यहां बोलती हैं रद्दी कागज और मुल्तानी मिट्टी से बनी मूर्तियां

Patna News - गांधी मैदान में लगे गांधी शिल्प बाजार में देश भर से उद्यमी पहुंचे हैं। मेले में दूर-दूर से ग्राहक पहुंचे हैं। लघु...

Feb 12, 2020, 09:05 AM IST
Patna News - sculptures made of scrap paper and multani soil speak here
गांधी मैदान में लगे गांधी शिल्प बाजार में देश भर से उद्यमी पहुंचे हैं। मेले में दूर-दूर से ग्राहक पहुंचे हैं। लघु उद्यमियों ने अपने हुनर से पूरे मैदान की रौनक बढ़ा दी है। उनके सामानों की भी खूब डिमांड है। हालांकि मेले में बहुत ज्यादा भीड़ नहीं थी लेकिन उद्यमियों में आने वाले दिनों को लेकर उम्मीद बाकि है। उन्हें भरोसा है कि उनके सामानों की बिक्री खूब होगी। इन सबके अलावे मेले में कई ऐसे स्टॉल लगे हैं जो ना सिर्फ महिला सशक्तीकरण की कहानियों को मजबूती से सामने लाते हैं बल्कि उद्यम के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या बढ़ने का भी सुबूत देती है। खास बात ये कि सभी महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं।

मिनती के फूलों की है खूब डिमांड

कोलकाता से आई मिनती मंडल के बुके, फूलों की बनी माला, डेकोरेटिव आइटम का कलेक्शन अनोखा है। इन फूलों में जान नहीं है लेकिन इसे देखते ही आपके चेहरे पर स्माइल आ जाती है। ड्राई लिव्स और दूसरे मैटेरियल से बने इन गुलदस्तों को मिनती कलर करती हैं। इनकी कीमत करीब 100 से लेकर 500 रुपए है। कुछ को ऑरिजनल लिव्स और फूल से भी बनाया है। इनके स्टॉल पर सबसे ज्यादा भीड़ नजर आई।

बेडशीट पर बनाती हैं ब्लॉक प्रिटिंग

उपेंद्र महारथी से जुड़ी राधा देवी पांच वर्षों से ब्लॉक प्रिंटिंग का काम करती हैं। कॉटन बेडशीट पर ब्लॉक प्रिंटिंग कर उन्हें आकर्षक बनाती हैं। इससे करीब 10 लोग जुड़े हुए हैं। हर महीने करीब 500 बेडशीट की बिक्री हो जाती है। राधा बताती हैं कि इसके जरिए हम अच्छी कमाई कर लेते हैं लेकिन मेले में ज्यादा बिक्री नहीं हुई है। आने वाले दिनों से उम्मीदें हैं। इन बेडशीट की डिमांड रहती है। इसके जरिए हमारी कला निखर रही हैं।

कतरनों से बनाती हैं सुंदर, स्टाइलिश बैग

पटना की कलावती अनीसाबाद, गुलजारबाग और आस-पास के इलाकों की करीब 17 महिलाओं के साथ बैग बनाती हैं। इनमें जूट बैग्स, मार्किन बैग्स, नेट बैग और अन्य शामिल हैं। जूट बैग पर हाथ से स्टिचिंग कर उन्हें सुदंर रूप देती हैं। इनकी कीमत 350 रुपए है। वहीं कपड़ों की कतरन और थान के टुकड़ों को जोड़कर उनमें रंग-बिरंगे लेस लगाकर उन्हें पार्टी बैग जैसे डिजाइन भी देती हैं। मार्किन बैग प्लास्टिक की जगह यूज करने के लिए लोगों को प्रेरित करता है। इनकी कीमत 20 से 40 रुपए है। इसके साथ उन्होंने एक नए प्रकार के बैग को लांच किया है। जो है नेट बैग। ये बैग खासकर फ्रीज के लिए बनाए गए हैं ताकि सब्जियों और फलों को स्टोर किया जा सके।

छह सालों से बना रही हैं मधुबनी, मिथिला पेंटिंग


मधुबनी की रीता देवी चुपचाप अपने लाल रंग की कुर्सी पर बैठी थीं। एक महिला ने एक पेंटिंग को देखा, प्राइस पूछा, रीता बोलीं 200 है लेकिन कम हो जाएगा मैडम......... रीता करीब छह वर्षों से मधुबनी और मिथिला पेंटिंग बनाती हैं। गांव की महिलाओं के साथ वो हर साइज के पेपर पर अपनी कला को उकेरती हैं और उनसे कई संदेश भी देती हैं। पेंटिंग्स के किनारे कुछ डेकोरेटिव आइटम लगे हुए हैं जिसे उन्होंने पेपर मशीन का नाम दिया है। इनको वो रद्दी पेपर को कूटकर, उसे मुल्तानी मिट्टी में घोलकर बनाती हैं। करीब एक दिन में एक ऐसी मुर्ति पूरी तरह तैयार होती है। इनकी कीमत 500 रुपए है। वो कहती हैं कम से कम 10 हजार रुपए हर महीने इन पेंटिंग्स के जरिए आ जाते हैं।


मेले में खरीदारी करती लड़कियां, किसी को कालीन भाया तो किसी ने फूलों को खरीदा

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