• Hindi News
  • Bihar
  • Patna
  • Siwan News the way the school remembers ishtadev before starting a new work like the school39s consciousness session

जिस तरह नया काम शुरू करने से पहले इष्टदेव को याद करते हैं उसी तरह स्कूल का चेतना सत्र

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 05:41 AM IST

Patna News - शहर के राजवंशी देवी उच्च विद्यालय सह इंटर काॅलेज में रविवार को बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों के पीडीपीईटी कोर्स की...

Siwan News - the way the school remembers ishtadev before starting a new work like the school39s consciousness session
शहर के राजवंशी देवी उच्च विद्यालय सह इंटर काॅलेज में रविवार को बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों के पीडीपीईटी कोर्स की कार्यशाला आधारित क्रियाकलाप का शुभारंभ चेतना सत्र से प्रारंभ हुआ। इसमें साधनसेवी प्रकाश चंद्र द्विवेदी ने बताया कि जिस तरह हर नया काम प्रारंभ करने से पहले लगभग हम सभी मन ही मन उस कार्य की सिद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। उसके बाद ही कार्य प्रारंभ करते हैं। कदाचित यह मनोवृति बचपन में विद्यालय जाने पर प्रार्थना सभा के साथ पठन-पाठन आरंभ करने की आदत के चलते आरंभ हुई मानी जा सकती है। श्री द्विवेदी ने बताया कि विद्यालयी शिक्षा से अछूते रहे व्यक्तियों के संबंध में भी यह तथ्य विभिन्न शोधों से प्रमाणित हुआ है कि प्रत्येक व्यक्ति कोई नया कार्य आरंभ करने से पूर्व अपने इष्टदेव का स्मरण अवश्य करता है। ठीक उसी तरह जैसे प्रत्येक विद्यालय में शिक्षण कार्य दैनिक चेतना-सत्र के आयोजन से ही प्रारंभ होता है। चेतना सत्र किसी भी विद्यालय का एक ऐसा दर्पण है जो उस विद्यालय के भौतिक, शैक्षिक, सामाजिक, मानसिक, सांस्कृतिक और आध्यत्मिक वातावरण का साफ एवं स्पष्ट चित्र दिखलाता है।

संवाद स्थापित कर सामाजिकता का भी विकास

सीखने और सिखाने की नहीं होती उम्र, जरूरत सिर्फ सकारात्मक शैक्षिक माहौल बनाने की है

कार्यक्रम में शामिल शिक्षक।

सफल संचालन के लिए छात्र-छात्राओं का सहयोग महत्वपूर्ण

डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन के साधनसेवी रमाकांत पांडेय ने बताया कि दैनिक चेतना सत्र के आयोजन का प्रारूप , ईश वंदना , देशभक्ति गान , प्रतिज्ञा , दैनिक समाचार , आज का विचार, सामान्य ज्ञान (छात्रों द्वारा दो या तीन प्रश्न), वैकल्पिक क्रियाकलाप (साप्ताहिक कैलेंडर के अनुसार), राष्ट्रीय गान, छात्रों के स्वच्छता की जांच, अपनी-अपनी कक्षाओं के लिए पंक्तिबद्ध प्रस्थान साप्ताहिक कैलेंडर का प्रारूप सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरूवार, शुक्रवार, शनिवार प्रेरक प्रसंग (अध्यापक , अध्यापिका द्वारा) कहानी (बच्चों द्वारा) प्रेरक प्रसंग (समुदाय के सदस्य , सदस्या द्वारा) कविता (बच्चों द्वारा) कहानी (अध्यापक, अध्यापिका द्वारा) सामूहिक व्यायाम प्रार्थना सभा के सुचारु रुप से संचालन के लिए विद्यालय की परिस्थितियों के अनुरूप वहां के छात्रों को सदन में विभाजित करते हुए उनसे सहयोग लिया जा सकता है, क्योंकि किसी भी विद्यालय में शिक्षण एवं शिक्षकेतर क्रियाकलापों के सफल संचालन के लिए छात्र-छात्राओं का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसप्रकार हम यह कह सकते है कि विद्यालय में छात्र-छात्राओं को शारीरिक एवं मानसिक रुप से स्वस्थ रखने का एक साधन चेतना सत्र ही हो सकता है, जो उनमें सहयोग, उदारता, सहनशीलता, अनुशासन की भावना तथा मेल-जोल जैसे गुणों को विकसित करने में सहायक हो सकता है। मौके पर अरूण कुमार, प्रशिक्षु शिक्षक मुन्ना कुमार, अखंड सिंह, कुमारी पुनीता राय,चांदनी दूबे,सुप्रिया सिंह, स्मिता कुमारी, आलोक कुमार पाठक,अशोक सिंह, कमलावती देवी,कल्याणी देवी,अवधेश कुमार द्विवेदी, राकेश कुमार बैठा,मंटू कुमार भगत,ऐश्वर्य कुमारी, टुनटुन सिंह सहित कई शिक्षक उपस्थित थे।

चेतना सत्र के समय छात्र पारस्परिक परिचय प्राप्त कर, संवाद स्थापित कर सामाजिकता का भी विकास करते हैं। सामूहिक पी. टी., योग क्रियाओं द्वारा विद्यार्थियों का शारीरिक विकास होता है। साथ ही, उनकी व्यक्तिगत सफाई की जांच होने से वे स्वच्छता संबंधी लापरवाही नहीं बरत सकते, क्योंकि कोई भी छात्र सार्वजनिक रूप से ‘गंदा विद्यार्थी’ के रूप में चिह्नित नहीं होना चाहेगा। इस समय ली जाने वाली हाजिरी से विद्यार्थियों में समय की पाबंदी व नियमितता के गुण का समावेश होता है। विद्यालय में खोई-पाई वस्तुओं के आदान-प्रदान करने हेतु भी चेतना सत्र काल उचित माना जाता है। प्रशासनिक व्यस्तता के कारण संस्था के मुखिया का विद्यार्थियों से संपर्क कम रहता है, परन्तु प्रार्थना सभा इस क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होती है। प्रार्थना सभा की इन अनेकानेक गतिविधियों में भागीदारी होने से छात्रों को अपनी कमियों और खूबियों का बोध होता रहता है और वे भविष्य में बेहतर प्रस्तुति के लिए प्रय| करते हैं। इस बहुमुखी उद्देश्य वाले कालांश के महत्व का जितना बखान किया जा ये, कम है। विद्यालय की समय-सारिणी से चेतना सत्र का निष्कासन देह से आत्मा के निष्कासन के समान है।

भगवान को याद करने से ह्रदय होता है मजबूत

समन्वयक रेणु तिवारी ने बताया कि वैसे तो आजकल के प्रचलित अर्थों में चेतना सत्र का तात्पर्य विद्यालय में शिक्षण कार्य शुरू होने से पूर्व छात्रों और शिक्षकों की एक वैसी सामूहिक सभा से है जिसमें औपचारिकतावश कुछ प्रार्थनाओं, प्रतिज्ञाओं और राष्ट्रगान का शुद्ध-अशुध्द रूप से गायन होता है, परन्तु इसके वास्तविक उद्देश्यों को देखने पर हम पाते है कि किसी भी विद्यालय में शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के प्रारंभ होने के पूर्व आयोजित होनेवाली चेतना सत्र मात्र एक औपचारिक सभा नहीं बल्कि उस पूरे दिन के संपूर्ण विद्यालयी क्रिया-कलाप के सुचारू रूप से संचालन हेतु एक सकारात्मक शैक्षिक माहौल की शुरुआत करने वाली सभा है। इससे हमें असीम ऊर्जा मिलती है। उन्होंेने आगे बताया कि सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में यूं तो विद्यालय का हर क्षण अति महत्वपूर्ण होता है परन्तु चेतना सत्र का इसलिए अधिक महत्व रखता है कि इस समय समस्त विद्यालय को एक नजर में समेटा जा सकता है। शिक्षक-शिक्षार्थी एक साथ यहां उपस्थित होते हैं। ईश-स्तुति द्वारा हृदय पक्ष मजबूत होता है वहीं सृष्टि रचयिता के प्रति निष्ठा, कृतज्ञता, का भाव उत्पन्न होता है। इसके साथ ही स्वर में स्वर मिलाने का अभ्यास भी होता है। जो सामुदायिक सहभागिता की ओर अभिप्रेरित करता है।

अनुशासन की सीख देती है प्रार्थना सभा

साधनसेवी अर्चना कुमारी ने बताया कि विद्यालय के दैनिक जीवन में अनुशासन का पहला पाठ प्रार्थना सभा से ही शुरू होता है। तन साधकर पंक्ति में खड़े होना, सभा आयोजक के निर्देशों का पालन इसके आरंभिक चरण हैं। इस दौरान गाये जाने वाले राष्ट्रगीत व राष्ट्रगान, देशभक्तिपूर्ण नारे विद्यार्थियों में मातृभूमि के प्रति प्यार, लगाव तथा समर्पण का जज्बा पैदा करते हैं। दुबले से दुबला विद्यार्थी भी बुलंद आवाज में जब नारे लगाता है तो देशमाता का सीना अवश्य ही गर्व से फूल उठता होगा। विद्यालय संबंधी निर्णय, सूचना, आदेश, निर्देश से सबको अवगत कराने का सर्वोत्तम समय चेतना सत्र ही होता है। विद्यार्थियों की विशेष उपलब्धियों के लिए यदि उनकी पीठ थपथपाना हो या फिर पुरस्कार देना हो तो इसके लिए भी चेतना सत्र का समय उचित है। इससे शिक्षार्थी का मनोबल बढ़ता है। वहीं अन्य छात्रों को प्रेरणा भी मिलती है।

X
Siwan News - the way the school remembers ishtadev before starting a new work like the school39s consciousness session
COMMENT