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हाईकोर्ट ने पटना डीएम और नगर आयुक्त से कहा- चार हफ्ते में बताएं यह सब नहीं होने देने के लिए क्या किया?

Patna News - पटना हाईकोर्ट ने पटना एम्स और रूपसपुर से पाटलिपुत्र जंक्शन जाने के रास्ते पर व्याप्त अतिक्रमण को लेकर बेहद...

Feb 15, 2020, 09:21 AM IST
Patna News - the high court asked patna dm and municipal commissioner tell me in four weeks what did you do to not let this happen

पटना हाईकोर्ट ने पटना एम्स और रूपसपुर से पाटलिपुत्र जंक्शन जाने के रास्ते पर व्याप्त अतिक्रमण को लेकर बेहद सख्ती दिखाई। कहा- एम्स से पाटलिपुत्र जंक्शन जाने वाले रास्ते का अतिक्रमण दो हफ्ते में हटाया जाए और कोर्ट में इसकी रिपोर्ट पेश की जाए। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि रूपसपुर से पाटलिपुत्र जंक्शन जाने वाले रास्ते का अतिक्रमण क्यों नहीं हटा, जबकि इसके बारे में बाकायदा आदेश दिया गया था? चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एस. कुमार की खंडपीठ शुक्रवार को भरत प्रसाद सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में पाटलिपुत्र जंक्शन पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते के इंतजाम का भी आग्रह है। कोर्ट ने राज्य सरकार और रेलवे को निर्देश दिया कि वह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रिपोर्ट दो हफ्ते में पेश करे।

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के दो साल बाद भी पाटलिपुत्र जंक्शन के एप्रोच रोड को चौड़ा कर सुलभ यातायात के लिए जनता को अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। दो लेन की सड़क में अब तक एक लेन का ही काम पूरा हो पाया है। जंक्शन जाने के लिए रूपसपुर मार्ग में अभी तक अतिक्रमण है। जंक्शन तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते को तय कर इसे अभी तक जनता के लिए नहीं खोला जा सका है। कोर्ट ने इन सभी शिकायतों को गंभीर मानते हुए कार्रवाई रिपोर्ट मांगी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी पर चार हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

पटना | पटना हाईकोर्ट ने पटना एम्स में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के बारे में एम्स प्रशासन को 4 हफ्ते में अद्यतन कार्यवाही रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एस. कुमार की खंडपीठ ने एडवोकेट मुकेश्वर दयाल की जनहित याचिका को सुनते हुए शुक्रवार को यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि 2012 से कार्यरत पटना एम्स में सुपर स्पेशिएलिटी विभाग में अब तक इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से तैयार नहीं है, न ही इस विभाग में क्षमता के अनुरूप फैकल्टी है। ऐसे में एम्स की स्थापना का न तो उद्देश्य पूरा हो रहा है और न ही बिहार की जनता को इस संस्थान के सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का लाभ पूरी तरह मिल पा रहा है। याचिकाकर्ता का कहना था कि पटना एम्स को दिल्ली एम्स जैसा बनाया जाए।

एम्स से पाटलिपुत्र जंक्शन की ओर जाने के रास्ते का अतिक्रमण दो हफ्ते में हटाकर कोर्ट को दें रिपोर्ट

मोहल्लों में कूड़ों के ढेर, फैलती बीमारी व सड़कों पर जानवरों के घूमने पर जताई नाराजगी

लीगल रिपोर्टर|पटना

पटना हाईकोर्ट ने पटना शहर में जहां-तहां कचरे के ढेर, इससे फैलती बीमारियां और सड़कों पर जानवरों के घूमने को लेकर दायर तीन जनहित याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एस. कुमार की खंडपीठ ने पटना डीएम व नगर आयुक्त को चार हफ्ते में इस बारे में कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा। कोर्ट ने इन दोनों अफसरों से पूछा है कि यह सब नहीं होने देने के लिए आखिर क्या किया गया? और अगर नहीं किया तो क्यों नहीं किया गया? तीनों याचिकाएं मुकेश कुमार, दीपक कुमार और अतुल्य गुंजन की हैं। याचिकाकर्ताओं की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि जनवरी-2017 में ही जिला प्रशासन ने कोर्ट को भरोसा दिया था कि शहर में कचरों के ढेर और सड़कों पर जानवरों के घूमने पर रोक लगाने के लिए कारगर उपाय किए जाएंगे। इसके लिए पटना डीएम, एसएसपी व नगर निगम के तमाम अधिकारियों के साथ बैठक होनी थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन साल पहले इसी मुद्दे पर बैठक करने का आदेश दिया था। इन सबके बावजूद हालात कमोबेश पहले जैसे हैं।

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