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नीतीश पर निशाना / जदयू से निकाले जाने के 20 दिन बाद प्रशांत किशोर का नीतीश पर तंज- बिहार को सशक्त नेता चाहिए, पिछलग्गू नहीं

पटना में मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर। पटना में मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर।
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पटना में मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर।पटना में मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर।

  • सीएए को लेकर नीतीश सरकार पर निशाना साधने के बाद प्रशांत किशोर 29 जनवरी को पार्टी से निकाले गए थे
  • जदयू के पूर्व उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने कहा- युवाओं को जोड़ने के लिए "बात बिहार की" कार्यक्रम शुरू करूंगा
  • प्रशांत किशोर ने कहा- नीतीश पिता समान, उनके सारे फैसले मंजूर पर उनसे मेरा वैचारिक मतभेद

दैनिक भास्कर

Feb 18, 2020, 04:35 PM IST

पटना. जदयू से 29 जनवरी को निकाले जाने के बाद चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पहली बार मंगलवार को पटना पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर खुलकर निशाना साधा। उन्होंने कहा- नीतीश से वैचारिक मतभेद हैं। हालांकि, प्रशांत ने यह भी कहा कि बिहार को सशक्त नेता की जरूरत है, पिछलग्गू की नहीं। उन्होंने बताया कि वे 20 फरवरी से 'बात बिहार की' कार्यक्रम शुरू करेंगे। वे इसके जरिए ऐसे युवा लोगों को जोड़ेंगे, जो बिहार को आगे ले जाएं।

प्रशांत किशोर ने कहा, "नीतीश ने बेटे की तरह रखा और मैं भी उन्हें पिता समान मानता हूं। पार्टी से निकालने का नीतीश का फैसला मंजूर हैं। उनके साथ मतभेद विचारधारा को लेकर हैं।"

किस मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने क्या कहा?
नीतीश से मतभेद: प्रशांत किशोर ने मतभेद की पहली वजह बताई- नीतीशजी कहते रहे हैं कि वे गांधी, जेपी और लोहिया की बातें नहीं छोड़ सकते। क्या ऐसे में वे गोडसे की विचारधारा वालों के साथ खड़े हो सकते हैं? भाजपा के साथ खड़े होना ठीक है, लेकिन गांधी और गोडसे की विचारधारा एक साथ नहीं चल सकती।

दूसरी वजह बताई कि बिहार में जदयू की स्थिति को लेकर मतभेद हुए। भाजपा और जदयू का 15 साल से संबंध है। हम ऐसा नेता चाहते हैं, जो किसी का पिछलग्गू न हो। वह स्वतंत्र विचार रखे। कुछ लोग कहते हैं कि बिहार के विकास के लिए मूल बातों पर समझौता करना पड़े तो कोई गुरेज नहीं होना चाहिए। लेकिन, आपको देखना चाहिए कि क्या इस गठबंधन से बिहार का विकास हो रहा है।

नीतीश vs लालू सरकार: प्रशांत किशोर ने कहा- नीतीशजी की पार्टी कहती है कि कभी बिहार में कुछ नहीं था, इसलिए हमने जो किया वह सही किया। लालूजी के समय से मुकाबला तो ठीक है, लेकिन आप दूसरे राज्यों के मुकाबले कहां खड़े हैं, यह भी बताएं। कभी सूरत से भी तो कोई व्यक्ति बिहार काम करने आए। यह तब होगा, जब गांव और पंचायत स्तर से नेता आएं और 10 साल में बिहार को आगे देखना चाहें। अगर मुंबई पूरी रात खुली रह सकती है तो पटना क्यों नहीं?

चुनाव लड़ने पर: उन्होंने कहा कि बिहार छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा। चुनाव लड़ाना-जिताना मैं रोज करता हूं। बात बिहार की कार्यक्रम शुरू करूंगा। इसके तहत 8 हजार से ज्यादा गांवों से लोगों को चुना जाएगा, जो अगले 10 साल में बिहार को अग्रणी 10 राज्यों में शुमार करना चाहते हों। बिहार को वो चलाएगा, जिसके पास सपना हो। नीतीश कुमार इसमें शामिल होना चाहें, तो उनका स्वागत है।

आर्थिक विकास: प्रशांत किशोर ने बिहार के आर्थिक विकास पर कहा- 10-15 साल आपने आर्थिक तरक्की की, लेकिन यह वैसा ही है, जैसे कभी आपकी सैलरी 5000 थी, जो आज 20,000 हो गई है। बिहार प्रति व्यक्ति आय के मामले में 2005 में 22वें स्थान पर था और आज भी वहीं है।

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