केरल और राजस्थान से पटना पहुंचे 35 मजदूरों को जिला प्रशासन ने दो बसों से भेजा उनके घर

Patna News - कोरोना वायरस से बचाव के लिए हुए लॉकडाउन का सबसे ज्यादा इफेक्ट छोटे व्यवसाइयों व फुटपाथ दुकानदारों पर पड़ा है। ये...

Mar 27, 2020, 07:57 AM IST
Patna News - the district administration sent 35 workers from kerala and rajasthan to patna to their homes

कोरोना वायरस से बचाव के लिए हुए लॉकडाउन का सबसे ज्यादा इफेक्ट छोटे व्यवसाइयों व फुटपाथ दुकानदारों पर पड़ा है। ये रोज कमा कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। लेकिन स्थिति ऐसी है कि इनमें से कई परिवार से दूर राजधानी के विभिन्न मुहल्लों में बुरे फंसे हैं। उन्हीं में एक हैं 80 वर्षीय अब्दुल हमीद खां। ये राजधानी के कांग्रेस मैदान रोड में पिछले 55 सालों से गुमटी चला कर अपने परिवार की रोजी रोटी चला रहे हैं। उनके आंखों में बेबसी और चेहरे पर डर का खौफनाक मंजर साफ देखा जा सकता है। अब्दुल हमीद खां कहते हैं कि मेरा घर बिहारशरीफ के लहेरी थाना के मकदुमबाग में है। परिवार बिहारशरीफ ही रहता है। बीते 55 साल में इस परिस्थिति का सामना कभी नहीं किया था, जो आज भूखे पेट कर रहे हैं। हर किसी से उम्मीद लगा रहे हैं कि कोई परिवार तक पहुंचा दे। पटना में बाढ़ और जलजमाव में भी इतना डर नहीं लगा, जितना आज लग रहा है।

क्राइम रिपोर्टर | पटना

विभिन्न राज्यों जैसे केरल, राजस्थान, यूपी से बिहार अपने घर जाने के लिए निकले मजदूर पटना में आकर फंस गए हैं। पिछले दो दिनों से लगभग 100 मजदूर पटना में विभिन्न इलाकों में ठहरे हुए हैं। गुरुवार को केरल से पटना पहुंचे 16 मजदूर मीठापुर बस स्टैंड में थानेदार मुकेश वर्मा को मिल गए। मजदूरों ने पुलिस को बताया कि वे केरल से ट्रेन से बनारस पहुंचे। वहां से यूपी पुलिस उन्हें पिकअप के माध्यम से मुगलसराय भेज दिया। मुगलसराय से ये मजदूर पैदल ही पटना आए हैं। ये मजदूर समस्तीपुर, दरभंगा के रहने वाले हैं। थानेदार ने इन मजदूरों का खाना लिखाया। साथ ही चार राजस्थान से लौटे मजदूरों को खिलाया। इसके बाद जिला प्रशासन से बात की गई और दाे बस के माध्यम से इन 35 लोगों को उनके जिले के लिए रवाना किया गया। इसमें पीएमसीएच में इलाज करा रहे दरभंगा के पांच लोग भी थे। नेपाल में रहकर काम कर रहे कोलकाता के 44 कामगार पटना में फंसे हुए हैं। ये पटना होते हुए कोलकाता के लिए निकले थे। इनके पटना पहुंचने पर पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा हो गई और ये सब फंस गए। इन मजदूरों का मेडिकल जांच कराया गया। इनके ठहरने की व्यवस्था की गई है। अब जिला प्रशासन जल्द इन्हें बस से कोलकाता भेजेगी। कंकड़बाग साईं मंदिर के पास एक टेंट में झारखंड के कुछ युवक फंस गए हैं। उनके लिए भोजन की व्यवस्था थानेदार मनोरंजन भारती ने किया।

फुटपाथी दुकान पर खाते थे, वह बंद

अब्दुल हमीद कहते हैं कि लॉकडाउन से मेरा रोजगार तो ठप हुआ ही भोजन पर भी लाले पड़ गए हैं, क्योंकि मैं काफी बूढ़ा हो चुका हूं। खुद से खाना बनाने में असमर्थ होते हुए फुटपाथ पर खुले दाल-रोटी खाकर गुजार कर लेता था पर अब वह नसीब नहीं है। अचानक पहले एक दिन का जनता कर्फ्यू और फिर सात दिन और फिर 21 दिन के लिए हुए लॉकडाउन होने के कारण कोई साधन नहीं है जिससे मैं अपने घर जा सकूं।

अांखाें में बेबसी, चेहरे पर डर लिए पटना में परिवार से दूर फंसे अब्दुल हमीद, अपने घर बिहारशरीफ जाने के लिए लगा रहे गुहार

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