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जब कोई राजा स्वार्थ के लिए लांघता है कर्तव्यों की सीमा तब आता है अंधा युग

Patna News - नाटक अंधा युग में कौरव और पांडवों में हुए महाभारत के समर की अठारहवें दिन की संध्या से कृष्ण के मृत्यु क्षण तक...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 08:40 AM IST
Patna News - when a king swings for selfishness the limit of duties comes after the dark age
नाटक अंधा युग में कौरव और पांडवों में हुए महाभारत के समर की अठारहवें दिन की संध्या से कृष्ण के मृत्यु क्षण तक खींचने का प्रयास किया गया है। अंधा युग केवल एक पूर्व घटित का पुराख्यान मात्र न होकर अपनी आंतरिक बनावट में एक गहरी प्रतीकात्मक अर्थवत्ता को भी समेटे हुए है। धृतराष्ट्र और धर्मराज युधिष्ठिर दोनों ही उस दृष्टिहीन राजनवर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो अपने स्वार्थ की सिद्धी के लिए अपनी सीमाओं को बार-बार लांघते रहने में ही अपना पुरुषार्थ समझते हैं। धृतराषट्र ने आंखों पर अनौचित्य की काली पट्टी बांध रखी थी। युग चाहे महाभारत का हो या आज का। हर हाल में इनके लिए रोजी-रोटी महत्व रखता है। यह दृश्य गुरुवार को कालिदास रंगालय में दिखा। निर्माण रंगमंच, हाजीपुर की नाट्य प्रस्तुति के लेखक धर्मवीर भारती और निर्देशक क्षितिज प्रकाश थे।

विवेकहीनता का अंधा शासन चक्र स्वतंत्रता को फूटी आंख नहीं देखता। सत्य की उंगली पकड़कर चलने वाला युयुत्सु तो कौरवों का सगा भाई था, लेकिन सत्य के कारण उसने पांडवों का साथ दिया। विजयो|्मत भीम के दुर्वचनों के कारण उसे आत्महत्या करनी पड़ी। पुत्रशोक से मर्माहत गांधारी का हृदय तार-तार हो गया। ममता ने उसे कुछ ऐसे खला कि वो परास्त हो गई। फिर से कृष्ण प्रकृति स्वरूप में उपस्थित हो माता गांधारी के श्राप को स्वीकार किया। समाज में व्याप्त असहजता, माताओं को गांधारी बन आंखों पर पट्टी चढ़ाने पर मजबूर नहीं कर रहा है। युद्ध चाहे कितनी भी बड़े आदर्शों और मूल्यों के लिए क्यूं ना लड़ा जाए, अपनी परिणति में वह घृणास्पद ही होता है। मानवता राख की बुझी हुई ढेर में रहने को विवश कर दी जाती है। हर व्यक्ति के भीतर एक दहकता हुआ हिरोशिमा और झुलसता हुआ नागासाकी है, जिसे वह किसी भी क्षण विस्फोटित करने के लिए सक्रिय है। नई पीढ़ी कुष्टग्रस्तता, जन्मांधता और विकलांगता झेल रही है।

अंधाधुंध में अधिकांश पात्र भले ही अपने-अपने अंधकार में भूल भटक रहे हैं, लेकिन कामना ज्योतिर्मय भविष्य की है। कलाकारों में जीवेश कुमार सिंह, कुमारी पुष्पम्, अंकुर प्रियदर्शी, बिट्टू कुमार, उत्तम प्रियदर्शी, सुजीत कुमार, पवन कुमार, यशवंत राज, सोनू कुमार, अमरेश कुमार श्रीवास्तव, रंधीर प्रभाकर, आदित्य राज, आकाश राज, रौशन, क्षितिज प्रकाश, प्रणव, सौरभ राज, आयुष्मान, प्रवीण, रणवीर, शिवम कुमार, बिनोद रजक, शिवम् सोनी, संतोष, बी. एन सूर्य और गुलशन कुमार ने शानदार अभिनय किया।

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