3 साल में 20 करोड़ से की थी राजेंद्र पुल की मरम्मत, 3 साल में ही बेदम

Patna News - मोकामा के राजेंद्र पुल की तीन साल पहले ही बड़े पैमाने पर मरम्मत कराई गई थी। तीन साल बीतते-बीतते पुल का दम निकलने लगा...

Dec 04, 2019, 08:12 AM IST
Mokama News - rajendra bridge was repaired with 20 crores in 3 years breathless in 3 years
मोकामा के राजेंद्र पुल की तीन साल पहले ही बड़े पैमाने पर मरम्मत कराई गई थी। तीन साल बीतते-बीतते पुल का दम निकलने लगा है। तीन महीने पहले ही पुल पर भारी गाड़ियों का परिचालन रोका गया और अब रेलवे व एनएचएआई के अधिकारियों ने पुल को पूरी तरह बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। पुल की मरम्मत पर 20 करोड़ खर्च हुए थे। कोलकाता की कंपनी रावत संस को यह काम सौंपा गया था। मरम्मत कार्य में भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलने के बाद सीबीआई ने कंपनी के प्रतिनिधि और पूर्व मध्य रेल हाजीपुर के तत्कालीन डिप्टी चीफ इंजीनियर पुल निर्माण शैलेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार किया था। एकबार फिर इन आरोपों को बल मिलने लगा है, क्याेंकि जिस राजेंद्र पुल का मरम्मत कार्य 20 करोड़ की लागत से कराया गया था, उसे महज तीन साल के भीतर ही पूरी तरह से बंद करने की नौबत आ गई है।

तीन साल तक हुई मरम्मत : राजेंद्र पुल पर मरम्मत कार्य बड़े पैमाने पर चलाया गया था। 2013 में ही राजेंद्र पुल पर भारी गाड़ियों का परिचालन रोका गया था। 2014 से 2016 तक बड़े पैमाने पर काम कराया गया और उसके बाद कहा गया था कि अब पुल को किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। 28 क्रॉस गार्डर अाैर कई एक्सपेंशन ज्वाइंट भी बदले गए थे। इसके बावजूद यह पुल एक बार फिर जर्जर हालत में पहुंच गया है।

मरम्मत कार्य में भ्रष्टाचार का खेल हुआ था उजागर

राजेंद्र पुल की मरम्मत कार्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायतें भी मिली थी। दरअसल सीबीआई को यह शिकायत मिली थी कि राजेंद्र पुल के मरम्मत कार्य में ठेकेदार और अधिकारियों के बीच लेनदेन की बातें चल रही है और इसमें कुछ गड़बड़ियां हैं। इसके बाद सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधी शाखा ने पुल के निर्माण कार्य करा रही कंपनी के अधिकारियों तथा पुल मरम्मत कार्य से जुड़े रेलवे के अधिकारियों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी। इसके बाद तत्कालीन डिप्टी चीफ इंजीनियर को गिरफ्तार किया गया था। रेलवे अधिकारी के अलावा मरम्मत कार्य करा रही कंपनी के प्रतिनिधि की गिरफ्तारी हुई थी।

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पटना हाईकोर्ट तक गया था मामला

2014 में रेलवे ने राजेंद्र पुल का मरम्मत कार्य शुरू कराया था और कायदे से एक साल के अंदर इस मरम्मत कार्य को पूरा हो जाना था, लेकिन तय समय सीमा के अंदर पूर्ण का मरम्मत कार्य नहीं हो पाया था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट में चला गया था। गोपाल प्रसाद की जनहित याचिका पर तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति इकबाल अहमद अंसारी की खंडपीठ ने सुनवाई की थी अाैर मार्च 2016 तक हर हाल में मरम्मत कार्य पूरा कराने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के कड़े तेवरों के बाद ही रेलवे और एनएचएआई के अधिकारी सक्रिय हुए थे।

2009 में भी हुआ था मरम्मत कार्य, नतीजा रहा था सिफर

2014 से पहले 2009 में भी रेलवे ने राजेंद्र पुल का मरम्मत कार्य कराया था लेकिन उस वक्त भी नतीजा पूरी तरह से सिफर रहा था। कुछ दिन तक पुल की स्थिति ठीक रही। इसके बाद भारी गाड़ियों का परिचालन रोक दिया गया था। 2009 से लेकर 2013 तक पुल की स्थिति काफी दयनीय रही।

रेलवे की लापरवाही और असंवेदनशीलता

स्थानीय लोगों की मानें तो राजेंद्र पुल को लेकर रेलवे के अधिकारी संवेदनशील और लापरवाह रवैया अपनाते हैं। राजेंद्र पुल रेलवे की संपत्ति है। इसकी मरम्मत कराना रेलवे का दायित्व है। रेलवे की दिलचस्पी राजेंद्र पुल के सड़क मार्ग को चालू करने में कतई नहीं रहती है और रेलवे की दिलचस्पी सिर्फ रेल वाले हिस्से को चालू रखने की होती है। इधर, रेल अधिकारियों का कहना है कि पुल के स्ट्रक्चर की जिम्मेदारी रेलवे की है। स्ट्रक्चर पूरी तरह से ठीक है। सड़क भाग की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी एनएचएआई की है।

क्यों हुई ऐसी स्थिति

पुल का शिलान्यास 1955 में तत्कालीन राष्ट्रपति डाॅ. राजेंद्र प्रसाद और उद्घाटन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किया था। उस समय पुल के सड़क मार्ग का निर्माण तत्कालीन वाहनों के परिचालन को ध्यान में रखकर किया गया था। उस समय अधिकतम छह चक्के के ट्रक होते थे और सड़क का सर्फेस उसी के अनुसार बनाया गया था, लेकिन हाल के दिनों में पुल पर काफी बड़े वाहनों का परिचालन होने लगा और स्थिति जर्जर हो गई।

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