मात्र 6 कमरों में चल रहा है फतुहा के बलवा का राम स्वारथ सिंह उच्चस्तरीय विद्यालय
ग्रामीण स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने तथा सुविधा बढ़ाने का सरकार लाख दावा करती है, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी ग्रामीण स्तर पर शिक्षा की व्यवस्था बदहाल है। इसका उदाहरण बलवा गांव में का राम स्वारथ सिंह उच्चस्तरीय विद्यालय है। इस गांव में 1958 में स्थापित राम स्वारथ सिंह उच्चस्तरीय विद्यालय मात्र छह कमरों में बिना आदेशपाल व किरानी के संचालित हो रहा है। इन्हीं छह कमरों में दो कमरे कार्यालय के लिए उपयोग में लाए जा रहे हैं। बाकी के चार कमरों में वर्ग नाै, दस तथा इंटर के आर्ट्स, साइंस व कॉमर्स की पढ़ाई होती है। इंटर स्तरीय विद्यालय होने के बावजूद न तो इस विद्यालय में छात्राओं के लिए कॉमन रूम है और न ही पुस्तकालय। प्रयोगशाला के लिए कमरे भी उपलब्ध नहीं हैं। हालत यह है कि किरानी का काम इस स्कूल के प्राचार्य को करना पड़ता है।
मेन गेट हो गया चोरी
इस स्कूल का गेट को सालों पहले चोरी चला गया था। बाउंड्री वॉल भी नदारद है। पेयजल के लिए लगी बोरिंग चोरी हो चुकी है। बाउंड्री वॉल नहीं रहने से असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। ऐसा भी नहीं है कि इस विद्यालय के लिए भवन का निर्माण नहीं कराया गया। अलग से भवन भी सालों पहले बनाए गए लेकिन आज तक किसी विवाद के कारण स्कूल को नहीं सौंपा गया। सरकारी उदासीनता से सुविधा विहीन इस विद्यालय में छात्र नामांकन कराने में ही हिचकते हैं। यही कारण है कि वर्षों से संचालित इस विद्यालय में मात्र 337 ही छात्र पढ़ते हैं। हालांकि इस स्कूल में चौदह शिक्षक पदस्थापित हैं।
स्कूल के भवन व सुविधाओं के विस्तार तथा आदेशपाल, किरानी की नियुक्ति के लिए कई बार बीईअाे से लेकर डीईओ तक लिखित सूचना दी गई है। अागे के अादेश की प्रतीक्षा है।
डाॅ सूर्य भूषण प्रसाद, विद्यालय के प्राचार्य
क्लर्क की बहाली कराई जाएगी। भवन का मामला विभाग सेे जुड़ा हुआ है।
अभिनंदन झा, डीईओ