बेटी बेचवा में बाल विवाह के दर्द ने किया भावुक
एकजुट खगौल द्वारा गुरुवार को भिखारी ठाकुर की लिखित नाटक बेटी बेचवा का मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन राजेश कुमार शर्मा और सह निर्देशन अमन कुमार ने किया गया। मौके पर मुख्य अतिथि बिहार संगीत नाटक अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार त्रिपाठी, अतिथि-आर्यभट्ट निकेतन के निदेशक सत्यकाम सहाय, रंगकर्मी श्वेता श्रीवास्तव, संगीत सिन्हा और अन्य मौजूद रहे। बेटी बेचवा नाटक एक ग्रामीण परिवेश की कहानी है।
चटक और लोहा दोनों पति-प|ी है जिसकी एक बेटी है। पैसों की खातिर अपनी बेटी की शादी अधिक उम्र के आदमी के साथ कर देते हैं। मां-बाप के जिद के सामने लड़की झुक कर शादी कर लेती है। ससुराल में बहुत अत्याचार सहती है ऐसा अत्याचार जो समाज के भयावह चेहरे और इंसानियत को शर्मसार कर दे। ससुराल के जुल्मों से परेशान चटक की बेटी भागकर अपने गांव चली आती है। उसके पीछे-पीछे ससुराल वाले भी चले आते हैं। दोनों पक्षों में खूब लड़ाई शुरू हो जाती है। मसले को सुलझाने के लिए पंचायत लगती है और अंत में बेटी को ससुराल जाना पड़ा है। बेटी कहती हैं कि मर जाईब लेकिन कबहु न आईब और इसी अंत के साथ कहानी समाज काे आईना दिखाती है।
नाटक के कलाकार : मुख्य कलाकार पंच- राजेश शर्मा, चटक-सोनू कुमार, दुल्हन के पिता- रोहन राज ,लोभा-गोतमी शर्मा, दुल्हा- सुन्दर मोची, बेटी- काजल कुमारी पंडित-दीनानाथ गोस्वामी,परोस- रेखा पाण्डेय सखी-पिकी साह, बताती- प्रशांत कुमार, बिट्टू कुमार, धमेन्द्र कुमार, विशाल सिन्हा और अन्य।