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सुप्रीम कोर्ट ने कहा-रिपोर्टिंग पर रोक नहीं होनी चाहिए और न ही ऐसा हो कि कुछ भी छाप दिया जाए, इनके बीच संतुलन होना जरूरी

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की मीडिया कवरेज पर रोक लगाने के पटना हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 04:57 AM IST
मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की मीडिया कवरेज पर रोक लगाने के पटना हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और सीबीअाई से जवाब मांगा है। दोनों को एक सप्ताह के भीतर जवाब दायर करने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी मामले में मीडिया रिपोर्टिंग न तो चरम पर होनी चाहिए और न ही उस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। न ही ऐसा हो कि कुछ भी छाप दिया जाए। प्र्रेस स्वतंत्रता और मीडिया कवरेज के बीच संतुलन होना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी। गौरतलब है कि दैनिक भास्कर ने इस मामले की खबरें छापने और दिखाने पर हाईकोर्ट की रोक के आैचित्य को मुद्दा बनाते हुए प्रमुखता से उठाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर गाइडलाइंस होनी चाहिए या नहीं, इस मामले में अर्पणा भट्‌ट कोर्ट मित्र होंगी।

याचिकाकर्ता ने कहा-हाईकोर्ट का आदेश मीडिया की अभिव्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन

23 अगस्त को हाईकोर्ट ने इस मामले की खबरें छापने और दिखाने पर रोक लगा दी थी

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता निवेदिता झा की ओर से मंगलवार को वरिष्ठ वकील शेखर नाफड़े और वकील फौजिया शकील ने कहा कि पटना हाईकोर्ट का आदेश मीडिया की अभिव्यक्ति के अधिकार और उनकी लिखने की आजादी का उल्लंघन करता है। मीडिया पर मामले के प्रसारण व प्रकाशन पर पाबंदी लगाना गलत है। सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले को देख रहा है। उसने भी इस मामले में ऐसी कोई रोक नहीं लगाई। पूर्ण रूप से कवरेज पर पाबंदी लगाना सही नहीं है। इस आदेश को हटाया जाना चहिए। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने 23 अगस्त को अपने आदेश में मुजफ्फरपुर कांड से जुड़ी खबरों के प्रकाशन व प्रसारण पर रोक लगा दी थी। इस आदेश को मीडिया की आजादी पर प्रहार बताते हुए बिहार की पत्रकार निवेदिता झा ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पिछले सप्ताह दायर की थी।

भास्कर ने हाईकोर्ट के फैसले के औचित्य को मुद्दा बनाते हुए प्रमुखता से उठाया था, इसके बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

30 अगस्त के अंक में प्रकाशित।

पीड़ितों से महिला वकील के मिलने के हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत एक महिला वकील को पीड़ित बच्चियों से बात करने व उनके पुनर्वास संबंधी मामले को देखने के लिए कोर्ट मित्र नियुक्त किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में जारी किए गए फैसले की अवहेलना करता है। इससे पहले मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामला मीडिया की सुर्खियां बनने पर सुप्र्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था और मामले में पीड़ित बच्चियों व उनके परिजनों के चेहरे व पहचान किसी भी तरह से उजागर करने पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों के पुनर्वास संबंधी मामले को देखने के लिए नालसा के अधिकारी को उनसे बात करने के लिए कहा था।