युवा जोश में होश खो रहे, नहीं संभले तो हो जाएगी बहुत देर
अलग-अलग विश्वविद्यालयाें के कॉलेजों के छात्र-छात्राओं और मनोवैज्ञानिक से बातचीत में युवा की मन:स्थिति के कई चेहरे सामने आए
ये मानसिकता गलत है। छोटी सी बात पर किसी की जान लेना कितनी गलत बात है। युवा शक्ति को अपनी ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल करना चाहिए ना कि नकारात्मक।
- शैल सिंह, छात्र जदयू, पाटलिपुत्रा विश्वविद्यालय
आज के युवा बहुत प्रैक्टिकल सोचते हैं। उनके हिसाब से कुछ नहीं होता तो वो गुस्से में बदल जाता है। युवाओं के दिमाग में इतना ज्यादा प्रेशर होता है कि वो संतुलन नहीं बना पाते और गलती कर बैठते हैं। - ऋतु रंजन, छात्रा
आज कल युवाओं को लगता है कि वो जो कर रहे हैं सही कर रहे हैं। जबकि ऐसा नहीं होता। हर किसी के पास समस्याएं हैं लेकिन इसका मतलब गुस्सा पाल कर गलत कदम उठाना नहीं होता।
-आरोही रॉय, छात्रा
इंसान की मन:स्थिति को इस तरह डायवर्ट कर दिया गया है। जिससे युवाओं में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। - मो. शाहिद
युवाओं के सोचने-समझने की शक्ति खत्म होती जा रही है। वो कैरियर पर फोकस नहीं करके लीडर बनने की होड़ में लगे हुए हैं। इसकी वजह से आपसी प्रतिद्वंदिता बढ़ती जा रही है जो हिंसक रूप ले रही है। - ब्रजेश कुमार
युवाओं में तेजी से ऊंचाई पर पहुंचने की इच्छा तीव्र होती जा रही है। जबकि इसके लिए बहुत धैर्य की चाहिए। जो गलत हैं उन्हें भी आज के समाज में प्रशंसा मिल रही है। नैतिक और अनैतिक का फासला कम हो रहा है। शिखर पर जाने के लिए कोई भी हद को पार कर रहे हैं। - प्रणीता प्रभांशु, मनोवैज्ञानिक
भोग-विलासिता वाले जीवन की युवाओं को आदत हो गई है। वो किसी दूसरे की नहीं सुनना चाहते। यह प्रवृत्ति उनसे गलत करवा रही है। - रीतेश कुमार
युवाओं की आकांक्षायें बढ़ रही हैं। उनमें आगे बढ़ने की होड़ है लेकिन उन्हें रास्ता नहीं सूझ रहा। इस वजह से उनके अंदर आक्रोश बढ़ रहा है जो हिंसक रूप ले रहा है। - सुमित
युवा अपना दबदबा हर जगहचाहते हैं। बस सोचते हैं हम एग्रेसिव होंगे तो लोग डरेंगे। इसी क्रम में वो गलत कदम उठा लेते हैं। - कुमार प्रतिष्क
युवाओं को हमेशा से ऊर्जा से लबरेज माना जाता है। उनकी छवि जोशीली होती है लेकिन आज यही शक्ति उनके लिए श्राप बनती जा रही है। वो खुद पर से नियंत्रण खोते जा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण होली के दिन कन्हैया की हत्या की घटना है। दोस्त ने छोटी सी बात पर उन्हें गोली मार दी। ये बता रहा है कि अब समाज को सचेत हो जाना चाहिए ताकि युवा अपनी एनर्जी को सही दिशा में लगाएं। इस संबंध में हमने छात्रों और मनोचिकित्सक से बात कर उनकी राय जानी।
रिपोर्ट : प्रीति सिंह. पटना