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छपरा / सात माह की बच्ची को नहर किनारे फेंक गए थे परिजन, स्वीडन से आए दंपत्ति ने लिया गोद

स्वीडेन की दंपत्ति ने बच्ची को लिया गोद। स्वीडेन की दंपत्ति ने बच्ची को लिया गोद।
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स्वीडेन की दंपत्ति ने बच्ची को लिया गोद।स्वीडेन की दंपत्ति ने बच्ची को लिया गोद।

  • सारण से अब तक 34 बच्चों को देश-विदेश के दंपत्तियों ने अपनाया
  • मां-बाप के साथ स्वीडन रवाना हुई गरिमा

Dainik Bhaskar

Nov 28, 2019, 05:36 PM IST

छपरा. बिहार के सारण में अपनों द्वारा ठुकराए गए एक बच्ची को सात समंदर पार से आए एक दंपत्ति ने गोद लिया है। गुरुवार को गरिमा अपने मां-पिता के साथ स्वीडेन चली गई। विशिष्ट दत्तक ग्रहण केन्द्र में रह रही बच्ची गरिमा को स्वीडेन में रहने वाले दंपत्ति को सौंपने के लिए कोर्ट की सभी प्रक्रियाएं पूरी की गई। छपरा सिविल कोर्ट ने बच्ची को स्वीडेन के दंपत्ति को सौंपने के लिए आदेश दिया। बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र और पासपोर्ट भी बनाया गया।


दरअसल, करीब डेढ़ साल पहले छपरा के पानापुर में नहर किनारे एक बच्ची कार्टून में बंद मिली थी। कुछ लोगों ने कार्टून में हलचल देख बच्ची को बाहर निकाला। लोग उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए और बाल संरक्षण इकाई को सूचना दी। बेहतर इलाज के बाद बच्ची स्वस्थ हुई तो उसे विशिष्ट दत्तक ग्रहण में रखा गया। संस्था ने बच्ची का नाम गरिमा रखा। स्वीडेन के दंपत्ति ने बच्ची को गोद लेने के लिए ऑनलाइन संस्था से संपर्क किया था।

सारण से अब तक 34 बच्चों को देश-विदेश के दंपत्तियों ने अपनाया
समाज कल्याण विभाग के बाल संरक्षण इकाई द्वारा जिले में संचालित हो रहे विशिष्ट दत्तक ग्रहण केन्द्र से करीब 34 बच्चों को देश-विदेश के दंपत्ति अपना चुके हैं। जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 से अभी तक करीब 34 बच्चों को गोद लिया जा चुका है। राज्य स्तरीय रिकॉड में सारण नंबर वन पर है।

बच्चों को गोद लेने की ये है प्रक्रिया
अनाथ व बेसहारा बच्चों को गोद लेने के लिए इच्छुक लोगों को सर्वप्रथम विभागीय पोर्टल (cara.nic.in) पर ऑनलाइन निबंधन कराना होता है। जिसमें गोद लेने वाले इच्छुक दंपत्ति को अपना संपूर्ण पारिवारिक विवरण देना होता है। इसके बाद समाज कल्याण विभाग के विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान द्वारा गृह अध्ययन किया जाता है। पांच बच्चों का फोटो शेयर किया जाता है, जिसमें 48 घंटे के अंदर किसी एक बच्चे को गोद लेने के लिए चयन करना होता है। चयन करने के बाद बच्चे को गोद लेने के लिए स्थानीय न्यायालय में आवेदन देकर अनुमति प्राप्त करना पड़ता है। कोर्ट का आदेश मिलने के बाद बाल संरक्षण इकाई द्वारा चयनित बच्चा दंपत्ति को सौंप दिया जाता है।

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