जीवन का रहस्य जानने के लिए करें गीता का पाठ

Patna News - शहर के श्रीनगर सुदर्शन चौक स्थित भक्ति वृक्ष केंद्र परिसर में शनिवार को गीता जयंती पर वैदिक हवन यज्ञ आयोजित की गई।...

Dec 09, 2019, 09:20 AM IST
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शहर के श्रीनगर सुदर्शन चौक स्थित भक्ति वृक्ष केंद्र परिसर में शनिवार को गीता जयंती पर वैदिक हवन यज्ञ आयोजित की गई। मायापुरी से पधारे इस्कॉन के संत सह मुख्य यज्ञकर्ता भद्रचारू दास के नेतृत्व में और सात सौ श्लोकों पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन हुआ। संस्थान से जुड़े 120 से अधिक श्रद्धालुओं ने हवन यज्ञ में हिस्सा लिया। इसमें 18 अध्याय के श्लोकों का सामूहिक पाठ करते हुए यज्ञ में आहुतियां दीं। इस यज्ञ का आयोजन राधा माधव सेवा ट्रस्ट के द्वारा किया गया। राधा माधव सेवा के संयोजक गोविंद दास ने बताया कि गीता जयंती पर उज्जैन, मुम्बई, कोलकाता आदि शहरों से पधारे संतों ने हवन यज्ञ के उपरांत श्रद्धालुओं को गीता की शिक्षा अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित कर मानवीय जीवन मूल्यों के संदर्भ में श्रीमद्भगवतगीता विषय पर गीता का प्रवचन कर श्रद्धालुओं से गीता को जीवन में धारण करने का संकल्प करवाया गया। कार्यक्रम में 65 लोगों को श्रीमद्भगवतगीता पुस्तक प्रदान की गई तथा श्री राधा कृष्ण का भोग लगाकर प्रसाद का वितरण किया गया।

संत रूप चैतन्य दास ने बताया कि पांच हजार वर्ष पूर्व महाभारत काल में मार्गशीष एकादशी के दिन ही कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। तब से निरन्तर मार्गशीष एकादशी को गीता एकादशी या गीता जयंती के नाम से जाना जाता है। सनातन संस्कृति में गीता का स्थान सर्वोच्च है। किसी भी इंसान के जीवन में मूल्यों का अहम योगदान रहता है क्योंकि इन्हीं के आधार पर अच्छा-बुरा या सही-गलत की परख की जाती है। मानव जीवन की पहचान उसके जीवन मूल्य हैं। उसके बाद उसका विद्यालय, जहां से उसे शिक्षा हासिल होती है। परिवार, समाज और विद्यालय के अनुरूप ही एक व्यक्ति में सामाजिक गुणों और मानव मूल्यों का विकास होता है। प्राचीन भारत में पाठशालाओं में धार्मिक शिक्षा के साथ मूल्य आधारित शिक्षा भी जरूरी होती थी। लेकिन समय के बदलाव के साथ यह कम होता चला गया और आज वैश्वीकरण के इस युग में धर्म व मूल्य आधारित शिक्षा की भागीदारी लगातार घटती जा रही है। आज के समय में गीता रूपी ज्ञान की गंगोत्री में स्नान कर अज्ञानी सद्ज्ञान को प्राप्त कर सकता है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में इनकी रही सहभागिता

मुम्बई के संत नवकिशोर गौरंग दास, चैतन्य प्रेमा देवी दास, उज्जैन से बलदायिनी देवी दास, कोलकत्ता से मवेश कृष्णा दास, तेलंगना से मंगेश्वर दास, सुगोपी देवी दास, सुबाहु गोपा दास, गोविन्द दास, अचितानन्द अर्जुन दास, धर्मराज युधिष्ठिर दास आदि मौजूद रहे।

सीवान में गीता का पाठ करते लोग।

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