नए मल्टीकलर इमेजिंग सिस्टम से एम्स में इलाज

Patna News - पटना एम्स में शनिवार को नेत्र रोग विभाग की ओर से रेटिना डायग्नोसिस पर सीएमई का आयोजन किया। इसमें पटना और बिहार के...

Oct 13, 2019, 06:10 AM IST
पटना एम्स में शनिवार को नेत्र रोग विभाग की ओर से रेटिना डायग्नोसिस पर सीएमई का आयोजन किया। इसमें पटना और बिहार के लगभग 60 नेत्र रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया। जिसमें विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सकों में ओसीटी, एफएफए और ओसीटीए और नए मल्टीकलर इमेजिंग सिस्टम की भूमिका पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। सीएमई का उद्घाटन एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. सीएम सिंह ने डीडीए परिमल सिन्हा और एचओडी रेडियोलॉजी प्रो. प्रेम कुमार के साथ किया।

एम्स के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ अमित कुमार ने कहा एम्स पटना में रेटिना के डायग्नोसिस की नई-नई तकनीकों पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि पटना एम्स में जल्द ही नेत्र से संबंधित कई रोगों के इलाज की नई तकनीकों की शुरुआत की जाएगी। जिसमें नए मल्टीकलर इमेजिंग सिस्टम से इलाज की सुविधा एम्स में आसानी से उपलब्ध रहेगा। उन्होंने कहा कि रेटिना पर मेंब्रेन ग्रोथ यानी झिल्ली के विस्तार का नतीजा एपिरेटिनल मेंब्रेन की दशा कहलाता है, जो दृष्टिबाधा का एक सामान्य कारण है। रेटिना आंख के पीछे एक पतली लेयर होती है, जो प्रकाश तरंगों को नर्व इंपल्स में तब्दील करती है, जिसे दिमाग एक तस्वीर के रूप में विश्लेषित करता है। आंखों में ट्रॉमा या डायबिटीज जैसी दशाओं के कारण इपिरेटिनल मेंब्रेन सृजित हो सकता है, लेकिन ज्यादातर यह आंखों में डाले जानेवाले तैलीय पदार्थ सरीखे वाइट्रस में स्वाभाविक बदलाव के कारणों से संबंधित होता है। उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे वाइट्रस में संकुचन पैदा होने लगता है और रेटिना की सतह से दूर खींचती जाती है, जिससे कई बार आंसू निकलने लगते हैं।

इस अवसर पर प्रो. बिंदू कुमार, प्रो एचएच सिन्हा, डाॅ रंजना कुमार, डॉ जेजी अग्रवाल, डॉ नीलेश मोहन, ज्ञान भास्कर, डाॅ अभिषेक आनंद, डाॅ अशोक लोकदर्श, डॉ सुनील कुमार सिंह भी मौजूद थे। डॉ भावेश चंद्र ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।

पटना एम्स में रेटिना डायग्नोसिस पर सीएमई पर जुटे नेत्र रोग विशेषज्ञ।

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