पुलिस चौकियों में कहीं बल ही नहीं तो कहीं लटके हैं ताले

Patna News - व्यावसायिक और धार्मिक आस्था का केन्द्र पटना सिटी का एक तीसरा और स्याह पक्ष भी है। घनी आबादी से घिरे इस इलाके में...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:40 AM IST
Patna News - there is no force in the police checkpoints or there are some locks
व्यावसायिक और धार्मिक आस्था का केन्द्र पटना सिटी का एक तीसरा और स्याह पक्ष भी है। घनी आबादी से घिरे इस इलाके में अपराध भी चरम पर है। शायद ही कोई दिन हो जब पटना सिटी में गोलियां न चलती हों या कोई बड़ा अपराध न होता हो। बावजूद इसके अपराध नियंत्रण के मोर्चे पर सबकुछ भगवान भरोसे ही चल रहा है।

हालत यह है कि मोहल्लों की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी जिन पुलिस चौकियों पर है उनमें या तो जवान ही नहीं हैं या फिर चौकियों में ताले लटक रहे हैं। पुलिस चौकियों पर इलाके में घूमने वाले संदिग्धों,अपराधियों की गतिविधियों,आसूचना संग्रह का का महत्वपूर्ण दायित्व होता है। लेकिन पुलिस की यह व्यवस्था ही फेल है। क्षेत्र के अधिकांश पुलिस चौकियों में बल की कमी है। इस स्थिति में अपराध होने के बाद पुलिस अपराधियों तक पहुंचने व पहचान करने में नाकाम रहती है।

पुलिस चौकियों में हवलदार के नेतृत्व में आरक्षी बल की तैनाती होती है। जिनका दायित्व होता है चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मोहल्लों में बाहरी लोगों पर निगरानी, नियमित गश्ती,संदिग्धों व जेल से रिहा हुए अपराधियों पर नजर रखना। किसी आपराधिक घटना पर होने पर थाना से पहले पहुंच कर विधि सम्मत कार्रवाई व गलियों में साइकिल से गश्ती करना। लेकिन पुलिस चौकियों में बल की कमी या फिर कुशल नेतृत्व के अभाव में पुलिस चौकी पूरी तरह से कारगर साबित नहीं हो पा रही है। ऐसे में अपराधी अपराध कर निकल जाते हैं और बाद में पुलिस हाथ मलती रहती है।

पुलिस चौकियों का दायित्व अहम

अपराध नियंत्रण की दिशा में पुलिस चौकियों का दायित्व अहम है। पुलिस चौकियों में बल की संख्या बढ़ाए जाने के लिए वरीय पदाधिकारियों को लिखा गया है। जहां भी बल या फिर नयी पुलिस चौकी खोलने की आवश्यकता है। इस दिशा में कार्य योजना चल रही है। बलिराम चौधरी, एएसपी

एक पुलिस चौकी पर एक हवलदार व चार आरक्षी की तैनाती होनी चाहिए

पुलिस पदाधिकारियों की मानें तो एक पुलिस चौकी में एक हवलदार व चार आरक्षी होना चाहिए। वर्तमान में स्थिति उलट है। रिटायर होने के बाद रिक्त पदों को भरा नहीं गया या फिर दूसरी जगहों पर प्रतिनियुक्ति में लगा दिया जाता है। ऐसे में सुरक्षा कैसे हो सकती है,इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है। पुलिस चौकियों की हालत भी ऐसी है कि उनमें रहना कठिन है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इस हालत में भी आरक्षी पुलिस चौकी में रहने से कतराते हैं। सुल्तानगंज थाना के कुछ क्षेत्र को काट कर 2007 में बहादुरपुर थाना का सृजन हुआ है। इस कारण सुल्तानगंज की पुलिस चौकी अब बहादुरपुर इलाके में चली गयी है। यहां चौकी के लिए हवलदार व पुलिसकर्मी नहीं हैं। सुल्तानगंज,मेंहंदीगंज व बाइपास थाना में पुलिस चौकी नहीं है। मोहल्लों में निगरानी व गश्ती का दायित्व थाने पर ही है। आलमगंज के सादिकपुर व महाराजगंज पुलिस चौकी में एक-एक हवलदार व चार आरक्षी हैं। आलमगंज में नई पुलिस चौकी अपराध नियंत्रण के ख्याल से बनायी गई है,लेकिन प्रतिनियुक्ति नहीं हैं। गायघाट पोस्ट में एक हवलदार हैं। एनएमसीएच में चार आरक्षी हैं। खाजेकलां थाना के क्षेत्र के लोदीकटरा व कोर्ट गश्त पुलिस चौकी, मोगलपुरा में हवलदार के साथ-चार पुलिसकर्मी हैं। मारूफगंज पुलिस चेकपोस्ट व धवलपुरा पोस्ट में मात्र तीन आरक्षी हैं।

अस्थायी पुलिस पोस्ट पर लटक रहा ताला

दशमेश पिता श्री गुरु गोविंद सिंह महाराज के 350 प्रकाश पर्व पर सिटी क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक पुलिस चौकियों की स्थापना कर बल की तैनाती हुई थी। इन पोस्टों में बल की कमी की वजह ताले लटक रहे हैं। कुछ पोस्ट पर थाने के जवान रहते हैं। एक आकलन के अनुसार सिटी क्षेत्र की आबादी करीब 18 लाख है। दूसरी तरफ चौकियों में मात्र छह हवलदार व तीन दर्जन पुलिसकर्मियों के हवाले मोहल्लों की सुरक्षा व्यवस्था है।

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