रेप मामले तभी थमेंगे, जब सख्त और जल्द फैसला हो

Patna News - रश्मि कुमार, आईएएस वाइव्स एसोसिएशन की प्रेसिडेंट इस मामले में क्या कहा जा सकता है। मैं नि:शब्द हूं, दुखी हूं।...

Dec 04, 2019, 08:52 AM IST
रश्मि कुमार, आईएएस वाइव्स एसोसिएशन की प्रेसिडेंट

इस मामले में क्या कहा जा सकता है। मैं नि:शब्द हूं, दुखी हूं। कहने के लिए कुछ नहीं है। ये क्राइम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक लोगों में डर नहीं आएगा। डर लाने के लिए इन मामलों में तुरंत सुनवाई और तुरंत दोषियों को सजा देने की जरूरत है। हम आए दिन देश के हर कोने से रेप के मामले सुनते हैं, पढ़ते हैं। ये मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। क्यों? क्योंकि क्रिमिनल को पता है वह बच जाएंगे। पुलिस की लापरवाही कहें या फिर पब्लिक की। हमें अब कुछ करने की जरूरत है। भारत की बेटी को पहले सुरक्षा चाहिए।

रेपिस्ट को सीधा फांसी की सजा सुनाई जाए

पुष्पलता मोहन, बासा वाइव्स एसोसिएशन की प्रेसिडेंट

आज हमारे देश में रेपिस्ट को कोई कड़ी सजा नहीं मिलती है। दोषियों को सीधा फांसी की सजा दी जानी चाहिए। ऐसे मामलों में कोई ट्रायल और कोई सुनवाई का मतलब नहीं है। जब तक हम सख्त सजा नहीं देंगे तब तक ऐसे लोगों के अंदर डर नहीं होगा। इनका कहीं-न-कहीं कारण यह भी है कि आज जनता को पुलिस पर भरोसा नहीं है। जब लड़कियां किसी मुसीबत में होती हंै तो वो पुलिस के बारे में क्यों नहीं सोचतीं। कहीं-न-कहीं आम जनता का पुलिस पर भरोसा टूट रहा है। इसे बहाल करना होगा।

नई पीढ़ी, खासकर बेटों को सेंसिटाइज करने की जरूरत

उषा झा, बिहार महिला उद्योग संघ की अध्यक्ष

देश में कानून तो बहुत हैं लेकिन उसका इंप्लिमेंटेशन सही से नहीं हो पाता। इस तरह की घटना के दोषियों को सख्ती से सजा सुनाने की जरूरत है। वो भी जल्द से जल्द। लेकिन जो सजा इन्हें मिलती है उससे न तो पीड़िता संतुष्ट होती है और न ही जनता। हमें अपने बच्चों की अपब्रिंगिग पर फोकस करना चाहिए। बेटियों को तहजीब सिखाने के साथ-साथ बेटों को सेंसिटाइज करना चाहिए। बेटियों को कॉन्फिडेंट बनाएं साथ ही बेटों को लड़कियों को रिस्पेक्ट करना भी सिखाना चाहिए।

सड़क से वर्कप्लेस तक बेटियों को देनी होगी सुरक्षा

नीलम सिंह, नेवी वाइव्स एसोसिएशन की प्रेसिडेंट

रेपिस्ट को कड़ी- से -कड़ी सजा सुनाने की जरूरत है। वह भी जल्दी। हम अक्सर ऐसे मामलों में देखते हैं कि ट्रायल और सुनवाई में वर्षाें बीत जाते हैं। फैसला जब आता है तो वो उतना संतोषजनक नहीं होता। ऐसे में दोषियों के मन से डर खत्म हो जाता है। आज हमारी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। न ही वर्कप्लेस पर और न ही सड़क पर। आखिर ये कब तक चलेगा। लड़कियों को भी हर समय अलर्ट रहना चाहिए। कभी भी अंजान व्यक्ति पर भरोसा न करें। कैब में बैठंे तो उसकी गाड़ी का नंबर और डिटेल्स अपने अभिभावक को भेज दें।

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