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मधुमेह को नियंत्रित रखने के लिए दवा के साथ नियमित टहलना जरूरी

Patna News - मधुमेह के अधिकतर मरीज मानते हैं कि वे चिकित्सक के अनुसार दवा ले रहे हैं तो उनका शुगर नियंत्रित रहेगा। नियमित...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:41 AM IST
Patna News - regular walks with medicine should be necessary to control diabetes
मधुमेह के अधिकतर मरीज मानते हैं कि वे चिकित्सक के अनुसार दवा ले रहे हैं तो उनका शुगर नियंत्रित रहेगा। नियमित एक्सरसाइज (टहलना) और भोजन कोई मायने नहीं रखता है। लेकिन यह सोच पूरी तरह से गलत है। सिर्फ दवा के भरोसे रहने से शुगर को नियंत्रित नहीं रखा जा सकता है। शुगर को नियंत्रित रखने के लिए जितनी दवा महत्वपूर्ण है उससे अधिक जरूरी टहलना और खानपान में परहेज है। वैसे भी शुगर नियंत्रित नहीं रहने पर उसका असर भविष्य में धीरे-धीरे शरीर के सभी अंगों पर पड़ने लगता है। शरीर के अंगों पर कुप्रभाव पड़ने का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है डायबिटीज, बीपी और कोलेस्ट्रॉल। कांप्लीकेशन से बचने के लिए इन तीनों को हर हाल में नियंत्रित रखना होगा। शुगर को साइलेंट किलर कहा जाता है। डायबिटीज के मरीज को चिकित्सक की सलाह पर दवा में बदलाव करना चाहिए। किसी के कहने पर दवा या फिर उसके डोज में बदलाव नहीं करना चाहिए। शुगर के मरीज को रेड मीट का सेवन नहीं करना चाहिए। चावल का सेवन कुछ हद तक चल सकता है। यह कहना है आईजीआईएमएस के वरीय मधुमेह रोग विशेषज्ञ (इंडोक्राइनोलॉजिस्ट) डॉ. वेद प्रकाश का। वे शनिवार को दैनिक भास्कर की हेल्थ काउंसिलिंग में पाठकों को सलाह दे रहे थे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा मोटे होते लोगों का मानना होता है कि उनका मोटापा थायराइड की वजह से बढ़ रहा है। पर वास्तविकता कुछ और है। सभी मोटापा का कारण थायराइड नहीं है। शुरू में फ्रैंक हाइपो थायराइड में दवा लेने पर मरीज का वजन दो से चार किलो ही कम होता है। इससे अधिक मोटापा कम नहीं होता है। कुछ लोग मोटापा कम करने के लिए थायराइड की दवा लेते रहते हैं। इसके बाद भी थायराइड मरीज का वजन कम नहीं होता है। चाहे जितनी दवा क्यों न ले लें। मोटापा के लिए पूरी तरह से गड़बड़ लाइफ स्टाइल जिम्मेवार है।



डॉ. वेद प्रकाश , वरीय मधुमेह रोग विशेषज्ञ, आईजीआईएमएस


यदि थायराइड की दवा ले रही हैं और थायराइड नाॅर्मल है तो सूजन का कोई और कारण हो सकता है। थायराइड नाॅर्मल होने पर शरीर में सूजन नहीं हो सकता है। चिकित्सक से मिलकर सलाह लें।


फल में खीरा, सेब, पपीता, अमरूद, जामुन, गाजर ले सकती हैं।


थायराइड में खानपान में कुछ वर्जित नहीं है। पत्तागोभी का सेवन नहीं करें और वजन नहीं बढ़ने दें। थायराइड नाॅर्मल रहेगा तो परेशानी नहीं होगी।


खानपान में लापरवाही से फास्टिंग बढ़ा हुआ है। दवा के अलावा टहलना शुरू कीजिए और खानपान में सुधार लाइए। नाॅर्मल हो जाएगा। धूप निकलने पर टहलने निकलें।


छह साल से मधुमेह के मरीज को खानपान में परहेज जरूरी है। सिर्फ दवा खाने से शुगर नियंत्रित नहीं रहेगा। खानपान में सुधार लाइए। दवा से नियंत्रित नहीं है तो इंसुलिन लेना होगा। यह गलत धारणा है कि एक बार इंसुलिन शुरू होने पर जीवन भर लेना पड़ेगा। शुगर के साथ बीपी और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित रखना होगा। शुगर पीड़ित मरीज को उनके बच्चों को भी शुगर होने का खतरा रहता है।

इन्होंने भी किया फोन

रमाशंकर (कंकड़बाग), अनिल कुमार वर्मा (खगौल), संजय कुमार (नालंदा), फरीदा बानो (फुलवारीशरीफ), विजय कुमार सिंह (गर्दनीबाग), मोहम्मद रफाक (पुलिस लाइन), ब्रजेश कुमार (खेमनीचक), विजय कुमार (पटना), रामाधार गोस्वामी (फुलवारीशरीफ), मदन (बिहटा), रीतेश कुमार सिंह (राजीवनगर), सुरेंद्र सिंह (पालीगंज), कमलेश कुमार (पोस्टल पार्क), रंजय कुमार सिंह (पटना), अभय कुमार सिंह (पटना)।

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