योजनास्थल पर जितने लोग खड़े भी नहीं हो पाएंगे उतना मजदूर दिखा हड़पे 7 लाख

Patna News - जिले के पचरुखी प्रखंड की गोपालपुर पंचायत में मनरेगा के तहत बिना काम कराए ही राशि का भुगतान कर दिया गया। इससे इस...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 05:41 AM IST
Siwan News - the number of workers who will not be able to stand at the plinth site 7 lakhs
जिले के पचरुखी प्रखंड की गोपालपुर पंचायत में मनरेगा के तहत बिना काम कराए ही राशि का भुगतान कर दिया गया। इससे इस पंचायत में लाखों रुपए घोटाले का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने लोक शिकायत केंद्र में आवेदन देकर घोटाले का खुलासा किया। लोगों ने जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। इसकी प्रतिलिपि मुख्यमंत्री व डीएम को भी दी गई है। इसमें कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 व वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार योजना के तहत कई कार्य कागज पर ही कराकर दिखा दिए गए हैं। साथ ही उस कार्य के लिए स्वीकृत राशि विभाग के जेई और कर्मचारी ही डकार गए हैं। कुछ ऐसे भी कार्य कराए गए हैं, जिसकी तिगुनी राशि का उठाव की गई है। ग्रामीण आदित्य कुमार के शिकायती पत्र में कहा गया है कि गम्हरिया पंचायत में मिट्‌टी भराई व ईंट सोलिंग की अनुमानित राशि 4 लाख, 79 हजार 400 थी। इस कार्य के लिए अकुशल मजदूरों के पारिश्रमिक के तौर पर 1318 कार्य दिवस दिखाया गया है। इस पर 2 लाख 33 हजार 286 रुपए का भुगतान दिखाया गया है। जबकि कुशल मजदूर के रूप में 38 कार्यदिवस का भुगतान 9462 रुपए है। जबकि वहां पर उतने मजदूर को कार्य स्थल पर खड़ा कर दिया जाए, तो कार्यस्थल का क्षेत्र ही कम पड़ जाएगा।

पचरुखी प्रखंड के गोपालपुर पंचायत में मनरेगा के तहत बिना काम कराए ही राशि भुगतान का मामला, लोक शिकायत केन्द्र में आवेदन देकर किया घोटाले का खुलासा -ग्रामीणों का आरोप-वित्तीय वर्ष 2016-17 व वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार योजना के तहत कई कार्य कागज पर ही कराकर दिखा दिया गया है


इसी स्थान पर कराया जाना था मनरेगा से काम।

नौ हजार ईंट लगाकर बता दी 22616 ईंट

गम्हरिया के इस कार्य में सामग्री के लिए 1 लाख 53 हजार 418 रुपए का भुगतान हुआ है। इसमें दिखाया गया है कि इस कार्य में 22616 ईंट का प्रयोग हुआ है। लेकिन सच्चाई है कि इस कार्य में महज 9 हजार ईंट का ही प्रयोग हुआ है। इसके अलावा भी एक अन्य योजना में भी घोटाला हुआ है। गम्हरिया में दिवाकर ओझा के घर के सामने पोखरा का खुदाई व छठ घाट का निर्माण करना था। यहां पर 4 लाख 82 हजार 300 रुपए का अनुमानित खर्च था। इस कार्य के लिए अकुशल मजदूर के 1444 कार्यदिवस दिखाया गया है। इस तरह 2 लाख 50 हजार 378 रुपए खर्च हुआ। जबकि यहां पर कोई कार्य हीं नहीं हुआ है। दिवाकर ओझा के घर के सामने की जमीन मखनुपुर पंचायत में आती है। लेकिन, वहां पर भी कोई कार्य नहीं हुआ है।



पाेखरा खुदाई में गड़बड़ी की जांच के लिए दिसंबर में दिया गया था आवेदन

पोखरा निर्माण की जांच के लिए 26 दिसंबर को एक आवेदन देकर शिकायत की गई थी। इसके बाद जांच हुई। इसमें संबंधित अधिकारियों ने शपथ पत्र के माध्यम से बताया है कि यह कार्य श्रीनिवास ओझा के सामने पोखरा की खुदाई की गई है। जबकि वहां पर केवल पोखरा की सफाई कराई गई है। इस सफाई अभियान में लगभग 100 मजदूरों ने ही काम किया है। इसलिए, इसकी जांच कर कार्रवाई करने की मांग की गई है। ताकि, इस तरह की गड़बड़ी भविष्य में कोई नहीं कर सके।

क्या कहते हैं मनरेगा के पीओ


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