यूएन एमपीआई रिपोर्ट-2019 / बिहार के 38 जिलों में 11 ऐसे, जिनमें 10 में 6 लोग गरीब



There are 11 in 38 districts of Bihar, out of which 10 have 6 poor
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There are 11 in 38 districts of Bihar, out of which 10 have 6 poor

  • देश के जिन जिलों में 60 प्रतिशत गरीबी वहां गरीबों की आबादी 4 करोड़, इनमें 2.8 करोड़ बिहार में
  • दशक में बिहार में आधी गरीबी घटी, फिर भी देश का सबसे गरीब राज्य बिहार

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 04:13 AM IST

पटना (शशिभूषण). संयुक्त राष्ट्रसंघ की ओर से जारी वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (ग्लोबल मल्टी-डाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स-एमपीआई) की ताजा रिपोर्ट बिहार के हुक्मरानों को थोड़ा सुकून देती है तो माथे पर चिंता की लकीरें भी उकेरती है। सुकून इस बात का कि बीते दशक में बिहार के एमपीआई में तकरीबन 50% सुधार हुआ है। चिंता इस बात की कि आज भी देश का सबसे गरीब राज्य बिहार है।

 

स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन मानकों के 10 संकेतकों पर आधारित इस रिपोर्ट का यह तथ्य और भी चौंकाता है कि बिहार के 38 जिलों में से 11 जिले ऐसे हैं जिसमें 10 में से 6 लोग गरीब हैं। यह जिले मुख्यतया उत्तर बिहार में है और अररिया व मधेपुरा में गरीबों की यह संख्या बढ़कर 10 में 7 हो जाती है। देश के 640 जिलों में से वैसे जिले जहां 60% गरीब है, ऐसे जिलों की आबादी करीब 4 करोड़ है।

 

इन 4 करोड़ लोगों में से आधे से ज्यादा ( 2 करोड़ 80 हजार) लोग बिहार के इन्हीं 11 जिलों में रहते हैं। करीब 1 करोड़ 60 हजार उत्तर प्रदेश में तो शेष छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश और उड़ीसा में रहते हैं। गरीबी का प्रमुख कारण कुपोषण, 6 वर्ष से कम की स्कूली शिक्षा है हालांकि पेयजल, स्कूलों में उपस्थिति और शिशु मृत्यु दर सरीखे मानकों में काफी सुधार हुआ है। राज्यों में सबसे अधिक सुधार झारखंड में हुआ है। सुधार के मोर्चे पर झारखंड से थोड़ा ही पीछे हैं अरुणाचल प्रदेश, बिहार,छत्तीसगढ़ और नागालैंड। इसके बावजूद बिहार सर्वाधिक गरीब राज्य है जहां आधी आबादी गरीब है।

 

report

 

इधर, देश में

}जो गरीब हैं उनमें 25% वह बच्चे हैं जिन्होंने अभी अपना 10 वां जन्मदिन भी नहीं मनाया

}एमपी का अलिराजपुर देश का सबसे गरीब जिला है यहां 76.5% आबादी गरीब है जो अफ्रीका के सिएरा लियोन के बराबर है।

}इसके उलट देश के 19 जिलों में सिर्फ 1 % आबादी गरीब है जबकि 42 जिलों में यह 2 से 5% के बीच है। 

}2005-06 से 2015-16 के बीच गरीबों की संख्या आधी हो गई है। 27 करोड़ लोग इस अवधि में गरीबी निर्धारण के तयशुदा मानकों से ऊपर उठ गए। देश में अभी 36.4 करोड़ लोग मल्टी डाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (एमपीआई) के दायरे में हैं जो पश्चिमी यूरोपीय देशों यथा जर्मनी, फ्रांस, यूके, स्पेन, पुर्तगाल, इटली, नीदरलैंड और बेल्जियम की कुल आबादी से अधिक है।

 

(नोट : रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि ये आंकड़े 2015-16 के बेसलाइन पर आधारित हैं। यह अद्यतन स्थिति नहीं बयां करते हैं। )

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