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तफ्तीश / प्राेपर्टी डीलर ने कराई वकील की हत्या, पत्नी और साले पर साजिश का शक



करगिल चौक पर गुरुवार को साथी वकील की हत्या के विरोध में प्रदर्शन करते अधिवक्ता। करगिल चौक पर गुरुवार को साथी वकील की हत्या के विरोध में प्रदर्शन करते अधिवक्ता।
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करगिल चौक पर गुरुवार को साथी वकील की हत्या के विरोध में प्रदर्शन करते अधिवक्ता।करगिल चौक पर गुरुवार को साथी वकील की हत्या के विरोध में प्रदर्शन करते अधिवक्ता।

  • चार आरोपी भेजे गए जेल, पटना के दो शूटरों की तलाश में छापेमारी
  • खगौल की एक बीघा जमीन के लिए ले ली जान

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 06:21 AM IST

पटना. पटना हाईकोर्ट के वकील जितेंद्र कुमार की खगौल में एक बीघा जमीन है। इसकी कीमत आज करोड़ों में है। पुलिस के मुताबिक इसके लिए ही उनकी हत्या की गई। एसआईटी के सूत्रों का कहना है कि 55 साल के वकील की हत्या मेें प्रोपर्टी डीलर व दमड़िया, गर्दनीबाग निवासी ताजुद्दीन के शामिल होने की बात सामने आ रही है। वकील की पत्नी नीतू और उनके साले पनसुजीत पर भी साजिश रचने का शक है। नीतू और पनसुजीत भी नामजद हैं। मोती चौक, खगौल के मूल निवासी जितेंद्र की हत्या कांट्रैक्ट किलरों ने की। इसके लिए पटना के दोनों शूटरों को खासी रकम दी गई। पुलिस उनकी तलाश क रही है। इधर, पुलिस ने इस मामले में पत्नी नीतू, खगौल नगर परिषद के वार्ड पार्षद रितेश कुमार और उसके दो भाइयों राकेश व रूपेश को पूछताछ के बाद गुरुवार को जेल भेज दिया। इन चारों को पुलिस ने बुधवार को ही पकड़ा था।

 

पत्नी, बेटी, मां और भाई नहीं पहुंचे दाह-संस्कार में  
नीतू और उनकी बेटी रुचि वकील के दाह संस्कार में शामिल नहीं हुईं। वकील की मां और छोटे भाई संतोष भी नहीं पहुंचे। वकील का पार्थिव शरीर खगौल स्थित घर ले जाया गया था। अनहोनी की आशंका को देखते हुए वहां कई थानों की पुलिस तैनात थी। पत्नी, बेटी, मां व भाई का एक दिन इंतजार करने के बाद वकील का गुरुवार की शाम  दानापुर में अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुखाग्नि उनके बड़े भाई राजकुमार ने दी। जितेंद्र पिछले सात साल से राजकुमार के साथ ही मजिस्ट्रेट कॉलोनी के गुरु सहाय लेन में रह रहे थे। पारिवारिक विवाद की वजह से पत्नी और बेटी मुजफ्फरपुर में रह रही थीं। नीतू का मायका मुजफ्फरपुर के यदुपतिनगर बनारस बैंक चौक के पास है। 

 

प्रोपर्टी डीलर तीन-चार दिन पहले गया है नेपाल 
एसआईटी की टीम प्रापर्टी डीलर ताजुद्दीन को गिरफ्तार करने के लिए उसके गर्दनीबाग स्थित घर पर गई, पर वह वहां नहीं था। पुलिस ताजुद्दीन के दो करीबी रिश्तेदारों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। परिजनों ने पुलिस को बताया कि ताजुद्दीन इन दिनों नेपाल में है। घटना से तीन-चार दिन पहले ही वह नेपाल गया है। पुलिस उसके मोबाइल के सीडीआर को खंगाल रही है। वकील के ससुराल वालों से प्रापर्टी डीलर की बातचीत होने की बात सामने आई है।
 

उस जमीन का दाखिल-खारिज वकील और प्रोपर्टी डीलर दोनों ने कराया था  
जो जमीन वकील की हत्या की वजह रही, उसका दो बार दाखिल खारिज हुआ है। जितेंद्र  का दावा था कि उसे यह जमीन पिता ने वसीयत में दी थी। इसी आधार पर उन्होंने 2015 में इसका दाखिल खारिज कराया। वहीं प्रापर्टी डीलर ताजुद्दीन का दावा है कि यह जमीन वकील के पिता ने 1988 में बेची थी। वह उस वक्त नाबालिग था। उसके नाम से इस जमीन की रजिस्ट्री है। उसने इसी रजिस्ट्री के आधार पर 2016 में जमीन का दाखिल खारिज कराया और जमीन का रसीद कटाते रहा।

 

साला और सास फरार हैं, ससुर इन दिनों कोलकाता में हैं
इस मामले में जेल गए चार नामजदों के अलावा नीतू की मां लक्ष्मी देवी, पिता रिटायर्ड फौजी श्रीकृष्णा सिंह, भाई पनसुजीत कुमार, वार्ड पार्षद रितेश की पत्नी सुप्रिया देवी के अलावा प्रापर्टी डीलर ताजुद्दीन भी आरोपी हैं। मुजफ्फरपुर में रहने वाला साला व सास फरार हैं, जबकि ससुर इन दिनों कोलकाता में हैं। पुलिस सभी आरोपियों व संदिग्धों के मोबाइल का सीडीआर और घटनास्थल के पास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

 

एक बिल्डर से ली थी चार लाख टोकन मनी, फिर वापस कर दी

वकील ने इस जमीन पर दानापुर गोला रोड के एक बिल्डर से सवा चार लाख रुपए लिया था। वकील के परिवार का कहना है कि इसका कोई एग्रीमेंट पेपर नहीं बना था, बल्कि उस बिल्डर ने उन्हें सवा 4 लाख रकम टोकन मनी देते हुए यह कहा था कि काम बाद में होगा। रकम देने के कुछ माह बाद वकील ने उस बिल्डर को रकम वापस कर दिया। बिल्डर को जब पता चला कि जमीन विवादित है तो उसने रकम वापस ले ली। चर्चा यह भी है कि वकील ने रकम बिल्डर को लौटा दिया। वह दूसरे बिल्डर को जमीन देने की कोशिश में थे।

 

प्रोपर्टी डीलर को मिल चुके हैं 75 लाख रुपए 
ताजुद्दीन से खगौल निवासी एक जमीन कारोबारी  ने 21 लाख रुपए प्रति कट्ठा की दर से जमीन का एग्रीमेंट कराया था।  वह ताजुद्दीन और राजाबाजार में रहने वाले उसके पार्टनर को अबतक 75 लाख रुपए दे चुका है। कहा जा रहा है कि खगौल के उस कारोबारी ने जमीन की प्लाॅटिंग कराने के बाद बेचने के नाम पर कइयों से करोड़ों रुपए लेकर  एग्रीमेंट भी करा लिया है। एग्रीमेंट कराने वालों में कई वर्दीधारी व रसूखदार लोग हैं।

 

छोटे भाई ने वसीयत को बताया था गलत   
वकील जितेंद्र कुमार जहां इस जमीन को वसीयत में देने की बात का दावा कर रहे थे, वहीं उनके छोटे भाई संतोष ने इसे गलत बताया था। संतोष ने भी उस जमीन में अपनी हिस्सेदारी का दावा करते हुए कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। इसे लेकर दोनों भाइयाें के बीच विवाद भी हुआ था। 
 

वकील ने प्राेपर्टी डीलर को भेजा था नोटिस   
ताजुद्दीन के नाम पर कथित तौर पर जितेंद्र द्वारा कोलकाता में रजिस्टर्ड कराया गया पावर ऑफ अटॉर्नी का भी कागजात था। जिस पर जितेंद्र के साले पनसुजीत उर्फ मिथुन का हस्ताक्षर गवाह के रूप में दर्ज था।  इसकी जानकारी होने पर जितेंद्र ने पावर ऑफ  अटर्नी  को फर्जी बताते हुए ताजुद्दीन को नोटिस भी भेजा था।
 

वकील की हत्या जमीन विवाद में हुई है। इसमें प्रापर्टी डीलर व ससुराल वालों के हाथ शामिल होने की बात सामने आई है। उस जमीन की कीमत करोड़ों में है। पुलिस ने पत्नी समेत चार को जेल भेज दिया। अन्य नामजदों को दबोचने के लिए एसआईटी छापेमारी करने में जुटी है। -राजेश कुमार, डीएसपी, सेंट्रल रेंज

 

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