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हास्य की पिचकारी से राजनीति को किया सराबोर, लगे ठहाके

एक वर्ष पहले
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अब की राजनीति में हमारी भाषा, मुहावरा, गालियां सब बदल गए हैं। मुहावरे में पहले लोग मजबूरी का नाम महात्मा गांधी कहा करते थे। जबकि, अब वही लोग कहते हैं, मजबूरी का नाम राहुल गांधी। इंदौर के चेतन चर्चित के इस हास्य-व्यंग्य पर एसके मेमोरियल का हॉल ठहाकों से गूंज उठता है। मौका था बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन की पटना नगर शाखा की ओर से रविवार को आयोजित ‘अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन’ का। इसमें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ख्याति-प्राप्त कुल छह कवि-कवयित्री ने लोगों का खूब मनोरंजन किया। कोई राजनीतिक व्यंग्य से लोगों को हंसाते-हंसाते लोट-पोट कर रहा था, तो कोई अपनी हाइट को लेकर मजाकिए अंदाज में खुद पर ही तंज कस रहा था। कुछ इसी प्रकार से हंसने-हंसाने का दौर ऑडियंस से खचा-खच भरे एसके मेमोरियल हॉल में देर रात तक चलते रहा। चेतन ने अपनी साढ़े चार फीट की हाइट को लेकर कहा, बॉस! जिंदगी में लंबाई होना जरूरी नहीं, गहराई होना जरूरी है। एक वाक्या सुनाते हुए उन्होंने कहा कि एक हट्‌टा-कट्‌टा नौजवान भीख मांग रहा था। इसपर उन्होंने उससे पूछा कि ऐसा शरीर होते हुए भी तुम भीख क्यों मांग रहे हो? वह नौजवान बोला- मैं भारतीय नहीं, पाकिस्तानी हूं। इसपर चेतन बोले- फिर यहां क्या कर रहे हो, जाकर पाकिस्तान में भीख मांगो। वह बोला- पाकिस्तान में तो सब भीख मांगते हैं। इसपर लोगों की दोगुनी ताली बजी। इससे पहले कार्यक्रम का उद्घाटन भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी, उद्योग मंत्री श्याम रजक, शाखाध्यक्ष अंजनी सुरेका, शाखा मंत्री सुनील मोर, कार्यक्रम संयोजक राकेश कुमार अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अंजनी ने कहा कि विश्व महिला दिवस पर आयोजित यह हास्य कवि-सम्मेलन नारी-शक्ति को समर्पित है। सुनील मोर ने कहा कि कवि सम्मेलन हमारी साहित्यिक प्रस्तुति है। कोषाध्यक्ष दिलीप मित्तल, निवर्त्तमान शाखा मंत्री रंदीप झुनझुनवाला, कमल नोपानी, राम लाल खेतान, निर्मल कुमार, बिनोद तोदी, शशि गोयल आदि मौके पर मौजूद रहे।

कब समझेंगे... देश बचा तो मजहब भी रहेगा जिंदा

अलवर के विनीत चौहान ने देश-भक्ति कविता की। उन्होंने सुनाया- गिनती पूरी कौन करेगा, इस पागल शिशुपालों की। कौन शीशा कटेगा फिर से शकुनी वाली चालों की। कब समझेंगे कि देश बचा तो मजहब भी जिंदा रहेगा। इसपर लोगों ने खूब वाह-वाह की। मंच संचालन कर रहे दिल्ली के चिराग जैन ने अपने व्यंग्य से राजनीतिक पर बड़ा ही करारा प्रहार किया। उन्होंने सुनाया- जो चांद करवा चौथ का अर्घ लेता है, वही ईद की इत्तिला भी देता है क्योंकि चांद को वोट नहीं चाहिए। कवि-सम्मेलन शुरू होने से पहले लखनऊ के गजेंद्र प्रियांशु ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी।

फागुन का महीना है, दंगों की नहीं, उमंगों की हो बात


अब ना हो पत्थरों की बात। बात हो पतंगों की। फागुन का महीना है, उमंगों की बात हो। लड़ने से कुछ नहीं मिला है, न मिलेगा। दंगों की नहीं अब यहां रंगों की बात हो। बिहार पुत्र शंभू शिखर ने अपनी इस कविता से लोगों की खूब तालियां बटोरीं। वहीं, आगरा के प्रख्यात हास्य सम्राट प्रताप फौजदार ने अपने चुटकूले, काव्य-पाठ एवं चेहरे के हाव-भाव से लोगों को खूब हंसाया। साथ ही वे बातों-बातों में ही समाज को कई संदेश दे गए। नैनीताल की गौरी मिश्रा ने अपनी कविता से लोगों के मूड को होलियाना बना दिया।


शब्द-शब्द से हंसी के फव्वारे, लोग हुए लोटपोट

एस के मेमाेरियल हाॅल में बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन की अाेर से हास्य कवि सम्मेलन में चेतन चर्चित और चिराग जैन अपनी कविताएं सुनाते हुए।
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