जहां मीटर नहीं लगा वहीं से करें इसकी शुरुअात

Patna News - राज्य में नई बिजली दर 1 अप्रैल से लागू होगी। शुक्रवार को अंतिम जनसुनवाई के बाद बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने...

Feb 15, 2020, 09:20 AM IST
Patna News - start it from where the meter is not installed

राज्य में नई बिजली दर 1 अप्रैल से लागू होगी। शुक्रवार को अंतिम जनसुनवाई के बाद बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। इसके बाद आयोग बिजली कंपनी और उपभोक्ताओं का कोर्इ पक्ष नहीं सुनेगा और न ही कोई लिखित सुझाव लेगा। अायाेग दाेनाें पक्षों पर मंथन एवं कंपनियों के प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद अपना फैसला सुनाएगा। आयोग के पदाधिकारियों की मानें तो होली से पहले फैसला आने की उम्मीद है।

जनसुनवार्इ के दौरान औद्योगिक क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ किसान, उपभोक्ता, साउथ और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियाें के पदाधिकारियों ने अपना पक्ष रखा। इस दौरान डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के पदाधिकारियों ने कहा कि शत-प्रतिशत राजस्व वसूली के लिए उपभोक्ताओं के घरों से इलेक्ट्रॉनिक मीटर को हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाया जा रहा है। घरेलू उपभोक्ताओं के घरों में सिंगल फेज मीटर का हर माह किराया 90 रुपए, थ्री फेज मीटर का किराया 120 रुपए, एलटी प्रीपेड सिंगल फेज मीटर का 80 रुपए और थ्री फेज का 110 रुपए की जाए। अभी स्मार्ट मीटर का किराया 50 रुपए, थ्री फेज मीटर का किरया 100 रुपए, एलटी प्रीपेड सिंगल फेज मीटर का 80 रुपए और थ्री फेज मीटर का किराया 100 रुपए निर्धारित है। इस पर आयोग के अध्यक्ष एसके नेगी ने कहा कि ग्रामीण इलाके में सबसे ज्यादा बिना मीटर वाले उपभोक्ता हैं। जहां मीटर नहीं लगा है, वहीं से मीटर लगाने की शुरुआत करें। शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगा हुआ है। आपको मीटर लगाने के लिए निश्चित समय दिया जाएगा। तब सुधार होगा। इस मौके पर आयोग के सदस्य आरके चौधरी, सदस्य राजीव अमित, परामर्शी लक्ष्मण भगत, सचिव रामेश्वर प्रसाद दास, एसकेपी सिंह, जयजीत रे, अरविंद कुमार, अशोक कुमार, विजय कुमार, पुरुषोत्तम कुमार, नदीम अहमद सहित दोनों डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के संबंधित पदाधिकारी भी मौजूद थे।

बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी का आरोपबीअाईए ने बिजली एग्रीमेंट के बारे में दी भ्रामक जानकारी

पटना | बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी ने कहा कि बिहार विद्युत विनियामक अायाेग द्वारा गुरुवार काे की जाने वाली जनसुनवाई के दाैरान बीअार्इए द्वारा खपत के विरुद्ध किए गए एग्रीमेंट के संबंध में भ्रामक जानकारी दी गई है। थर्मल पावर स्टेशनों से विद्युत उपलब्धता के अाकलन के बिंदुओं पर कंपनी की अाेर से जानकारी मुहैया करायी गयी है।

फिक्स चार्ज में वृद्धि का विरोध

बिजली काटने से सूख गए पाैधे

नौबतपुर से आए किसान रणधीर कुमार ने कहा कि खेतों में 17 फरवरी को बिजली का तार शॉर्ट कर गया। इसकी शिकायत की गयी। लेकिन, छठपूजा के बाद बिजली सप्लाई चालू हुई। किसान चंद्रधन प्रसाद पांडेय ने कहा कि खेतों में लगे मीटर की रीडिंग करने के लिए कर्मचारी नहीं जाते हैं। काफी प्रयास के बाद एक बार मीटर की रीडिंग करने के लिए कर्मचारी को बुलाया तो बिल नहीं दिया। 344 यूनिट का बिल जमा करने के लिए कहा। अंदाज से बिजली बिल जमा कर रहे थे, तभी अचानक 31 हजार का बिजली बिल भेज दिया। शिकायत के बाद पदाधिकारी ने कुछ नहीं सुना। बिजली काट दी। जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत खेत में लगे पाैधे सूख गए। अब हम उपभोक्ता फोरम में केस लड़ रहे हैं। इस पर अध्यक्ष एसके नेगी ने डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के पदाधिकारी को मामले की जांच का निर्देश दिया।

उद्योगों को दी जाए राहत

इधर, बीआर्इए के उपाध्यक्ष संजय भरतिया ने घरेलू उपभोक्ताओं का मीटर रेंट समाप्त करने, फिक्स चार्ज को समाप्त कर बिजली बिल में कुछ बढ़ोतरी करने की मांग की। अाैद्याेगिक उपभोक्ताओं का फिक्स चार्ज 700 रुपए से घटाकर 500 रुपए प्रति केवीए शुल्क करने, लोड फैक्टर रिबेट को चालू करने की मांग की। कहा- 6000 करोड़ रुपए गैप को घटाने के बाद 30 प्रतिशत बिजली बिल हर श्रेणी के उपभोक्ताओं की कम हो सकती है। इस पर आयोग को विचार करना चाहिए। वास्ते-त्रिवेणी स्मेलटर प्राइवेट लिमिटेड के वासुदेव प्रसाद ने राज्य में उद्योग को बचाने के लिए पश्चिम बंगाल अौर झारखंड द्वारा लागू डीवीसी टैरिफ के बराबर दर से बिजली देने की मांग की। पटवारी स्टील प्राइवेट लिमिटेड के सुभाष पटवारी ने कहा कि बिजली कंपनी रिटर्न पहले जोड़ रही है। बाद में सेल पर विचार कर रही है।

अायाेग के अध्यक्ष बाेले

डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों ने कहा

घरेलू उपभाेक्ताअाें का फिक्स चार्ज समाप्त कर टैरिफ में ही कुछ राशि बढ़ाकर बिल देने की उठी मांग

100% राजस्व वसूली के लिए लगा रहे स्मार्ट मीटर

जनसुनवार्इ के दौरान प्रमोद कुमार शर्मा, डोमन सिंह, प्रदीप मेहता, राम शरण सिंह, उमेश पंडित सहित अन्य उपभोक्ताओं ने डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के फिक्स चार्ज में 20 से 22.5 प्रतिशत बढ़ोतरी तथा एलटी और एचटी टैरिफ के नियम एवं शर्तों में बदलाव कर विलंब से बिल जमा करने वाले का भार 1.5 प्रतिशत बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया। वैशाली निवासी प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि आयोग की गाइडलाइन के अनुसार बिजली कंपनी लॉस को 15 प्रतिशत करती है तो दर बढ़ाने की बजाय कम हो सकती है। मोकामा निवासी राम शरण सिंह ने खेतों तक बिजली का पोल नहीं पहुंचने का मामला उठाया।

उदाहरणस्वरूप 100 मेगावाट के आवंटन के विरुद्ध वर्ष में अाैसतन 66.96 मेगावाट विद्युत ही वास्तविक रूप में उपलब्ध रहती है। विद्युत उत्पादन इकाइयाें के साथ किए गए इकरारनामे के अनुसार संप्रति कुल 4383 मेगावाट विद्युत उपलब्ध हाे रही है, जबकि वर्ष 2019-20 में अधिकतम मांग 5891 मेगावाट रही है।

दूसरा : काेर्इ भी र्इकार्इ पूरे साल लगातार अपनी पूर्व की क्षमता से नहीं चलती है। इस संबंध में इकाइयाें के उत्पादन क्षमता का निर्धारण वर्ष के अंत में किया जाता है। वर्ष 2018-19 के अांकड़ाें के अनुसार एनटीपीसी का वार्षिक प्लांट लाेड फैक्टर 72 प्रतिशत है। यानी, उत्पादन क्षमता या पीपीए का सिर्फ 72 प्रतिशत तक ही बिजली मिल पाती है।


पहला : थर्मल पावर इकाइयाें द्वारा विद्युत उत्पादन के दाैरान जितनी बिजली उत्पादित की जाती है, उसका लगभग 7 से 8 प्रतिशत हिस्सा उत्पादन के दाैरान खर्च हाे जाता है। इसे ऑक्जिलियरी पावर कंजप्शन के रूप में माना जाता है।

जनसुनवाई में बिहार विद्युत विनियामक आयोग के सदस्य।

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