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पवन वर्मा की ‘आदि शंकराचार्य : हिंदुइज्म ग्रेटेस्ट थिंकर’ में रामायण के विभिन्न आयामों का वर्णन
पवन कुमार वर्मा ने अपनी वेस्ट सेलिंग किताब ‘आदि शंकराचार्य : हिंदुइज्म ग्रेटेस्ट थिंकर’ में रामायण के कुछ महत्वपूर्ण अंशों को नए रूप में पेश किया है। रामचरित मानस 16वीं शताब्दी में लिखी गयी हिंदी साहित्य का अद्भुत ग्रंथ है। तुलसीदास ने संस्कृत की जगह अवधि भाषा का प्रयोग किया। इस वजह से यह ग्रंथ सामान्य लोगों के लिए भी लोकप्रिय हो सका। इस किताब के विभिन्न अध्यायों में समर्पित पुत्र प्रियबंधु, प्रतिबद्ध प्रेमी के साथ एक आदर्श शासक और आम लोगों का वर्णन किया है। श्रीराम भगवान के साथ-साथ सामान्य व्यक्ति के रूप में भी अभिप्रेरक रहे हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम के रुप में उनका व्यक्तित्व करिश्माई रहा है। इस किताब का प्रकाशन वेस्टलाइन ने किया है।
तुलसीदास ने कविता के रूप में गंभीर विषय का भी बेहद सहज और सामान्य रूप में वर्णन किया है। वर्मा ने रामचरित मानस के इस पक्ष पर इस पर विस्तार से प्रकाश डाला है और बेहद मार्मिक वर्णन भी किया है। आध्यात्मिक पहलुओं के विभिन्न आयामों पर भी बिना किसी अतिरेक के उन्होंने अपनी बात रखी है। वर्मा एक लेखक, कूटनीतिज्ञ और राजनीतिज्ञ हैं। हाल तक जदयू से राज्यसभा के सदस्य थे।