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नशा मुक्ति केंद्र से काम छोड़ किशोरों-युवाओं को इंदिरानगर में नशे की सुई देता था डॉक्टर

Patna News - नशा विमुक्ति केंद्र में काम कर चुके झोला छाप डॉक्टर शैलेंद्र कुमार को पाटलिपुत्र पुलिस ने इंदिरानगर से गिरफ्तार...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 09:31 AM IST
Patna News - the doctor used to give intoxicants to teenagers and youth in indiranagar after leaving work from the drug de addiction center
नशा विमुक्ति केंद्र में काम कर चुके झोला छाप डॉक्टर शैलेंद्र कुमार को पाटलिपुत्र पुलिस ने इंदिरानगर से गिरफ्तार किया। 52 साल का शैलेंद्र पाटलिपुत्र व आसपास के इलाकों में नाबालिग व युवकों को नशीली सुई देता था। बेचता भी था। वह नशीला सिरप व टैबलेट देकर युवकों को ड्रग एडिक्ट बना रहा था। हाल में एक ऑटो की आड़ में एक नाबालिग खुद से इंजेक्शन ले रहा था। इसका वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि यह करतूत शैलेंद्र की है। उसके बाद थानेदार केपी सिंह ने टीम के साथ इंदिरानगर के अशोक कुमार के मकान में छापेमारी की, जहां वह क्लिनिक चलाता था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके पुलिस ने औषधि विभाग काे सूचना दी। ड्रग इंस्पेक्टर रंजन कुमार क्लिनिक पहुंचे। छानबीन की तो पता चला कि उसके पास दवा बेचने का लाइसेंस नहीं है। वह डाॅक्टर भी नहीं है। मौके से बुपरे नॉरफीन व एविल इंजेक्शन के अलावा अल्प्राजोलम टैबलेट कोरटेक्स व एमरौक्स सिरप के साथ ही जनरल व मौसमी बीमारी की कई दवाएं, टैबलेट, सुई आदि बरामद किए गए। रंजन के बयान पर शैलेंद्र के खिलाफ पाटलिपुत्र थाने में केस दर्ज किया गया है। शैलेंद्र मूल रूप से नदौल (मसौढ़ी) के बेरमचक गांव का रहने वाला है। वह कई माह से यह धंधा कर रहा था। थानेदार ने बताया कि पुलिस शैलेंद्र के नेटवर्क की छानबीन करने में जुटी है।

जांच में शैलेंद्र न डॉक्टर निकला, न ही फार्मासिस्ट

इंजेक्शन का वायरल वीडियो (बाएं) सामने आने के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार(दाएं)।

नशीली दवा ही नहीं, बच्चों को इंजेक्शन की ट्रेनिंग भी देता था

बुपरे नॉरफीन नामक इंजेक्शन सामान्य रूप से उपलब्ध नहीं है। यह सुई नेपाल व बिहार की सीमाई जिलों में मिलती है। यह ऑपरेशन होने के बाद दर्द कम करने के लिए दी जाती है। दरअसल नशीला पदार्थ जब ड्रग एडिक्ट को नहीं मिलता है, तब शरीर में जोर का दर्द होने लगता है। इसी से राहत के लिए नशेड़ी इसका इस्तेमाल करते हैं। शैलेंद्र किशाेरों-युवाओं को सुई की ट्रेनिंग भी देता था।

इलाज की आड़ में करता था धंधा, नेटवर्क जांच रही पुलिस

ऑटो की आड़ में एक के हाथ में सुई लेने का वीडियो मिला तब पुलिस हरकत में आ गई। पिछले दो दिनों से पुलिस इस मुहिम में लगी थी। इसी बीच शैलेंद्र के बारे में पता चला। शैलेंद्र इलाज की आड़ में नशीली दवा का धंधा करता था। उसके पास दर्जनों बालिग व नाबालिग ग्राहक थे, जिन्हें उसने ड्रग का एडिक्ट बना दिया था। पुलिस उसके नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।

1. बुपरे नॉरफीन- 10 वाइल- सर्जरी के बाद दर्द कम करने के लिए दिया जाता है। नशेड़ी को जब नशीला पदार्थ नहीं मिलता है तब उसके शरीर में जोर का दर्द होने लगा है। इसी से राहत पाने के लिए इस इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं।

2. एविल इंजेक्शन- एंटी एलर्जिक के रूप में यूज होता है। नशेड़ी इसका डोज बढ़ाकर ले लेते हैं।

3. कोरटेक्स सिरप- 10 फाइल- खांसी के लिए है। नशेड़ी एक फाइल को एकबार में पी जाते हैं।

4. एमरौक्स सिरप- 15 फाइल- यह भी खांसी में इस्तेमाल होता है। ज्यादा डोज लेने से नशा आ जाता है।

5. अल्प्राजोलम टैबलेट- 10 स्ट्रिप- नींद की गोली। पूरा पत्ता खा लेते हैं नशेड़ी।

बरामद दवाएं

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