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पटना (शशि सागर). नौबतपुर सिक्का लूटकांड में शामिल अपराधियों को पैसे लेकर छोड़ने के मामले में कोर्ट में चार्जशीट जमा हो चुकी है। सुनवाई चल रही है। साक्ष्यों और तथ्यों की पड़ताल के बाद कई चौंकाने वाली बात सामने आई है। पिछले साल 15 जुलाई को एक निजी कंपनी का 18.41 लाख का सिक्का लूटने के बाद अपराधी कार से 16 की सुबह बेउर थाने के सिपारा गुमटी के पास पहुंचे थे। जहां पुलिस ने पकड़ा। वहीं एक अपराधी सोनू को पैसे लेकर छोड़ दिया। इसके बाद बाकी को बेउर लाया गया। हाजत में बंद कर सिक्कों से भरे 13 बोरे थानेदार के कक्ष में रख दिए गए। थानेदार प्रवेश भारती आवास पर थे। पुलिसकर्मियों ने बात की और डेढ़ लाख में सौदा तय हुआ। अपराधियों से पीआर बांड भरवाया गया। लुटेरों ने बांड में लिखा कि हमलोगों को पूछताछ के लिए थाना लाया गया। बांड भरने के बाद लुटेरे बिट्टू, आनंद और पिंटू चले गए। मामले का खुलासा हुआ तब पुलिस छानबीन में जुटी और थानेदार के कक्ष से ही बांड पेपर बरामद हुआ।
एक लुटेरे के घर रेंटर रह चुका था दारोगा सुनील
पूरे मामले में दारोगा सुनील ने अहम भूमिका निभाई। पकड़ाए अपराधियों में एक आनंद भी था। आनंद का भाई तेजू सुनील से परिचित था। सुनील तेजू का किराएदार रह चुका था। अपराधियों को दारोगा विनोद और उसकी टीम ने पकड़ा था। इसके बाद तेजू ने सुनील से बात की। सुनील ने थानेदार को साढ़े तीन बजे रात में ही फोन कर कहा कि आनंद रिश्तेदार है। पैसे लेकर उसे छोड़ दें।
मोटी आमद होने पर थाने में होता था कथा वाचन
रोचक यह है कि अपराधियों को छोड़ने के लिए उनसे डेढ़ लाख रुपए लिए गए। उसी पैसे से थाने में सत्यनारायण कथा कराई गई। सूत्रों की माने तो जब भी थाने में मोटी आमद होती थी तो परिसर में पूजा पाठ करवाया जाता था। अपराधियों को छोड़ने में बेउर थाने के तत्कालीन थानेदार प्रवेश भारती समेत सात पुलिसकर्मी और चालक शामिल थे। इन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट जमा हो चुकी है। सभी जमानत पर हैं।
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