स्वच्छ चांदनी और भोर की सुगंधित मंद बयार अब सपना होता जा रहा

Patna News - पानी के इस्तेमाल को लेकर कोई अनुशासन नहीं है। इसका लेवल लगातार नीचे जा रहा है। साल दर साल गर्मी बढ़ रही है, बारिश कम...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:55 AM IST
Patna News - the sunny moonlight and dawn of the morning dawn is becoming a dream now
पानी के इस्तेमाल को लेकर कोई अनुशासन नहीं है। इसका लेवल लगातार नीचे जा रहा है। साल दर साल गर्मी बढ़ रही है, बारिश कम हो रही है और इस सबके साइड इफेक्ट्स सामने आ रहे हैं। कई स्तरों पर इसके लिए काम हो रहे हैं। लेखन में भी इसे स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। ऐसी ही एक किताब लिखी है डॉ. ध्रुव कुमार ने। उनकी किताब बौद्ध धर्म और पर्यावरण का लोकार्पण राजभवन में राज्यपाल लाल जी टंडन ने किया।

इस अवसर पर लाल जी टंडन ने कहा कि आज पर्यावरण-संतुलन पर विभिन्न तरह के खतरे मंडराने लगे हैं। दुनिया के सामने सबसे बड़ा संकट ‘जल’ को ही लेकर आनेवाला है। वायु-प्रदूषण भी एक गंभीर समस्या बनती जा रहा है। स्वच्छ चांदनी और भोर की सुगंधित मंद बयार एक सपना होता जा रहा है। ऐसे में बौद्ध-दर्शन में बताए गए पर्यावरण-संतुलन के संदेश को पूरी श्रद्धा और आत्मीयता के साथ ग्रहण करना चाहिए।

पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रास बिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि कहा कि पटना में पर्यावरण के सारे नियमों का उल्लंघन किया गया। बुद्ध ने पर्यावरण की सुरक्षा पर जोर दिया था।

पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गुलाबचन्द राम जायसवाल ने कहा कि बुद्ध ने यज्ञों का विरोध इसलिए किया था कि उससे पर्यावरण को खतरा था। उन्होंने अंगुलिमाल को भिक्षु बनाया तो उसे पेड़ों में पानी देने का काम सौंपा। बुद्ध ने कई स्तरों पर पर्यावरण की सुरक्षा की अहमियत बताई और इस मायने में उनके विचार प्रासंगिक हैं। पर्यावरण की रक्षा हुई तो पृथ्वी का विनाश होने के रुक जाएगा।

प्रभात प्रकाशन के पीयूष कुमार ने कहा कि हमारी कोशिश रही है कि समाज में विमर्श हो। बुद्ध सामाजिक-सांस्कृतिक विमर्श को महत्व देते हैं। यह किताब पर्यावरण की चिंता के साथ लिखी गई है। इतिहासकार डॉ. ओ.पी. जायसवाल ने कहा कि बुद्ध पहले विचारक थे जिन्होंने कहा कि मैं जो कहता हूं उसे तर्क की कसौटी पर कसो फिर अपनाओ। वरिष्ठ कवि सत्यनारायण ने लेखक के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पुस्तक के लेखक ध्रुव कुमार ने कहा कि नई पीढ़ी के लिए पर्यावरण की रक्षा जरूरी है। धन्यवाद-ज्ञापन राज्यपाल के आप्त सचिव संजय चौधरी ने किया। इस अ‌वसर पर हरित वसुंधरा पत्रिका के संपादक मेहता नागेन्द्र सिंह, लेखक नरेन्द्र पाठक आदि कई खास मौजूद रहे।

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