन रजिस्टर प्रिंट होता था।
  4. जो फेल थे उन्हें पास कराने को 5 लाख रु. और जो परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए उनसे 8 लाख तक वसूली हुई।

 

तमन्ना खातून बनी मनीष, पिता शकील से राजेंद्र हो गए :  शिक्षक नियुक्ति में हुए खेल के खुलासे चौंकाते हैं। नौकरी के लिए महिला, पुरुष बन गई तो किसी ने धर्म ही बदल लिया। कम अंक वालों ने नौकरी के लिए फर्जी अंकपत्र बनवाए और मेरिट लिस्ट में शामिल हो गए। बिहार बोर्ड तो छोड़िए सीबीएसई तक के फर्जी अंकपत्र पर नौकरी मिल गई।

 

भागलपुर के प्राथमिक विद्यालय राइनटोला, विक्रमपुर, बिहपुर में कार्यरत तमन्ना खातून की जांच की गई तो सर्टिफिकेट में नाम मनीष कुमार और पिता का नाम शकील अहमद की जगह राजेंद्र शुक्ला मिला। प्राथमिक विद्यालय दासटोला, विक्रमपुर, बिहपुर में फरीदा खानम के अंकपत्र में नाम, मो. जावेद आलम लिखा है, पिता शमशाद खां की जगह मो. मासूक है। जाति सामान्य की जगह ईबीसी दर्ज है। दिलचस्प यह भी है कि शिक्षा विभाग भी मानता है कि बहाल किए गए शिक्षकों में से 10 से 15 फीसदी तो नाकाबिल ही हैं।

 

कारनामा बोर्ड कर्मियों की मिलीभगत : 3,52,555 नियोजित शिक्षकों में से 94,954 के फोल्डर ही नहीं मिले अभी तक

 

 

            उ.म.वि.               म.वि      प्राथमिक      लाइब्रेरियन
     संख्या       11,787      27,897      3,10,789       2082

  प्राप्त फोल्डर    

11,734      27,420     2,16,376    2,062 
अप्राप्त फोल्डर      44   477      94413 20
मिले प्रमाणपत्र     65,276   12,2678   383529      8327
जंचे प्रमाणपत्र         59,286       97544       183896      7083
       पेंडिंग        5990            25134       199633      1244
       फर्जी           121        66    721      14
    एफआईआर      52       37    236       07
  संलिप्त लोग      129    55   718  14

 

 

ऐसे हुआ बिहार में शिक्षक नियोजन 

 

 

 

 

  • 2005 में नीतीश सीएम बने। 1.87 लाख प्राइमरी टीचर के पद खाली थे। आसान नियुक्ति प्रक्रिया की बात शुरू हुई।
  • 2006 में पंचायत शिक्षक नियमावली अधिसूचित। 1-5 के शिक्षक बहाली का हक पंचायत व 6-8 प्रखंडों को मिला। सिर्फ डिग्री देखकर भर्ती की गई।
  • 2005 में शिक्षामित्रों का प्रदर्शन हुआ। सरकार ने सभी को पंचायत शिक्षक बनाया। ये 2003 में भर्ती हुए थे। 2009 तक 1.5 लाख अनट्रेंड शिक्षक बहाल।
  • 2006 में शिक्षकों को ट्रेंड कराने के निर्देश जारी।
  • 2009 में आरटीई लागू। शिक्षकों की नियुक्ति में टेट अनिवार्य हो गया।
  • 2011 में टेट पास की नियुक्ति 2013 में शुरू। प्रक्रिया 2015 तक चली। 2017 में टेट हुआ, अभी नियुक्ति बाकी है।
     
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