लोकसभा सीट सासाराम / मीरा के सामने राजनीतिक विरासत बचाने की चुनौती, छेदी को मोदी मैजिक का भरोसा



Sasaram Loksabha seat Main Fight between Congress and BJP candidate
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Sasaram Loksabha seat Main Fight between Congress and BJP candidate

  • इस सीट से सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड जगजीवन राम के नाम, 8 बार चुने गए
  • मुनि लाल ने सासाराम में खुलवाया था भाजपा का खाता, लगातार तीन बार जीते

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 01:32 PM IST

सासाराम. सासाराम सीट पर एक तरफ राजनीतिक विरासत बचाने की चुनौती है वहीं दूसरी तरफ एनडीए को फिर मोदी लहर का भरोसा है। महागठबंधन में हुई सीट शेयरिंग के बाद सासाराम सीट कांग्रेस के खाते में आई और पार्टी ने यहां से जगजीवन राम की बेटी और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को टिकट दिया है। एनडीए में भाजपा की तरफ से छेदी पासवान एक बार फिर मैदान में हैं।

 

मीरा कुमार, कांग्रेस प्रत्याशी
मीरा कुमार पूर्व सांसद जगजीवन राम की बेटी हैं और सासाराम सीट से दो बार सांसद रह चुकी हैं। यूपीए-2 में लोकसभा अध्यक्ष रह चुकी हैं। पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है।

 

छेदी पासवान, भाजपा उम्मीदवार
छेदी कई बार पार्टी बदल चुक हैं। वे सांसद होने के साथ ही बिहार में विधायक भी रह चुके हैं। 1985 में पहली बार चेनारी से लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते। 1989 और 1991 में जनता दल के टिकट पर सांसद बने। साल 2000 में राजद के टिकट पर विधानसभा का चुनाव जीत गए। राबड़ी देवी और नीतीश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।

 

इस सीट पर था 'बाबूजी' का दबदबा, आजीवन सांसद रहे
'बाबूजी' के नाम से मशहूर पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम इस सीट से आजीवन सांसद रहे। 1952 से 1984 तक इस सीट पर हुए 8 आम चुनाव में हर बार  जगजीवन राम को जीत मिली। 1952 से 1971 तक वे कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा पहुंचे। आपातकाल के बाद जगजीवन राम ने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया। 1977 में लोक दल और 1980 में जनता पार्टी के टिकट पर दिल्ली पहुंचे। 1984 के आम चुनाव से पहले उन्होंने अपनी पार्टी बना ली और इंडियन कांग्रेस जगजीवन के टिकट पर संसद पहुंचे। जुलाई 1986 में उनका निध न हो गया।

 

चौथी बार मीरा और छेदी में होगी टक्कर
अभी सासाराम लोकसभा क्षेत्र का भाजपा के छेदी पासवान प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सासाराम में एक कहावत प्रचलित है कि मीरा को हराने का दम सिर्फ छेदी पासवान में है। जगजीवन बाबू के निधन के बाद जब 1989 में कांग्रेस ने मीरा को टिकट थमाया था तो दिल्ली में बैठे लोगों ने मान लिया था कि सासाराम में जगजीवन युग की वापसी हो जाएगी, लेकिन इस मान्यता को छेदी पासवान ने ध्वस्त कर दिया। जनता दल के प्रत्याशी के रूप में उन्होंने एक लाख से ज्यादा वोटों से मीरा को हराया। दो लड़ाइयों के बाद मीरा मुख्य मुकाबले से भी बाहर हो गई। 1996 से यहां भाजपा के मुनीलाल ने लगातार तीन जीत दर्ज की। 2004 में मीरा ने पहली इंट्री की। उसके बाद सासाराम मीरा और मुनिलाल का बैटल फील्ड बन गया। लगातार दो बार मुनिलाल के हारने के बाद भाजपा ने 2014 में छेदी पर दांव लगाया। तबसे मीरा बनाम छेदी का संघर्ष शुरू हो गया।

 

समीकरण-1

 

आधार वोटों की एकता चुनौती
एनडीए के लिए आधार वोटरों को गोलबंद रखने की बड़ी चुनौती है। कुशवाहा और ब्राह्मणों में बढ़ी नाराजगी से इस खेमे की परेशानी बढ़ी है। हालांकि कुर्मी मतदाताओं का साथ राहत दे रहा है। वैसे अगड़ी, अत्यंत पिछड़ी और वैश्य मतदाताओं की गोलबंदी बरकरार दिख रही है। गत चुनाव में जदयू को मिले 93 हजार वोटों को एनडीए बोनस के रूप में देख रहा है।

 

समीकरण 2

 

ब्राह्मण वोट में सेंध की कोशिश
परंपरागत वोटों के अलावा कुशवाहा समाज की गोलबंदी और ब्राह्मण वोटरों में बिखराव पर कांग्रेस प्रत्याशी को आसरा है। रविदास वोटरस् की बहुतायत है। कांग्रेस और बसपा के प्रत्याशी इसी समाज से हैं। इस वोट का बंटवारा कांग्रेस को परेशान कर सकता है। भाजपा से नाराज चल रहे जातीय नेताओं को अपने पक्ष में करने के लिए कांग्रेस जोर लगा रही है। 

 

स्थानीय मुद्दे
सासाराम संसदीय क्षेत्र में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार का है। यहां से ज्यादातर लोग हर साल रोजगार की तलाश में महानगरों का रुख करते हैं। उच्च शिक्षा के लिए कोई बड़ा संस्थान नहीं है। यही वजह है कि 10वीं या 12वीं के बाद छात्रों को दूसरे शहर जाना पड़ता है। इन सब मुद्दों से ऊपर राष्ट्रवाद और जातीय मुद्दों के आधार पर प्रत्याशी वोट मांग रहे हैं। 2014 की तरह इस सीट पर भी मोदी फैक्टर हावी है।

 

जातीय समीकरण

  • कुशवाहा-15% 
  • मुस्लिम-12%
  • सवर्ण-22%
  • दलित-20%
  • अन्य-38%

सासाराम सीट एक नजर-

 

साल जीते हारे
1952 जगजीवन राम(कांग्रेस) राधा मोहन सिंह(एसपी)
1957 जगजीवन राम(कांग्रेस) शिवपूजन सिंह(पीएसपी)
1962 जगजीवन राम(कांग्रेस) रामेश्वर अग्निभोज(निर्दलीय)
1967 जगजीवन राम(कांग्रेस) एस राम(पीएसपी)
1971 जगजीवन राम(कांग्रेस) महावीर पासवान(एनसीओ)
1977 जगजीवन राम(भारतीय लोक दल) मुंगेरी लाल(कांग्रेस)
1980 जगजीवन राम(जनता पार्टी) महावीर पासवान(कांग्रेस आई)
1984 जगजीवन राम(इंडियन कांग्रेस जगजीवन) महावीर पासवान(कांग्रेस)
1989 छेदी पासवान(जनता दल) मीरा कुमार(कांग्रेस)
1991 छेदी पासवान(जनता दल) मीरा कुमार(कांग्रेस)
1996 मुनि लाल(भाजपा) छेदी पासवान(जनता दल)
1998 मुनि लाल(भाजपा) राम केशी प्रसाद(राजद)
1999 मुनि लाल(भाजपा) राम केशी भारती(राजद)
2004 मीरा कुमार(कांग्रेस) मुनि लाल(भाजपा)
2009 मीरा कुमार(कांग्रेस) मुनि लाल(भाजपा)
2014 छेदी पासवान(भाजपा) मीरा कुमार(कांग्रेस)
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