यूजीसी का नियम 180 दिन क्लास, पर पीयू में 155 दिन तक ही पढ़ाई

Patna News - पटना विवि में एडमिशन में देर से पड़ रहा प्रभाव पटना विवि में सत्र 2019-20 की शुरुआत के पहले पीयू प्रशासन ने 15 जुलाई...

Feb 15, 2020, 09:16 AM IST

पटना विवि में एडमिशन में देर से पड़ रहा प्रभाव

पटना विवि में सत्र 2019-20 की शुरुआत के पहले पीयू प्रशासन ने 15 जुलाई 2019 की तिथि तय की। नामांकन प्रक्रिया ऑनलाइन चली। स्नातक स्तर पर पटना विवि में लिखित परीक्षा के आधार पर नामांकन लेने की व्यवस्था है। लेकिन नामांकन प्रक्रिया में ही इतनी देर हुई कि सत्र समय पर शुरू नहीं हुआ। अमूमन विश्वविद्यालयों को एक जुलाई से सत्र शुरू कर देना होता है लेकिन नए विद्यार्थियों के नामांकन में देर के कारण यह हो नहीं पा रहा। पटना विवि में वर्तमान सत्र जैसे तैसे 15 जुलाई 2019 के बाद शुरू हुआ। लेकिन नामांकन लेने वाले विद्यार्थियों के लिए 180 दिन कक्षाएं संचालित करने की योजना ही नहीं बनी।

सत्र में क्लास

{जुलाई 14

{अगस्त 21

{सितंबर 24

{अक्टूबर 20

{नवंबर 16

{दिसंबर 19

{जनवरी 23

{फरवरी 18

पीपीयू में तो एकेडमिक कैलेंडर ही बदहाल

दो साल पहले शुरू हुए पाटलिपुत्र विवि में एकेडमिक कैलेंडर ही बदहाल है। सत्र 2019-20 में विद्यार्थियों के लिए नामांकन प्रक्रिया ही 25 अक्टूबर तक चली और परीक्षा कब होगी, विवि प्रशासन अबतक कोई तिथि तय नहीं कर सका है। 2018-19 में नामांकन लेने वाले विद्यार्थी, जो अभी सेकेंड ईयर में हैं, उनकी परीक्षा की तिथि भी तय नहीं हुई है।

पवन प्रकाश|पटना

विश्वविद्यालयों में एकेडमिक सत्र को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियम स्पष्ट हैं। इसके मुताबिक सभी काेर्स में 180 दिनों की क्लास होनी चाहिए। ये 180 दिन पूरी तरह लेक्चर, ट्यूटोरियल और सेमिनार के होंगे। नामांकन और परीक्षा जैसी दूसरी गतिविधियां इससे अलग होंगी। सत्र की नियमितता के मामले में पटना विवि का स्तर तो बेहतर है क्योंकि यहां परीक्षा से लेकर परिणाम तक सत्रवार है। पर यूजीसी के तय मानदंडों का यहां भी पालन नहीं हो रहा है।

पटना विवि में सत्र 2019-20 में नामांकन लेने वाले विद्यार्थियों को स्नातक प्रथम वर्ष की परीक्षा के लिए नामांकन फॉर्म 22 फरवरी से भरना है। ऐसे में 22 फरवरी के पहले तक की कक्षाएं ही होंगी और इस दिन तक 75 प्रतिशत उपस्थिति वाले विद्यार्थी ही फॉर्म भरेंगे। लेकिन पूरे सत्र में कक्षाएं संचालित करने के लिए विवि प्रशासन ने 155 दिनों का वक्त दिया है जो यूजीसी के नियमों के मुकाबले 25 दिन कम है। सत्र संचालन के 205 दिनों की अवधि में कुल 66 दिनों का सार्वजनिक अवकाश रहा है। इस संबंध में पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. एनके चौधरी ने बताया कि कक्षाओं को 180 दिन चलाने का बस कोरम पूरा हो रहा है। कभी अतिरिक्त कक्षाओं के नाम पर कोरम पूरा किया जाता है, कभी बिना कोरम पूरा हुए भी सत्र समाप्त हो जाते हैं। प्रो. चौधरी ने कहा कि विश्वविद्यालयों को परीक्षा संचालन की मशीन बनाने और सिर्फ डिग्री बांटने वाली संस्था से बचाना होगा और सही मायने में एकेडमिक माहौल बनाना होगा।

शिक्षकों को कैंपस में हर दिन पांच घंटे देना अनिवार्य : 180 दिन क्लास के अलावा शिक्षकों को हर दिन कैंपस में न्यूनतम पांच घंटे और हफ्ते में 40 घंटे बिताना अनिवार्य है। शिक्षकों की हाजिरी को कंट्रोल करने के लिए विश्वविद्यालयों में बायोमेट्रिक सिस्टम से लेकर अटेंडेंस मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है। लेकिन एकेडमिक कैलेंडर के मामले में बिहार का कोई विश्वविद्यालय यूजीसी के नियमों के अनुरूप काम नहीं कर रहा है।

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