सुनवाई / हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से पूछा-हमारा आदेश समय से क्यों नहीं माना जाता?

The High Court asked the Chief Secretary - Why is our order not considered in time?
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The High Court asked the Chief Secretary - Why is our order not considered in time?

  • देवघर विद्यापीठ का मामला, एक सप्ताह में मांगा जवाब

दैनिक भास्कर

Dec 11, 2019, 03:36 AM IST

पटना. पटना हाईकोर्ट ने अपने आदेशों के समय से कार्यान्वयन के बारे में मुख्य सचिव से कई सवाल पूछे हैं। उनसे पूछा गया है-कोर्ट का आदेश समय से क्यों नहीं माना जाता? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? क्यों मुकदमों की तादाद बढ़ रही है? सरकार, लिटिगेशन पॉलिसी 2011 क्यों लाई थी? क्या इसके अनुसार काम हो रहा है? अगर होता, तो कोर्ट में अवमाननावाद के मामले नहीं बढ़ते।

मुख्य सचिव को यह सब 1 सप्ताह में बताना है। मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने राज रंजन की अवमानना याचिका को सुनते हुए मंगलवार को यह निर्देश दिया। याचिका (मामला), देवघर विद्यापीठ से साहित्य अलंकार की डिग्री लिए शिक्षक की प्रोन्नति से संबंधित है। इस डिग्री की मान्यता स्नातक स्तर की डिग्री के बराबर दी गई है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उसके साहित्य अलंकार की डिग्री को स्नातक स्तर की डिग्री मानते हुए प्रधानाध्यापक के पद पर 3 सप्ताह में प्रोन्नति व संबंधित वित्तीय लाभ देने का निर्देश दिया था। लेकिन इसके बावजूद जब ऐसा नहीं हुआ, तो याचिकाकर्ता ने कोर्ट में अवमाननावाद दायर किया।

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