आज रात में सूर्य का संक्रमण काल, कल मनेगी मकर संक्रांति

Patna News - 14 जनवरी को मध्य रात्रि में सूर्य का संक्रमण काल होने से 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना धर्मशास्त्रोचित है।...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 05:01 AM IST
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14 जनवरी को मध्य रात्रि में सूर्य का संक्रमण काल होने से 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना धर्मशास्त्रोचित है। शास्त्रों में वर्णित है कि मध्य रात्रि में सूर्य के संक्रमण होने से अगले दिन पुण्याह होता है। इसलिए 15 जनवरी को प्रात:काल से ही स्नान, दान, पूजा-पाठ व संक्रांति निमित तक जो भी कार्य किया जाता है, संपादित होगा। मंगलवार होने के कारण ऐसी चर्चा फैलाई जा रही है कि उस दिन तिल व खिचड़ी ग्रहण नहीं करना चाहिए। लेकिन, विशेष पर्व या विशेष दिन सामान्य नियम लागू नहीं होता है। ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. राजनाथ झा ने कहा कि ऐसे में मंगलवार को तिल, खिचड़ी अादि ग्रहण करने से किसी तरह के परहेज की आवश्यकता नहीं है। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। 17 जनवरी से लगन शुरू हो रहा है, जो 11 जुलाई तक चलेगा।

मकर संक्रांति का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व भी है। जब सूर्य का संक्रमण होता है, तो उत्तरायण होते हैं। उत्तरायण सूर्य में सूर्य की उष्मा बढ़ती है, जिसके प्रभाव से मनुष्य जीवन पर कई तरह की बीमारियां उत्पन्न होती हैं। ऐसे में तैलीय प्रधान तिल ग्रहण करने से रोग से बचाव होता है। इसलिए मकर संक्रांति के दिन से तिलकुट या तिल से बने पदार्थ खाने की परंपरा रही है। तिल दान करने से राहु-केतु समेत अन्य अरिष्ट ग्रहों की शांति भी होती है। इस दिन को तिल संक्रांति भी कहा जाता है, जिसका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व भी है।

प्रयाग स्नान का विशेष महत्व

माघ महीने का प्रात: स्नान और प्रयाग में कल्पवास भी मकर संक्रांति के दिन से आरंभ हो जाता है। मकर संक्रांति को देवताओं का प्रात:काल माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन प्रात: स्नान के बाद घी, कंबल, तिल गंगा स्नान करना चाहिए। शास्त्रों में वर्णित है कि जिसके मन में चिरकाल तक स्वर्ग में रहने की इच्छा हो, वह मकर राशि में सूर्य के जाने पर शुद्ध जल से प्रात: स्नान करे, तो उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। ज्योतिषाचार्य पंडित अभय मिश्रा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन प्रयाग स्नान का बहुत महत्व है।

खोआ व नारियल तिलकुट की बिक्री सबसे ज्यादा, संक्रांति के लिए सजे बाजार

मकर संक्रांति को लेकर तिलकुट की बिक्री जोरों पर है। गुड़ से बना, नारियल तिलकुट, खास तिलकुट, महाखास तिलकुट, तीसी तिलकुट अौर शान-ए-अनीसाबाद तिलकुट समेत कई तरह के तिलकुट से बाजार भरा पड़ा है। शहर के विभिन्न चौक-चौराहे पर खुली दुकानों में रविवार की देर शाम तक तिलकुट खरीदने के लिए भीड़ दिखी। दुकानदारों ने बताया कि ज्यादातर लोग गुड़ से बने खोआ के तिलकुट, नारियल तिलकुट के साथ महाखास तिलकुट ज्यादा पसंद कर रहे हैं। अनीसाबाद स्थित राजधानी तिलकुट भंडार के छोटू ने बताया कि तीसी के तिलकुट की ज्यादा डिमांड है। विदेश से भी डिमांड है। मधुमेह से पीड़ित लोग तीसी का तिलकुट ज्यादा खरीद रहे हैं।

कदमकुआं में मकर संक्रांति के पूर्व संध्या तिलकुट की खरीदारी करते लोग।

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