बिहार / पशु-पक्षियों की बिक्री पर लगी रोक ने उजाड़ दी सोनपुर मेले की रौनक, अब थियेटर के नाम पर जुटती है भीड़



कार्तिक पूर्णिमा के साथ शुरू होती है सोनपुर मेले की शुरूआत। कार्तिक पूर्णिमा के साथ शुरू होती है सोनपुर मेले की शुरूआत।
मेले में बिक्री के लिए हजारों घोड़ा लेकर पहुंचते हैं कारोबारी। मेले में बिक्री के लिए हजारों घोड़ा लेकर पहुंचते हैं कारोबारी।
मेले में सांड के साथ अनंत सिंह। (फाइल) मेले में सांड के साथ अनंत सिंह। (फाइल)
रात में नाच देखने के लिए जुटती है हजारों लोगों की भीड़। रात में नाच देखने के लिए जुटती है हजारों लोगों की भीड़।
Sonpur Pashu Mela 2019: Sonepur Cattle Fair News Updates Bihar's Sonpur Pashu Mela
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कार्तिक पूर्णिमा के साथ शुरू होती है सोनपुर मेले की शुरूआत।कार्तिक पूर्णिमा के साथ शुरू होती है सोनपुर मेले की शुरूआत।
मेले में बिक्री के लिए हजारों घोड़ा लेकर पहुंचते हैं कारोबारी।मेले में बिक्री के लिए हजारों घोड़ा लेकर पहुंचते हैं कारोबारी।
मेले में सांड के साथ अनंत सिंह। (फाइल)मेले में सांड के साथ अनंत सिंह। (फाइल)
रात में नाच देखने के लिए जुटती है हजारों लोगों की भीड़।रात में नाच देखने के लिए जुटती है हजारों लोगों की भीड़।
Sonpur Pashu Mela 2019: Sonepur Cattle Fair News Updates Bihar's Sonpur Pashu Mela

  • 2003 में सोनपुर मेले में पशुओं की बिक्री पर लगी थी रोक, रात में नाच देखने के लिए जुटते हैं हजारों लोग
  • बाहुबली विधायक अनंत सिंह कई सालों से यहां घोड़ा, हाथी लेकर पहुंचते थे, लेकिन जेल में रहने के चलते वे इस बार नहीं आ पाएंगे

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2019, 06:34 PM IST

हाजीपुर. ऐतिहासिक गजग्राह युद्ध की भूमि सोनपुर में विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला अब पशु मेला की जगह थियेटर मेला बन गया है। 2003 में पशु-पक्षियों की बिक्री पर लगी रोक के बाद साल दर साल मेले की रौनक उजड़ती चली गई। कभी आठ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लगने वाला यह मेला राज्य सरकार की शिथिलता के कारण मात्र दो वर्ग किलोमीटर में सिमट गया है।

 

दो दशक पहले हाजीपुर के कोनहारा घाट से सारण के पहलेजा घाट तक फैले सोनपुर मेला घूमने में पर्यटकों को तीन से चार दिन लग जाते थे। हर साल हजारों विदेश पर्यटक मेला देखने आते थे। अब पांच से छः घंटे में सोनपुर मेला देखने का कोरम पूरा हो जाता है। सिर्फ कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए बिहार और उत्तर प्रदेश से जुटने वाले लाखों के भीड़ ही इस मेले को एहसास कराती है कि अब भी मेला जिंदा है।

 

लालू और अनंत सिंह का घोड़ा होता था मेले के आकर्षण का केंद्र
पंजाब की गाय-बैल, आसाम और पश्चिम बंगाल की भैंस और उत्तर भारत के कई राज्यों के घोड़े और हाथी से कभी सोनपुर मेला गुलजार होता था। अब सिर्फ सारण जिले के कुछ लोग गाय और घोड़ा का बाजार लगाते हैं। सोनपुर से ही पहली बार विधायक बने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कई वर्षों तक अपने घोड़े पवन को यहां भेजकर मेले की रौनक बढ़ाई। बाद में मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह का घोड़ा और घुड़दौड़ सोनपुर मेला के चर्चा का केंद्र हुआ करता था।

 

अनंत सिंह मेले में अपना हाथी, घोड़ा, गाय और सांड लेकर पहुंचते थे, लेकिन इस बार जेल में बंद होने के चलते वह मेले में नहीं होंगे। नब्बे के दशक में सोनपुर के बड़े जमींदारों में गिने जाने वाले बच्चा बाबू का घोड़ा, हाथी, शेर, बाघ, पशु-पक्षी सोनपुर मेला के आकर्षण का बड़ा केंद्र होता था। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री रहे वर्मा जी अपने हाथियों के साथ सोनपुर मेले में एक हफ्ते तक डेरा डालते थे।

 

मेले में लालू का घोड़ा लेकर पहुंचे थे अनंत सिंह
कहा जाता है कि विधायक अनंत सिंह को एक बार लालू प्रसाद यादव का घोड़ा पसंद आ गया था। वे लालू के घोड़े 'पवन' को खरीदना चाहते थे, लेकिन यह जानते थे कि लालू उस घोड़े को उन्हें नहीं बेचेंगे। अपने शौक पूरी करने के लिए माने जाने वाले अनंत सिंह ने किसी दूसरे के जरिए लालू के घोड़े को खरीदा और 2007 में वे उस घोड़े को लेकर मेले में पहुंचे। जब लोगों ने लालू का घोड़ा अनंत सिंह के हाथों में देखा तो भौंचक्के रह गए।

 

हाथियों को लेकर कम होता गया क्रेज
सोनपुर मेले में हाथियों की बिक्री बंद होने के बाद कारोबारियों का क्रेज कम होता चला गया। 2007 के मेले में कारोबारी 77 हाथी लेकर मेले में पहुंचे जो 2014 में घटकर 39 हो गया। 2015 में 17,  2016 में 13 और 2017 में सिर्फ तीन हाथी मेले में दिखाई दिए। 2018 में केवल अनंत सिंह की हथिनी मेले में थी।

 

धीरे-धीरे उजड़ता चला गया बाजार
खेती की बदली शैली और कृषि आधुनिकीकरण (ट्रैक्टर हार्वेस्टर) ने कभी 35 हजार बैल बेचने वाले सोनपुर मेले में अब महज 100 से 150 बैल आ रहे हैं, वह भी सिर्फ कोरम के नाम पर। भैसों की बुकिंग पर रोक से भैंस बाजार भी खत्म सा हो गया है। हाथी की बिक्री बंद होने के बाद स्थानीय लोग दो से तीन हाथी सिर्फ दिखाने के लिए बाजार में रखते हैं। पशु बाजार के नाम पर विख्यात इस मेले में अब सिर्फ गाय, घोड़े और कुत्ते का बाजार लग रहा है।

 

पिछले दो वर्षों से पर्यावरण एवं वन विभाग की कड़ाई के कारण पक्षियों का बाजार करीब-करीब खत्म हो गया। लुधियाना और दिल्ली से गर्म कपड़े लाकर बेचने वाले ही अब इस बाजार में बच गए हैं। रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर थियेटर देखने वालों की भीड़ इस मेले में जुटती है। आज का सोनपुर मेला बस यही है।

 

सोनपुर मेले के अस्तित्व को बचाने के लिए आवाज उठा रहे विधायक
सोनपुर के विधायक रामानुज प्रसाद यादव मेले के अस्तित्व को बचाने के लिए वर्षों से लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका मानना है कि अगर सोनपुर को किसानों के प्रशिक्षण का राजस्तरीय केंद्र, कृषि उपकरणों का राष्ट्र स्तरीय बाजार और एग्रोप्रोसेस्ड इंडस्ट्री का केंद्र बनाया जाए तो फिर से सोनपुर मेला अपने ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंच सकता है। वो सोनपुर मेला को ऑटोमोबाइल बाजार का भी केंद्र बनाने के पक्षधर हैं। चूंकि, बिहार की 75 से 80 फीसदी आबादी कृषि से जुड़ी हुई है और बिहार के आम, लीची, मकई, मखाना, केला पूरे देश में प्रसिद्ध हैं ऐसे में सोनपुर मेला को कृषि से जुड़ी उत्पादों का बाजार बनाया जाए तो सोनपुर मेला फिर से गुलजार हो उठेगा।

 

रिपोर्ट-इंद्रभूषण

 

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