बालिका गृह कांड / नाबालिगों के यौन उत्पीड़न केस में दिल्ली कोर्ट अब 20 जनवरी को सुनाएगा फैसला, ब्रजेश ठाकुर समेत 21 आरोपी

शेल्टर होम में जांच करते सीबीआई अधिकारी और फॉरेंसिक एक्सपर्ट। (फाइल फोटो) शेल्टर होम में जांच करते सीबीआई अधिकारी और फॉरेंसिक एक्सपर्ट। (फाइल फोटो)
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शेल्टर होम में जांच करते सीबीआई अधिकारी और फॉरेंसिक एक्सपर्ट। (फाइल फोटो)शेल्टर होम में जांच करते सीबीआई अधिकारी और फॉरेंसिक एक्सपर्ट। (फाइल फोटो)

  • सीबीआई ने बताया- लड़कियों के उत्पीड़न केस में सभी आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत, इनमें 10 महिलाएं शामिल
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस मुजफ्फरपुर से दिल्ली कोर्ट शिफ्ट हुआ था, अदालत ने 30 सितंबर को फैसला सुरक्षित रखा

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2020, 10:40 AM IST

दिल्ली/पटना. बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में दिल्ली की साकेत कोर्ट को मंगलवार (14 जनवरी) को फैसला सुनाना था। लेकिन, अब कोर्ट 20 जनवरी को इस मामले में फैसला सुनाएगा। अदालत ने इस मामले में 30 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। बालिका गृह में लड़कियों के यौन और शारीरिक उत्पीड़न केस में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत 21 आरोपी हैं। यह मामला 7 फरवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मुजफ्फरपुर की स्थानीय अदालत से साकेत पॉक्सो कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था।

सीबीआई ने बताया कि सभी 21 आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। इसमें 10 महिलाएं हैं, जो कि बालिका गृह की लड़कियों के साथ हो रही दरिंदगी को न सिर्फ छिपाती रहीं, बल्कि बच्चियों की आवाज दबाने के लिए उन्हें यातनाएं भी देती रहीं। बालिका गृह में तैनात कुक से लेकर गेटकीपर तक पर लड़कियों के साथ दुष्कर्म के आरोप लगे हैं। सुनवाई के दौरान पीड़ित किशोरियों का बयान दर्ज किया गया था। कई लड़कियां आरोपियों को देखकर उनकी पहचान भी चुकी हैं।

21 आरोपी, जिनके खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दायर की
मामले में ब्रजेश ठाकुर (संरक्षक), इंदू कुमारी (अधीक्षिका), मीनू देवी (हाउस मदर), मंजू देवी (काउंसलर), चंदा देवी (हाउस मदर), नेहा कुमारी (नर्स), किरण कुमारी (हेल्पर), हेमा मसीह (प्रोबेशनरी अधिकारी), रवि रौशन, निलंबित सीपीओ (बाल संरक्षण पदाधिकारी), विकास कुमार, सीडब्लूसी ( बाल कल्याण समिति सदस्य), रोजी रानी (बाल संरक्षण इकाई की तब की सहायक निदेशक), विजय कुमार तिवारी (ब्रजेश का ड्राइवर), गुड्डू कुमार (कुक), कृष्णा कुमार राम (सफाईकर्मी), रामानुज ठाकुर ( गेटकीपर), साजिस्ता परवीन उर्फ मधु (ब्रजेश की करीबी), अश्विनी कुमार (कथित डॉक्टर), दिलीप वर्मा (सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष) और डॉ. प्रेमिला (अब तक फरार) है। इन आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग 13 धाराओं में कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस दिल्ली ट्रांसफर हुआ
फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुजफ्फरपुर विशेष कोर्ट से बालिका गृहकांड को दिल्ली की साकेत कोर्ट में ट्रांसफर किया गया। मामला सामने आने के बाद कोर्ट ने सीबीआई को बिहार के सभी शेल्टर होम की जांच करके रिपोर्ट देने का इस मामले में हाल ही में सीबीआई ने बिहार के 25 डीएम और 46 अन्य सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अनुशंसा की। साथ ही, सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि शेल्टर होम में किसी भी बच्ची की हत्या नहीं की गई और सभी गायब 35 लड़कियों को सकुशल बरामद किया गया है।

टिस की रिपोर्ट में हुआ था इस कांड का खुलासा
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस यानी टिस की रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड का खुलासा हुआ था। इसके बाद 31 मई 2018 को समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक ने मुजफ्फरपुर में महिला थाने में एफआईआर कराई गई थी। 26 जुलाई 2018 को राज्य सरकार ने बालिका गृह कांड की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की। अगले दिन यानी 27 जुलाई 2018 को सीबीआई ने पटना स्थित थाने में केस दर्ज किया था। इसके बाद अगस्त में समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उनके पति ब्रजेश के करीबी हैं।

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