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स्कूल के हॉस्टल में मिली छात्र की लाश; संदेह- कोई ‘राज’ जानता था अभिमन्यु

पुलिस हॉस्टल के वॉर्डन और दूसरे कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है।

Danik Bhaskar | Jul 10, 2018, 01:42 AM IST
घटना के बाद विलाप करते परिजन। घटना के बाद विलाप करते परिजन।

पटना/फतुहा. फतुहा के देवीचक स्थित शेफाली इंटरनेशनल स्कूल के हॉस्टल में छह वर्षीय छात्र अभिमन्यु की गला दबाकर हत्या कर दी गई। इसके बाद स्कूल के प्रिंसिपल व स्टाफ फरार हो गए। पुलिस ने महिला वार्डन, उसके बेटे, पति व दो शिक्षक सहित 12 लोगों को हिरासत में ले लिया। बच्चे का कसूर बस यह था कि उसने हॉस्टल में गलत काम होते देख लिया था। गलत काम करने वाले ने उसकी हत्या गला दबाकर कर दी और शव को बेडसीट से ढंक दिया।

उसी हॉस्टल में रह रही बहन ने सुबह में उठाया तो नहीं उठा अभिमन्यु: अभिमन्यु को सबसे पहले उसकी बहन मुस्कान ने ही देखा। मुस्कान उसके बगल बाले बेड पर ही सोई हुई थी। सुबह उठने के बाद वह भाई को तैयार होने के लिए उठाई तो वह उठ नहीं रहा था। हिलाने डुलाने पर भी जब वह नहीं उठा तब लड़कियों ने जाकर वार्डन को घटना की जानकारी दी। मुस्कान ने बताया कि अभिमन्यु का आधा बेड गिरा हुआ था। आधे बेडशीट पर वह सोया हुआ था और आधे से उसका शरीर ढंका हुआ था। उसके गले पर गहरा निशान था। उसके शरीर पर भी खरोंच के कई निशान थे। गला, चेहरा, छाती पर भी नाखून से खरोंचे जाने का निशान लग रहा था। पुलिस भी यह मान रही है कि मासूम की हत्या गला दबाकर की गई है। जानकारी मिलने के बाद पुलिस पड़ताल में जुट गई।

महिला वॉर्डन समेत 12 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया: पुलिस ने महिला वार्डन, उसके बेटे, पति व दो शिक्षक सहित कुल 12 लोगों को हिरासत में ले लिया। मामले की तह तक जाने के लिए घटनास्थल पर एफएसएल की टीम को भी बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल से कई नमूने इकट्ठे किए हैं। मृतक के गले के पास से भी उंगलियों के निशान लिए हैं। साथ ही बेडशीट, तकिया आदि को जब्त कर जांच के लिए भेज दिया है। अभिमन्यु रसलपुर गांव निवासी किसान राकेश कुमार उर्फ भीम प्रसाद का पुत्र था। अभिमन्यु की दस वर्षीय बहन मुस्कान, उसका ग्यारह वर्षीय सहोदर भाई कल्लू और चचेरी बहन रागिनी उसी स्कूल में पढ़ते हैं।

एक ही भवन में लड़के और लड़की का है हॉस्टल: स्कूल से चंद कदम दूर हॉस्टल है। यह भी किराए के मकान में है। एक भवन में लड़के और लड़कियों का हॉस्टल है। लड़के का हॉस्टल भवन के निचले तल पर जबकि लड़कियों का हॉस्टल ऊपरी तल पर स्थित है। लड़के के हॉस्टल की जिम्मेदारी वार्डन रानू के पति अरविंद पर थी। वह लड़कों के साथ ही हर दिन सोता था। जबकि रानू का जबान बेटा अपनी मां के साथ लड़कियों के हॉस्टल वाले फ्लोर पर अलग फ्लैट में सोता था। बच्चे की हत्या के वक्त वह अपनी बहन के साथ लड़कियों के हॉस्टल में सोया था, जबकि बाकी दिनों में वह लड़के के हॉस्टल में रहता था। चूंकि वह दो तीन दिन पहले ही गांव से लौटा था और उसकी उम्र काफी कम थी, इसलिए बहन उसे अपने साथ सोने ले गई थी। उस फ्लोर पर हॉस्टल की डेढ़ दर्जन लड़कियों, अभिमन्यु, वार्डन और उसके बेटे के अलावा कोई और मौजूद नहीं था।

  • गले पर गहरा निशान, कई जगह नाखून के खरोंच और चोट के चिह्न

हत्या के पीछे के इन 3 कारणों पर चल रही है जांच

1. अभिमन्यु ने छात्राओं के हॉस्टल में कुछ गलत हरकत देख लिया जो उसकी हत्या की वजह बनी

2. वह अपने हॉस्टल की जगह घटना की रात क्यों सोया बहन के साथ

3. आखिर क्यों फरार चल रहा है गार्ड अखिलेश, क्यों फरार हो गए थे वार्डन और उसका बेटा

परिजनों को लेट से दी जानकारी: अभिमन्यु के चाचा संतोष ने बताया कि उसके एक ग्रामीण ने सबसे पहले छह बजे सुबह में फोन कर घटना के बारे में बताया। जब वह फतुहा के रास्ते में थे तब स्कूल के वार्डन का फोन आया। वार्डन ने कहा कि आपका लड़का गंभीर है और अस्पताल में भर्ती है। इसके बाद उन्होंने फोन कट कर दिया। परिजनों ने कहा कि स्कूल प्रशासन ने आखिर उन्हें घटना की जानकार लेट से क्यों दी। बच्चे को अस्पताल में छोड़कर स्कूल के सभी कर्मी भाग क्यों गए।

बाहर के कुछ लड़कों पर भी शक, एक धराया, एक की तलाश: पुलिस के अनुसंधान में अबतक यह बात स्पष्ट हो गई है कि स्कूल की कुव्यवस्था ही मासूम की हत्या की जड़ में है। कुछ बाहरी लोग जो परोक्ष रूप से स्कूल प्रबंधन से जुड़े हुए थे वहीं इस घटना में शामिल हैं। ऐसे लोगों को स्कूल के एक-दो स्टाफ साथ दे रहे थे। पुलिस सूत्रों की मानें तो स्कूल और हॉस्टल तक आने जाने वाले दो लड़कों में से किसी एक ने हत्या की घटना को अंजाम दिया है। दोनों ही लड़कों को स्कूल के गार्ड और अन्य स्टाफ ने साथ भी दिया है। दोनों बाहरी लड़कों में से एक पुलिस की हिरासत में है। वहीं दूसरा सोमवार की देर रात तक फरार चल रहा था। पुलिस ने उसके घर पर भी छापेमारी की।

इधर, वार्डन की सफाई-बच्चे ने खा लिया था आम, फिर पी ली कोल्ड ड्रिंक, वही बन गया जहर

Q. अभिमन्यु की हत्या कैसे हुई
A. हत्या नहीं हुई है। उसकी मां और चाची आई थीं रविवार की शाम। बच्चे को चिकन और मिठाई खिलाई। इसके बाद आम और ठंडा भी पीने को दिया। रात में भी हॉस्टल में खाना खाया था। हमें आशंका है कि आम और ठंडा पीने के कारण उसके अंदर जहर बन गया और फूड प्वाइजनिंग से उसकी डेथ हो गई।
Q. सोने से पहले वह खेल रहा था। ऐसा कैसे हो सकता है? चेहरे पर चोट के निशान हैं।
A. रात 10 बजे तक वह जगा था। मेरे डांटने के बाद सोने गया था। सुबह उसकी बहन ने ही मुझे बताया। उसके गले पर खरोंच के निशान हैं। कहीं सांप न काट लिया हो।
Q. परिजनों को घटना के दो घंटे बाद खबर दी गई
A. हम लोग आनन फानन में बच्चे को अस्पताल ले गए। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

नाराज ग्रामीणों ने की सड़क जाम, एसपी से धक्कामुक्की: मासूम की हत्या के विरोध में आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने उसके शव को थाने के सामने ही बीच सड़क पर रख पुराने इाईवे को जाम कर दिया। थाने का भी घेराव किया। उग्र ग्रामीणों ने पटना-बख्तियारपुर फोरलेन के आरओबी के नीचे टायर जलाकर रास्ता अवरुद्ध कर दिया। इस कारण पटना से बख्तियारपुर की ओर जाने वाले दोनों मार्ग तकरीबन दो घंटे तक जाम रहे। फोरलेन पर गाड़ियों की लंबी कतार लग गई थी।

ग्रामीण स्कूल पहुंचे, तोड़फोड़ की: इसी बीच कुछ आक्रोशित ग्रामीण स्कूल पहुंच गए और वहां भी तोड़फोड़ की। स्कूल के बेंच, कुर्सी, सीसीटीवी कैमरे आदि तोड़ दिए गए। बवाल बढ़ता देख ग्रामीण एसपी आनंद कुमार खुद मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन लोग गुनहगार की गिरफ्तारी पर अड़े रहे। आक्रोशित ग्रामिणों ने एसपी के साथ धक्का-मुक्की भी की। ग्रामीण एसपी ने हत्या की बात को मानते हुए 48 घंटे के अंदर दोषियों को हर हाल में पकड़ लिए जाने का आश्वासन दिया। तब जाकर ग्रामीण वहां से हटे। इसके बाद बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। एसएमसीएच के डॉक्टरों की मानें तो बच्चे की हत्या गला दबाकर की गई है।

पुलिस ने भी माना-गला दबाकर की गई हत्या: अभिमन्यु की हत्या हुई है। बारह लोगों से पूछताछ की जा रही है। हत्या के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। आनंद कुमार, ग्रामीण एसपी

स्कूल के गेट के बाहर एसपी से उलझे लोग। इंसेट में मासूम छात्र। -फाइल फोटो स्कूल के गेट के बाहर एसपी से उलझे लोग। इंसेट में मासूम छात्र। -फाइल फोटो
सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करते लोग। सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करते लोग।