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पटना. भाजपा की तरफ से सीपी ठाकुर के बेटे विवेक ठाकुर राज्यसभा जाएंगे। केंद्रीय नेतृत्व ने बुधवार को उनकी उम्मीदवारी पर मुहर लगा दी। वे अपने पिता की जगह दिल्ली जाएंगे। डॉ. सीपी ठाकुर और आर.के. सिन्हा 9 अप्रैल को राज्यसभा से रिटायर होंगे। आर.के. सिन्हा भी टिकट के प्रबल दावेदार थे। पार्टी ने इनके अलावा कई और नामों पर विचार किया। प्रदेश कोर कमेटी ने प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल को नाम केन्द्रीय नेतृत्व को भेजने के लिए अधिकृत किया था। केन्द्रीय नेतृत्व ने प्रदेश नेतृत्व के भेजे नामों में से विवेक ठाकुर के नाम पर अपनी सहमति दी।
पार्टी ने सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर भूमिहार जाति को राज्यसभा का टिकट सौंपा है। पिछले लोकसभा चुनाव में ब्राह्मण और भूमिहारों में कम टिकट मिलने को लेकर नाराजगी थी। पार्टी आलाकमान ने इस नाराजगी को स्वीकर करते हुए अगली बार राज्यसभा चुनाव में इसकी भरपायी का आश्वासन दिया था। इसी आश्वासन के तहत लोकसभा चुनाव में बेटिकट किये गये सतीश चन्द्र दूबे को पिछली बार राज्यसभा भेजा गया था। इसके बाद अगला टिकट भूमिहार को मिलना तय माना जा रहा था। पार्टी ने इसी समीकरण के तहत विवेक ठाकुर को टिकट दिया है।
एनडीए को दो सीटों का नुकसान, जदयू-भाजपा की एक-एक सीटें होंगी कम
बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं। तीन जदयू की और दो भाजपा सदस्य 9 अप्रैल को रिटायर होंगे। हालांकि इनमें एनडीए को तीन सीटें ही वापस मिलेंगी। इसमें दो सीट जदयू को और एक भाजपा को मिलेगी। फायदा राजद को होगा। उसे दो अतिरिक्त सीटें मिलने जा रही हैं। राज्यसभा के उपसभापति व जदयू के हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर, कहकशां परवीन जबकि भाजपा के आर.के. सिन्हा और डॉ. सीपी ठाकुर का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
16 सीट है बिहार से
बिहार से राज्यसभा में 16 सीटे हैं। इनमें जदयू के छह, भाजपा के चार, राजद के तीन जबकि लोजपा और कांग्रेस के एक-एक सदस्य हैं। एक सीट खाली है। राज्यसभा की एक सीट के लिए 41 विधायकों के समर्थन की दरकार है और इस लिहाज से रिक्त होने वाली पांच सीटों में दो-दो जदयू व राजद को जबकि एक सीट पर भाजपा की जीत तय है।
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