अगली क्रांति शिक्षा में होगी तभी बदलेगा देश का स्वरूप

Patna News - सिटी रिपोर्टर . पटना आज बच्चे परीक्षा में फेल होने पर क्यों सुसाइड कर रहे हैं? उनके लिए एक-दो मार्क्स भी इतना मायने...

Oct 20, 2019, 08:56 AM IST
सिटी रिपोर्टर . पटना

आज बच्चे परीक्षा में फेल होने पर क्यों सुसाइड कर रहे हैं? उनके लिए एक-दो मार्क्स भी इतना मायने क्यों रख रहा है? इसकी वजह हम हैं। अगली क्रांति शिक्षा के लिए होगी। आज सारा एजुकेशन सिस्टम ध्वस्त हो गया है। ये बातें शनिवार को तुषार अरुण गांधी ने कहीं। कार्यक्रम था महात्मा गांधी एंड एजुकेशन टुडे - अ टॉक बाई तुषार ए गांधी। इसे र| सागर प्राइवेट लिमिटेड ने ऑर्गेनाइज किया था।

इस अवसर पर सेंट जेवियर स्कूल के प्रिंसिपल फादर क्रिस्टोफर, पटना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शंकर दत्त भी मौजूद थे। तुषार गांधी ने स्कूली शिक्षा पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आज शिक्षकों के पास बीएड, एमएड की डिग्रियां तो हैं लेकिन उन्हें पढ़ाने का तरीका नहीं आता। एक वाकया सुनाते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई में शिक्षकों के लिए एक कार्यशाला आयोजित की गई थी। जिसमें गांधी के विचारों को मैंने बताया। कार्यशाला के बाद कुछ शिक्षक मेरे पास आए और कहा बापू से जुड़े बीस प्वाइंट हमें लिखकर दे दीजिए ताकि हम इसे रट कर स्कूलों में बच्चों को पढ़ा सकें। मैं उनकी इस सोच से दंग रह गया। भला रट्टा मार बच्चों को क्या पढ़ाएंगे? देश में हजारों मुद्दों को उठाया जाता है लेकिन बच्चों की पढ़ाई और उनके सिलेबस के मुद्दे क्यों नहीं उठाए जाते? ऐसे में शिक्षा की स्थिति कैसे सुधरेगी?

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एजुकेशन का मतलब होता है अच्छा नागरिक बनना

तुषार अरुण गांधी ने हॉल में बैठे लोगों की शंकाओं का भी निवारण किया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी की बुराइयां हैं तो अच्छाइयां भी बहुत ज्यादा हंै। इसीलिए मोबाइल पर रोक लगाकर हम लोगों से उनकी आजादी नहीं छीन सकते। यह गलत है। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एजुकेशन का मतलब अच्छा नागरिक बनना होता है, साइंटिस्ट नहीं। साइंस के बच्चों को क्या समाज के नियमों की जानकारी नहीं होनी चाहिए? उसी तरह आर्ट्स के बच्चे क्या रुपए नहीं गिनते? तो फिर स्कूली शिक्षा में साइंस और आर्ट्स का भेदभाव कर उन्हें कुछ सब्जेक्ट तक क्यों सीमित कर दिया जाता है। ये हमारी शिक्षा पद्धति की बड़ी खामी है। इसे अब बदलने की जरूरत है।

अपने पिता अरुण मणिलाल गांधी से जुड़ा एक किस्सा सुनाते हुए उन्होंने महात्मा गांधी के दर्शन को लोगों के सामने रखा। उन्होंने बताया कि उनके पिताजी को बहुत गुस्सा आता था। एक दिन गांधी जी ने उन्हें आसमानी बिजली और टॉर्च की रौशनी के बीच विभेद करते हुए बताया कि दोनों में एनर्जी है। लेकिन एक का इस्तेमाल सब कुछ राख कर देता है तो दूसरा अपनी सकारात्मकता से रौशनी देता है। गांधी जी ने कहा कि गुस्सा गलत नहीं होता। इसका इस्तेमाल इसे सही अथवा गलत बना देता है।

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