लोकसभा सीट पूर्णिया/ / इमरजेंसी से पहले इस सीट पर था कांग्रेस का दबदबा, मोदी लहर के बीच जदयू ने मारी थी बाजी



Purnia Loksabha Seat Main Fight between NDA and Mahagathbandhan Candidate
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Purnia Loksabha Seat Main Fight between NDA and Mahagathbandhan Candidate

  • इस सीट पर एनडीए और महागठबंधन के बीच मुख्य मुकाबला
  • सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड फनी गोपाल सेन गुप्ता के नाम, 4 बार चुने गए
  • 2014 में चुनाव हारने वाले भाजपा प्रत्याशी उदय सिंह इस बार कांग्रेस से लड़ रहे चुनाव

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 06:30 PM IST

पूर्णिया. 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बीच जदयू ने बिहार में दो सीटों पर बाजी मारी थी। पूर्णिया उसमें से एक है। महागठबंधन में हुए सीट शेयरिंग के बाद पूर्णिया लोकसभा सीट कांग्रेस के खाते में आई है। मोदी लहर में चुनाव हारने वाले भाजपा प्रत्याशी उदय सिंह इस बार कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं।

 

उदय सिंह भाजपा के टिकट पर दो बार सांसद रह चुके हैं। 2004 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार पप्पू यादव और 2009 में निर्दलीय प्रत्याशी शांति प्रिया को हराया था। एनडीए ने यहां से जदयू उम्मीदवार संतोष कुशवाहा को दोबारा टिकट दिया। 1998 में जय कृष्ण मंडल ने इस सीट पर भाजपा का खाता खुलवाया था। वे पप्पू यादव को हराकर लोकसभा पहुंचे थे। पूर्णिया पूर्वोत्तर बिहार का सबसे बड़ा शहर है जहां से नेपाल और पूर्वोत्तर की ओर जाने का रास्ता गुजरता है। वर्तमान में पूर्णिया प्रमंडलीय मुख्यालय है, जिसके अंतर्गत अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज जिले आते हैं।

 

इमरजेंसी से पहले था कांग्रेस का दबदबा
1975 में लगे आपातकाल से पहले पूर्णिया में कांग्रेस का दबदबा था। इमरजेंसी से पहले हुए पांचों चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। 1952, 1957, 1962 और 1967 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के फनी गोपाल सेन गुप्ता जीते। 1971 में मोहम्मद तारिक कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा पहुंचे।

 

1984 के बाद नहीं जीत सकी है कांग्रेस
1977 में हुए लोकसभा चुनाव में जेपी लहर के बीच यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई। भारतीय लोक दल के टिकट पर चुनाव लड़ रहे लखनलाल कपूर ने कांग्रेस की माधुरी सिंह को हरा दिया। 1980 में दोबारा इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा हो गया। 1980 और 1984 में माधुरी सिंह इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर सांसद बनीं। इसके बाद इस सीट पर हुए 8 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस एक बार भी नहीं जीत सकी है।

 

1991 में आयोग ने रद्द कर दिया था चुनाव
आजादी के बाद से अब तक पूर्णिया लोकसभा सीट से 17 सांसद चुने गए लेकिन एक दौर ऐसा था, जब चार साल न केवल पूर्णिया सांसद विहीन रहा, बल्कि संसद में इस क्षेत्र का कोई प्रतिनिधि नहीं था। बूथ लूटने की शिकायत के बाद आयोग ने 1991 में हुए 10वीं लोकसभा चुनाव को रद्द कर दिया था।

 

बाद में आयोग के इस फैसले को दिल्ली हाइकोर्ट में चुनौती दी गई। करीब चार साल तक लंबी लड़ाई के बाद हाइकोर्ट ने लोकसभा सीट पर पुनर्मतदान का आदेश दिया। 1995 में री-इलेक्शन में एक साल से भी कम समय के लिए राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सांसद बने।

 

सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड गोपाल सेन गुप्ता के नाम, 4 बार चुने गए
पूर्णिया से सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड फनी गोपाल सेन गुप्ता के नाम है। वे यहां से 4 बार चुनाव जीते। गोपाल सेन इस सीट से 1952, 1957, 1962 और 1967 में सांसद बने। मधेपुरा से जन अधिकार पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे पप्पू यादव इस सीट से तीन बार सांसद रह चुके हैं। 1991 में चुनाव रद्द होने के बाद 1995 में हुए उप चुनाव में पप्पू यादव यहां से निर्दलीय सांसद बने। इसके बाद 1996 में एसपी के टिकट पर और 1999 में निर्दलीय चुने गए।

 

राष्ट्रवाद के मुद्दे पर पार्टियां एक दूसरे के सामने
पूर्णिया में रोजगार और विकास का मुद्दा हवा-हवाई हो गया। यहां पार्टियां राष्ट्रवाद के मुद्दे पर एक दूसरे के सामने है। लोगों का कहना है कि यहां शिक्षा के क्षेत्र में तो काम हुए हैं, लेकिन रोजगार के लिए पलायन के अलावा कोई विकल्प नहीं। कई प्रखंडों में लोग पानी, बिजली और सड़क जैसे मूलभूत सुविधाओं से भी महरूम हैं।

 

लोकसभा का चुनावी गणित
मुस्लिम बहुल पूर्णिया लोकसभा सीट पर यादव और सवर्ण वोटरों का भी दबादबा है। इसके अलावा कुशवाहा और मुसहर भी गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। पूर्णिया संसदीय क्षेत्र में वोटरों की कुल संख्या 13,05,396 है। इनमें 6,88,182 पुरुष और 6,14,214 महिला वोटर्स हैं।

 

पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें कस्बा, बनमखनी, रुपौली, धमदाहा, पूर्णिया और कोरहा विधानसभा सीटें शामिल हैं। 2015 विधानसभा चुनाव में 2 सीटें बीजेपी, 2 सीटें जेडीयू और 2 सीटें कांग्रेस के खाते में गई थीं।

 

पूर्णिया सीट एक नजर-

 

साल जीते हारे
1952 फनी गोपाल सेन गुप्ता(कांग्रेस) दुर्गा प्रसाद(निर्दलीय)
1957 फनी गोपाल सेन गुप्ता(कांग्रेस) बालकृष्ण गुप्ता(निर्दलीय)
1962 फनी गोपाल सेन गुप्ता(कांग्रेस) बिशेश्वर नारायण शर्मा(स्वतंत्र)
1967 फनी गोपाल सेन गुप्ता(कांग्रेस) बी. गुप्ता(एसएसपी)
1971 मोहम्मद तारिक(कांग्रेस) जे.ए अहमद(सीपीआई)
1977 लखनलाल कपूर(भारतीय लोक दल) माधुरी सिंह(कांग्रेस)
1980 माधुरी सिंह(कांग्रेस) नियानंद आर्य(जनता पार्टी)
1984 माधुरी सिंह(कांग्रेस) कमलनाथ झा(लोक दल)
1989 तस्लीमुद्दीन(जनता दल) अजीत सरकार(सीपीएम)
1991 चुनाव रद्द  
1996 राजेश रंजन(एसपी) राजेंद्र प्रसाद गुप्ता(भाजपा)
1998 जय कृष्ण मंडल(भाजपा) राजेश रंजन(एसपी)
1999 राजेश रंजन(निर्दलीय) जय कृष्ण मंडल(भाजपा)
2004 उदय सिंह(भाजपा) राजेश रंजन(निर्दलीय)
2009 उदय सिंह(भाजपा) शांति प्रिया(निर्दलीय)
2014 संतोष कुशवाहा(जदयू) उदय सिंह(भाजपा)
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