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दान-पुण्य के लिए सरयू नदी तट पर पहुंचें जरूर लेकिन स्नान करने में बरतें सावधानी

Patna News - मकर संक्राति को लेकर बाजारों में चहल-पहल शुरू हो गई है। बाजार में सोंधी तिल की महक से लोग सराबोर हो रहे हैं। 15 जनवरी...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 05:41 AM IST
Siwan News - please visit the saryu river bank for charity but be careful not to take bath in the bath
मकर संक्राति को लेकर बाजारों में चहल-पहल शुरू हो गई है। बाजार में सोंधी तिल की महक से लोग सराबोर हो रहे हैं। 15 जनवरी यानी मंगलवार को मकर संक्राति का पर्व है। पर्व में महज एक दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में बाजार में तिलकुट बनाने का काम तेज कर दिया गया है। इस व्यवसाय से जुड़े दुकानदार तिल सामग्री के निर्माण में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। सुबह से देर रात तक तिलकुट बनाए जा रहे हैं। बाजार में गया से आये कारीगर स्वादिष्ट व सोंधी तिलकुट बनाने में जुटे हैं। बाजार में 220 रुपए से 500 रुपये किलो तक तिलकुट है। खोवा से निर्मित तिलकुट आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

तिलकुट की सोंधी महक से धमक रहा बाजार, गया और अन्य जगहों कारीगर पहुंचे सीवान, खोवे के तिलकुट की हो रही मांग, 220 से 500 रुपये किलो बिक रही तिल की सामग्री

मंगलवार को सरयू नदी तट पर उमड़ेंगे श्रद्धालु

सीवान | मकर संक्रांति मंगलवार को है। इस दिन स्नान व दान का बड़ा ही महत्व होता है। इस वर्ष साल की शुरुआत मंगलवार से हुई है। समापन भी मंगलवार को होगा। खास बात यह भी है कि इस साल अलग-अलग महीनों में 10 बड़े त्योहार मंगलवार को ही पड़ेंगे। इसकी शुरुआत मकर संक्रांति से हो रही है। पंडितों का मानना है कि सर्वार्थ सिद्धि योग और मंगलवार का महासंयोग होने से मकर संक्रांति महाशुभदायी होगी। ज्योतिषाचार्य रंजन उपाध्याय ने बताया कि मंगलवार को भगवान शिव व महावीर की आराधना की जाती है। इसी वजह से इस दिन को शुभ माना गया है। धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिये से भी मकर संक्रांति का बड़ा ही महत्व है।

किसी घाट पर नहीं है सुरक्षा के इंतजाम

मकर संक्रांति के अवसर पर जिले के रघुनाथपुर, दरौली, सिसवन सहित 20 से अधिक जगहों पर लोग पवित्र सरयू नदी में स्नान करेंगे तथा दान पुण्य करेंगे। इसकी तैयारी लोगों द्वारा की गई है। मकर संक्रांति के दिन लगनेवाली भीड़ को लेकर प्रशासन के द्वारा कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है। इससे लोगों के अंदर स्नान करने के लिए संशय बना हुआ है। लोग अपने-अपने स्तर से घाटों की साफ-सफाई करने में लगे हुए हैं।

मकर संक्रांति पर तिल का महत्व

एक पौराणिक कथा के अनुसार शनि देव को उनके पिता सूर्य देव पसंद नहीं करते थे। इसी कारण सूर्य देव ने शनि देव व उनकी मां छाया को अपने से अलग कर दिया। इस बात से क्रोध में आकर शनि और उनकी मां ने सूर्य देव को कुष्ठ रोग का श्राप दे डाला। पिता को कुष्ठ रोग में पीड़ित देख यमराज (जो कि सूर्य भगवान की दूसरी प|ी संज्ञा के पुत्र हैं) ने तपस्या की। यमराज की तपस्या से सूर्यदेव कुष्ठ रोग से मुक्त हो गए। लेकिन सूर्य देव ने क्रोध में आकर शनि देव और उनकी माता के घर ‘कुंभ’ (शनि देव की राशि) को जला दिया। इससे दोनों को बहुत कष्ट हुआ। यमराज ने अपनी सौतेली माता और भाई शनि को कष्ट में देख उनके कल्याण के लिए पिता सूर्य को मनाया। पुत्र की बात मान सूर्य देव शनि से मिलने उनके घर पहुंचे।

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