प्रस्ताव / सायक्लोपियन वाॅल को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने की कवायद



process of incorporating Cyclopean Wall into World Heritage
X
process of incorporating Cyclopean Wall into World Heritage

  • सीएम नीतीश कुमार ने इसके लिए अधिकारियों को पहल करने के निर्देश दिए थे
  • सायक्लोपियन वाॅल 3 से 2 ईसा पूर्व के समकालीन यानि मौर्यकालीन इतिहास का गवाह रहा

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2019, 05:52 AM IST

राजगीर. देर से ही सही राजगीर स्थित सायक्लोपियन वाॅल को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल कराने के लिए सुगबुगाहट होती दिख रही है। खुद सीएम नीतीश कुमार ने इसके लिए अधिकारियों को पहल करने के निर्देश दिये थे। यदि यह वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल हो गया तो महाबोधि मंदिर (2002) और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय (2016) के बाद यह बिहार का तीसरा हेरिटेज होगा जिसे वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा मिलेगा।

 

जल्द ही एएसआई की टीम इसका जायजा लेने आएगी। पुरातत्व विभाग के सहायक संरक्षण पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार पाठक ने कहा कि वनगंगा के समीप स्थित सायक्लोपियन वाल का काफी ऐतिहासिक महत्व है। जल्द ही विभाग के अधिकारियों की एक विशेष टीम वाल का जायजा लेने पहुंचेगी। साइट का जायजा लेने के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

 

वर्ल्ड हेरिटेज मे शामिल कराने के लिए प्रस्ताव भेजने के पहले काफी लंबा प्रोसेस पूरा करना होता है। साइट निरीक्षण के बाद ही इसकी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। महाबोधि मंदिर (2002) और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय (2016) के बाद यह बिहार का तीसरा हेरिटेज होगा सायक्लोपियन वाल।


आएगी एएसआई की टीम, भेजेंगे प्रस्ताव 
नवादा व राजगीर की सीमा से सटे राजगीर प्रवेश द्वार के समीप वन गंगा के दोनों ओर के पर्वतों पर काफी लंबी पत्थर की दीवार है। मगध साम्राज्य काल में यह सुरक्षा का कम करता था। लगभग 2600 वर्ष पूर्व राजगीर मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी। सायक्लोपियन वाल 3 से 2 ई० पू० के समकालीन यानि मौर्यकालीन इतिहास का गवाह रहा है।

 

सायक्लोपियन वाल पंचपहाड़ियों को करीब 45 से 50 किलोमीटर व्यास तक समेटे हुए है। जिसके बारे में कहा जाता है कि इस दीवार से प्राचीन राजगीर नगरी सुरक्षा कवच के दायरे मे घिरा हुआ था। बेडौल विशाल शिलाखंडों को सुरखी , चुना, रावा, छोवा इत्यादि के संसाधनों के माध्यम से बड़ी खुबसुरती के साथ उक्त पर्वतों पर सजाकर निर्माण किया गया था। पाली ग्रंथों मे इस दीवार से राजगीर शहर की चाक चौबंद सुरक्षा के बारे में कई बातों का उल्लेख मिलता है। 


कभी थे 32 बड़े और 64 छोटे प्रवेश द्वार

चारों ओर खड़ी दीवार में 32 विशाल तथा 64 छोटे प्रवेश द्वार हुआ करते थे। जिसके माध्यम से ही शहर में प्रवेश किया जा सकता था। वहीं इस दीवार के हर 50 मीटर की दूरी पर एक विशेष सुरक्षा चौकी तथा हर 5 गज पर सशस्त्र सैनिक व उनका झुंड प्रहरी के रुप मे तैनात रहा करता था । दूर से ही दुशमनाें पर हमला बोल दिया जाता था।

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना