शुरुआत / आर-पार की लड़ाई में उतरे दोनों गठबंधन; पोस्टर वार से हो रहा एजेंडों का सैंपल टेस्ट

राजद का पोस्टर भी आया-‘दो हजार बीस, हटाओ नीतीश।’ राजद का पोस्टर भी आया-‘दो हजार बीस, हटाओ नीतीश।’
पोस्टर का शीर्षक है- ‘हिसाब दो-हिसाब लो।’ लालू प्रसाद व राबड़ी देवी की तस्वीर। पोस्टर का शीर्षक है- ‘हिसाब दो-हिसाब लो।’ लालू प्रसाद व राबड़ी देवी की तस्वीर।
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राजद का पोस्टर भी आया-‘दो हजार बीस, हटाओ नीतीश।’राजद का पोस्टर भी आया-‘दो हजार बीस, हटाओ नीतीश।’
पोस्टर का शीर्षक है- ‘हिसाब दो-हिसाब लो।’ लालू प्रसाद व राबड़ी देवी की तस्वीर।पोस्टर का शीर्षक है- ‘हिसाब दो-हिसाब लो।’ लालू प्रसाद व राबड़ी देवी की तस्वीर।

  • दूसरे की पुरजोर आलोचना व बदनामी को, अपनी बेहतरी का आधार बनाया
  • दोनों पक्ष, ‘15 साल बनाम 15 साल’ के भाव में आमने-सामने हैं

दैनिक भास्कर

Jan 20, 2020, 05:46 AM IST

पटना (मधुरेश). सामने दिख रहे बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर शुरू पोस्टर वार, चुनावी मुद्दों, नारों और मुकाबले के तेवर की मुनादी है। चुनाव, नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री रहने देने या राजद (लालू प्रसाद) व उसके सहयोगियों का राज लाने के मुद्दे पर होगा। लोग, इन दोनों में किसे और क्यों पसंद करें, पोस्टर यही बता रहे हैं।

दूसरे की पुरजोर आलोचना व बदनामी को, अपनी बेहतरी का आधार बनाया गया है। दरअसल, सिवाय कुछ महीनों के, लालू प्रसाद व राबड़ी देवी की तरह, नीतीश कुमार के शासन के भी 15 साल हो गए। दोनों पक्ष, ‘15 साल बनाम 15 साल’ के भाव में बिल्कुल आमने-सामने हैं। जो मिजाज हैै उससे लगता है कि अबकी बार गलाकाट लड़ाई होगी।


इधर का पहला पोस्टर जदयू से आया-’क्यूं करें विचार, ठीके तो हैं नीतीश कुमार।’ इसमें ‘ठीके तो’ को ठीक नहीं माना गया। कुछ दिन बाद नया पोस्टर आया-’क्यूं करें विचार, जब हैं ही नीतीश कुमार।’ राजद कैसे चुप रहता? उसने जवाबी पोस्टर जारी किया- ‘क्यों ना करें विचार, बिहार जो है बीमार।’

बाद के दिनों में नीतीश को केंद्रित कर जदयू के और पोस्टर आए। लिखा था- ‘सच्चा है, अच्छा है, चलो नीतीश के साथ चलें’; ‘काम किया, सम्मान दिया, चलो नीतीश के साथ चलें।’ राजद ने तल्ख आलोचना वाले पोस्टर जारी किए।

पोस्टर बता रहे कि चुनावी माहौल में क्या होंगे मुद्दे

जदयू ने इस महीने नए पोस्टर से मानों अपने चुनावी एजेंडे का ऐलान कर दिया। पोस्टर का शीर्षक है- ‘हिसाब दो-हिसाब लो।’ इस पर लिखा भी है-‘15 साल बनाम 15 साल।’ इसमें लालू प्रसाद व राबड़ी देवी की तस्वीर है। उनके 15 साल के राजपाट को चारा घोटाला, बंदूक के साए में जिंदगी, खस्ताहाल सड़कें आदि के रूप में पेश किया गया है; जबकि नीतीश कुमार के 15 साल को अच्छी सड़कें, बिजली, महिला सम्मान-सशक्तीकरण आदि के कालखंड के रूप में दिखाया गया है। राजद ने इस पोस्टर का जवाब, ‘गरीबों का राज-अपराधियों का राज’ तथा ‘झूठ की टोकरी-घोटालों का धंधा’ वाले अपने पोस्टर से दिया। 

हर वार की 3 कड़ी : आरोप-प्रत्यारोप और नसीहत

लालू ने नया नारा दिया-’दो हजार बीस, नीतीश फिनिश।’ राजद का पोस्टर भी आया-‘दो हजार बीस, हटाओ नीतीश।’ जदयू का जवाबी पोस्टर जारी हुआ-’दो हजार बीस, फिर से नीतीश।’ जुबानी लड़ाई में शब्द अभी से मर्यादा खोने लगे हैं। पता नहीं आगे और क्या-क्या होगा? दिलचस्प कि इसी माहौल में दोनों पक्ष, एक-दूसरे को अक्षर या शाब्दिक ज्ञान की नसीहत भी दे रहे हैं। राजद प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद ने नीतीश कुमार को विकास पर बहस की चुनौती दी, तो सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार ने जगदानंद को कहा कि वह अपने पैतृक गांव (सहुका, कैमूर) के जदयू पंचायत अध्यक्ष से बहस कर लें। यह सब अभी और बढ़ेगा।

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