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बिहार सरकार के प्रयास से स्वास्थ्य संबंधी सूचकों में आया काफी सुधार

Patna News - स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा कि नई नीतियां बनाई जाती हैं और कुछ समय के बाद उसे छोड़ दिया जाता है।...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:40 AM IST
Patna News - the bihar government39s efforts brought improvement in health related indicators
स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा कि नई नीतियां बनाई जाती हैं और कुछ समय के बाद उसे छोड़ दिया जाता है। देश और राज्य में आम आदमी की स्वास्थ्य संबंधी जरूरत को पूरा करने के लिए उपयुक्त माहौल बनाने की जरूरत है। राज्य में सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही, जिस कारण से स्वास्थ्य संबंधी सूचकों में विगत वर्षों में काफी सुधार दिखा है। राज्य की मात्र 6.2 फीसदी जनसंख्या स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत आच्छादित है। राज्य सरकार स्वास्थ्य पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का सिर्फ 1 फीसदी खर्च करती है। आयुष्मान भारत योजना का बिहार के स्वास्थ्य और बीमा संबंधी प्रदर्शन पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। प्रधान सचिव शुक्रवार को पटना में ‘सेंटर फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी एंड पब्लिक फाइनांस (सीईपीपीएपफ), आद्री’ की दशम वर्षगांठ व्याख्यानमाला में दूसरे दिन अपनी बातें रख रहे थे। श्रम विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह, आईआईडी, यूके के अर्थशास्त्री पॉल स्टील ने जलवायु परिवर्तन पर अपनी बातें रखी।

मौके पर पूर्णिमा दासगुप्ता केनेथ मैकक्लून, सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंसेज कोलकाता प्रो. सुगत मारिजित, गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के प्रो. अरिंदम दासगुप्ता, प्रो. शांतनु घोष और मेलबोर्न विश्वविद्यालय के प्रो. अजय महाल आदि ने भी अपनी बातें रखी।

प्रोफेशनल नार्म्स में कमी सबसे बड़ी चुनौती | विश्व बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री स्तुति खेमानी ने कहा विकासशील देशों में राज्य की क्षमता संवर्धन में सबसे बड़ी चुनौती प्रोफेशनल नार्म्स में कमी और प्रोत्साहन का अभाव है। इस क्षमता को उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम लाभ देने के लिहाज से विकसित किया जा सकता है।

मध्य वर्ग स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे से बाहर

आद्री के सेंटर फॉर हेल्थ पॉलिसी के विकास आर केशरी ने कहा कि भारत में मध्य वर्ग को प्रधान मंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे से बाहर रखा जा रहा है। देश में स्वास्थ्य बीमा का कवर कुल आबादी का महज 25 फीसदी है। इससे नियोक्ताओं द्वारा कराए गए और समुदाय आधारित स्वास्थ्य बीमा का हिस्सा कम है। वहीं तक्षशिला फाउंडेशन के प्रणय कोटस्थाने ने कहा कि स्वास्थ्य के लिए केंद्रीय राशि से राज्यों को बहुत मदद नहीं मिली है।

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