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कर्मियों को एसीपी का लाभ देने में उनका कांट्रैक्ट वाला कार्यकाल भी काउंट हो

2 वर्ष पहले
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पटना हाईकोर्ट ने बिहार की बिजली कंपनियों के कर्मियों को एसीपी-एमएसीपी लाभ देने में उनके कांट्रैक्ट वाले कार्यकाल की भी गणना करने का फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की एकलपीठ ने बिहार राज्य विद्युत कामगार संघ की रिट याचिका को मंजूर करते हुए बुधवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि कर्मियों की सेवा नियमित होने से पहले उनके द्वारा ठेके पर की गई सेवा को भी गिना जाए।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता संघ के वकील कुमार कौशिक ने कोर्ट को बताया कि बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी ने अपने कर्मियों को कांट्रैक्ट पर बहाल करते वक्त ही यह शर्त रखी थी कि कर्मी अपनी सेवा के नियमितीकरण के बाद किसी भी तरह के लाभ के लिए पूर्व में कांट्रैक्ट पर किए गए अपने काम को आधार नहीं बनाएंगे। यह शर्त पब्लिक पॉलिसी के खिलाफ है और भारतीय संविदा कानून की धारा 23 का उल्लंघन करती है। दूसरी तरफ, बिहार राज्य पावर होल्डिंग कंपनी के अधिवक्ता ने दलील दी कि बिहार सरकार के वित्त विभाग के मंतव्य पर ही राज्य की बिजली कंपनियों ने अपने कर्मियों को एसीपी का लाभ देने में उनके कांट्रैक्ट पर किए गए काम की अवधि की गणना नहीं करने की बात तय की है। याचिकाकर्ता के वकील का कहना था कि वित्त विभाग का मंतव्य ही बिहार सरकार के 2013 में निर्गत आदेश के खिलाफ है। राज्य सरकार, एसीपी-एमएसीपी का लाभ देने में कर्मी के कार्यकाल की गणना करने में उनकी नियमित नियुक्ति के पहले कांट्रैक्ट पर किए गए काम की अवधि को भी जोड़ने का निर्देश देती है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलील को मंजूर करते हुए उन्हें राहत दी।

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